डिफेन्स टेक सेक्टर बन रहा है भारत का नया बड़ा रोजगार स्रोत : सीआईईएल एचआर अध्ययन

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 30 जनवरी 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। सीआईईएल एचआर द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत का डिफेन्स टेक्नोलॉजी सेक्टर तेज़ी से उच्च-कौशल, औपचारिक और भविष्य-उन्मुख रोज़गार का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। यह क्षेत्र अब केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप मिशन-क्रिटिकल नौकरियों का भरोसेमंद स्रोत बनकर उभर रहा है।अध्ययन के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में डिफेन्स टेक से जुड़ी भर्तियाँ लगभग दोगुनी हो गई हैं। वर्ष 2022 में जहां इस क्षेत्र में करीब 3,500 पद उपलब्ध थे, वहीं वर्तमान अवधि में यह संख्या बढ़कर लगभग 7,000 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि दीर्घकालिक आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण कार्यक्रमों के कारण लगातार बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल भर्ती मांग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रडार सिस्टम, RF इंजीनियरिंग और सुरक्षित संचार तकनीकों में केंद्रित है।  इसके साथ ही, उच्च-प्रौद्योगिकी डिफेन्स भूमिकाओं में 2022 के बाद से औसतन 30 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र में विशेषज्ञ कौशल की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

एयर और एयरोस्पेस सिस्टम्स डिफेन्स टेक भर्ती का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बनाते हैं। वहीं, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और स्पेस टेक्नोलॉजी मिलकर कुल मांग का 26 प्रतिशत योगदान देती हैं। नेवल और मैरीटाइम सिस्टम्स (19 प्रतिशत), लैंड सिस्टम्स (14 प्रतिशत) और अनमैन्ड प्लेटफॉर्म्स (10 प्रतिशत) इस बदलाव को रेखांकित करते हैं कि रक्षा प्रणालियां तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स-प्रधान और नेटवर्क आधारित होती जा रही हैं। CIEL HR के एमडी एवं सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि डिफेन्स टेक सेक्टर भारत के लिए न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उच्च-कौशल, स्थायी और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक रोज़गार का एक मजबूत आधार भी बन चुका है।हालांकि, अध्ययन में यह भी सामने आया है कि तेज़ विस्तार के बावजूद सोल्जर प्रोटेक्शन सिस्टम्स, एवियोनिक्स एवं मिशन सॉफ्टवेयर, नेवल इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन स्वार्म तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कौशल की कमी बनी हुई है, जिस पर दीर्घकालिक निवेश और प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

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