MRM अपने विस्तार, विचार और रजत जयंती की तैयारी में जुटा मंच

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, बुधवार 23 जुलाई 2025 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की अखिल भारतीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को नई दिल्ली के हरियाणा भवन में देर शाम संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता मंच के पथप्रदर्शक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री इंद्रेश कुमार ने की। इस बैठक में मंच के राष्ट्रीय संयोजक, प्रकोष्ठों के संयोजक व सह-संयोजक, विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधि और कार्यकारिणी सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत इंद्रेश कुमार के गूढ़ और प्रेरक उद्बोधन से हुई, जिसमें उन्होंने मंच की भूमिका को केवल एक संगठनात्मक इकाई नहीं, बल्कि राष्ट्र के सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण के लिए एक विचारधारा-प्रेरित आंदोलन बताया। उन्होंने कहा, "मंच आयोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे नीति निर्माण, विचार सृजन और बदलाव की चेतना तक विस्तारित किया जाना चाहिए।" उनके विचारों ने न केवल ऊर्जा दी बल्कि बैठक को वैचारिक दृष्टि से दिशा भी प्रदान की।

हर प्रकोष्ठ की रिपोर्टिंग और व्यापक संवाद :

बैठक में मंच के विभिन्न प्रकोष्ठों और प्रांतों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों पर इंद्रेश कुमार ने गहरी रुचि और गंभीर संवाद के साथ मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे आडंबर या पद की लालसा से ऊपर उठकर सेवा और राष्ट्रहित को ही अपने कर्म का आधार बनाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच की आत्मा वे जमीनी कार्यकर्ता हैं, जो निस्वार्थ भाव से समाज के अंतिम पंक्ति तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समर्पित लोगों को आगे लाने और नेतृत्व सौंपने का निर्णय मंच के दीर्घकालिक भविष्य को नई शक्ति देगा।

संगठन विस्तार की रणनीतिक योजना :

बैठक में यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच को अब देश के अंतिम व्यक्ति तक ले जाने का वक्त आ गया है। इसके लिए ग्राम, मंडल, जिला और राज्य स्तर पर कार्यकर्ताओं को अधिकार, जवाबदेही और निर्णायक भूमिका दी जाएगी। इंद्रेश कुमार ने कहा, "जो कार्यकर्ता ज़मीन से जुड़े हैं, समाज की नब्ज़ को जानते हैं और ईमानदारी से काम करते हैं, अब उन्हें ही नेतृत्व दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं में नेतृत्व निर्माण की प्रक्रिया को एक सामाजिक निवेश की तरह देखा जाएगा, जिससे संगठन की नींव और भी मजबूत होगी।

बौद्धिक प्रकोष्ठ को मिला नई ऊर्जा और विचारशक्ति :

बैठक में विशेष चर्चा बौद्धिक प्रकोष्ठ पर हुई। तय किया गया कि मंच का बौद्धिक पक्ष और अधिक प्रभावशाली, दृष्टिपरक और समसामयिक बने। इंद्रेश कुमार ने कहा, “कोई भी आंदोलन तब तक स्थायी नहीं हो सकता, जब तक उसके पास वैचारिक गहराई, नीति निर्धारण की दृष्टि और संवाद की संस्कृति न हो। विचार ही संगठन की आत्मा है। इसके लिए मंच अब ऐसे विद्वानों, शिक्षकों, न्यायविदों, डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, प्रशासकों, पूर्व सैन्य अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक समर्पित टीम तैयार कर रहा है, जो मंच को वैचारिक नेतृत्व और नीति संबल प्रदान करेगी। यह टीम न केवल राष्ट्रीय विमर्शों में भागीदारी करेगी, बल्कि मुस्लिम समाज के उत्थान की ठोस नीतियाँ भी सामने रखेगी। हालांकि उन्होंने यह भी साफ तौर पर कहा कि यह प्रकोष्ठ भी मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के केंद्रीय टीम के मातहत ही अपना काम करता रहेगा। 

अगस्त-सितंबर के आयोजनों से होगी नई वैचारिक यात्रा की शुरुआत :

बैठक में घोषणा की गई कि मंच अगस्त और सितंबर के महीनों में दो बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करेगा—एक भारत के मुकुट जम्मू-कश्मीर में और दूसरा देश की राजधानी दिल्ली में। दिल्ली का आयोजन केवल जनभागीदारी का नहीं, बल्कि विचार, संस्कृति और एकता का विराट संगम होगा। इंद्रेश कुमार ने इस अवसर पर कहा, “दिल्ली और कश्मीर के आयोजन हमारी साझा विरासत, विचारशीलता और राष्ट्रवाद को मज़बूत करने के ऐतिहासिक पड़ाव होंगे। इन्हें केवल भीड़ नहीं, विचारों की ध्वजा के रूप में देखिए।”

वैश्विक मुद्दों पर भारत की भूमिका और मंच की दृष्टि :

इस बैठक में दुनिया के वर्तमान संकटों पर भी गहन चर्चा हुई—विशेष रूप से इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान की अस्थिरता जैसे विषयों पर। इंद्रेश कुमार ने मंच की ओर से स्पष्ट किया कि भारत का मूल चरित्र अहिंसा, शांति और संवाद का रहा है। उन्होंने कहा, “‘वसुधैव कुटुंबकम्’ कोई नारा नहीं, भारत की शाश्वत चेतना है। जो निर्दोषों की हत्या करता है, वह कभी भारत का मित्र नहीं हो सकता। उन्होंने महाभारत का संदर्भ देते हुए कहा कि जब युद्ध भी हुआ, तो वह न्याय के लिए था और मात्र 18 दिनों में समाप्त हो गया। भारत की संस्कृति किसी भी प्रकार की लम्बी युद्धवृत्ति को स्वीकार नहीं करती।

युवाओं की भागीदारी: विचार और नेतृत्व में नवाचार की जरूरत :

बैठक में डॉ.शाहिद अख्तर और मोहम्मद अफजाल ने युवाओं की संगठन में निर्णायक भूमिका की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संगठन को युवा ऊर्जा, विचारशीलता और टेक्नोलॉजी-प्रवीणता से जोड़ा जाए। इस पर इंद्रेश कुमार ने स्पष्ट कहा, “युवाओं को केवल कार्यकर्ता नहीं, विचार और भविष्य के वाहक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्हें जोश ही नहीं, वैचारिक धैर्य भी चाहिए। मंच की ज़िम्मेदारी है कि वह उन्हें सही मार्गदर्शन दे। बैठक में यह भी तय किया गया कि युवाओं को हर स्तर पर शामिल किया जाएगा, जिससे संगठन में सतत विकास की प्रक्रिया बनी रहे।

प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी: संवाद और संगठन का विस्तार :

इस ऐतिहासिक बैठक में मंच के तमाम वरिष्ठ और सक्रिय प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें मोहम्मद अफजाल, डॉ. शाहिद अख्तर, विराग पाचपोर, गिरीश जुयाल, इस्लाम अब्बास, अबु बकर नकवी, एस. के. मुद्दीन, डॉ. शालिनी अली, मोहम्मद इलियास, इरफान अली पीरजादा, मोहम्मद हबीब, मज़ाहिर खान, डॉ. ताहिर हुसैन, शाहिद सईद, मोहम्मद फारूक,  इमरान चौधरी, हाफिज साबरीन, शिराज कुरैशी, बिलाल उर रहमान, रेशमा हुसैन, तसनीम पटेल, शाइस्ता शमी, डॉक्टर रेहान, प्रोफेसर रिजवान खान, बाबा जियारत अली मलंग, सीमा जावेद, फैज़ खान, शमीम बानो, ठाकुर राजा रईस, कल्लू अंसारी, शफकत कादरी, अल्तमश खान बिहारी, जाहिर हुसैन, ताहिर मुस्तफा, मीर नज़ीर, शाकिर हुसैन, अनील गर्ग, सुषमा पाचपोर, सफीना बेगम, बबली परवीन, डॉ. सलीम, ताहिर शाह, कारी जमाल अबरार जैसे समर्पित चेहरे शामिल रहे।इनमें से अनेक सदस्यों ने विचार, अनुभव और संगठन के भीतर संवाद को मज़बूत करने के लिए अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए, जिनका मंच के भविष्य की रणनीति में विशेष स्थान रहेगा।

25वीं वर्षगांठ की ऐतिहासिक तैयारी: नई ऊर्जा, नई दिशा :

बैठक के अंत में इंद्रेश कुमार ने यह ऐलान किया कि मंच अब कुछ ही महीनों में अपनी स्थापना की 25वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। यह केवल एक आयोजन नहीं होगा, बल्कि मंच की अब तक की यात्रा का मूल्यांकन, भविष्य की रणनीति और राष्ट्रीय संवाद का नया शंखनाद होगा। उन्होंने कहा 25 वर्षों की यात्रा महज वर्षों का गणित नहीं है, यह विचारों, संघर्षों, संवादों और संकल्पों का इतिहास है। यह वर्षगांठ नए युग की भूमिका लिखेगी। उससे पहले जो बैठकें होंगी, वे मार्गनिर्धारण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहेंगी।

संकल्प और समापन: सेवा, संवाद और राष्ट्र प्रथम का आह्वान :

बैठक का समापन सभी प्रतिनिधियों द्वारा लिए गए इस संकल्प से हुआ कि मंच देश के हर तबके से संवाद स्थापित करेगा, सेवा को प्राथमिकता देगा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों को गति देगा। इंद्रेश कुमार ने समापन वक्तव्य में कहा, “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच कोई आंदोलन नहीं, यह भारत की आत्मा से जुड़ी एक मूल्य आधारित यात्रा है जो न केवल मुसलमानों को, बल्कि पूरे भारत को एक नई चेतना, नई दिशा और नया आत्मबल देगी।

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