एआई आधारित आई स्कैन से बिना खून की जांच मधुमेह की पहचान संभव
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 30 जनवरी 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। अब मधुमेह डायबिटीज की पहचान बिना खून की जांच के भी संभव हो सकती है। येनेपोया डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय, मंगलुरु, मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन, चेन्नई, और एमोरी यूनिवर्सिटी, अटलांटा अमेरिका के शोधकर्ताओं की एक संयुक्त टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए आंखों की रेटिना की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीर से डायबिटीज का पता लगाया जा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, रेटिना शरीर का एकमात्र ऐसा हिस्सा है जहां बिना किसी सर्जरी या इनवेसिव प्रक्रिया के जीवित रक्त वाहिकाओं को सीधे देखा जा सकता है। एआई तकनीक रेटिना में मौजूद रक्त वाहिकाओं की बनावट का विश्लेषण कर उन सूक्ष्म बदलावों की पहचान करती है, जो डायबिटीज से जुड़े होते हैं और जिन्हें सामान्य मानव आंख नहीं देख पाती। यह अध्ययन 23 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय जर्नल डायबिटीज टेक्नोलॉजी एंड थेरेप्यूटिक्स में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में बताया गया है कि इस तकनीक से बिना फिंगर-प्रिक ब्लड टेस्ट के मधुमेह से ग्रस्त और गैर-मधुमेह व्यक्तियों में अंतर किया जा सकता है। डॉ. मोहन’स डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर के चेयरमैन और देश के वरिष्ठ मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. वी. मोहन ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और कई मामलों में इसकी पहचान समय पर नहीं हो पाती। उन्होंने कहा, “यदि एआई आधारित रेटिनल इमेजिंग से मधुमेह की शुरुआती पहचान संभव होती है, तो भविष्य में यह बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग के लिए एक प्रभावी और सुलभ माध्यम बन सकती है। हालांकि, इसके लिए और व्यापक अध्ययन आवश्यक हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक कम लागत वाली है और नियमित नेत्र जांच के दौरान ही डायबिटीज की पहचान में सहायक हो सकती है।




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