Avro India ने किया नई मिसाल कायम
भारत की सबसे बड़ी फ्लेक्सिबल प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट के साथ कचरे को संपदा में बदलने की
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 9 जनवरी 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। देश में प्लास्टिक-मोल्डेड फर्नीचर बनाने वाली अग्रणी कंपनी, Avro India Limited ने आज गाजियाबाद में अत्याधुनिक सुविधाओं वाली अपनी ग्रीनफील्ड रीसाइक्लिंग फैसिलिटी का शुभारंभ किया। इस पहल के साथ कंपनी अब भारत में पर्यावरण से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौती, यानी मुश्किल से प्रोसेस होने वाले प्लास्टिक कचरे की रीसाइक्लिंग का समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस फैसिलिटी का संचालन AVRO रीसाइक्लिंग लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, जो Avro India Limited की 100% स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इस फैसिलिटी में भारत का सबसे बड़ा फ्लेक्सिबल प्लास्टिक रीसाइक्लिंग प्लांट स्थित है, जिसकी मौजूदा प्रोसेसिंग क्षमता हर महीने 500 मीट्रिक टन (MTPM) है। कंपनी ने वित्त-वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही तक इस क्षमता को बढ़ाकर 1,000 MTPM करने की योजना बनाई है।
इस रीसाइक्लिंग प्लांट में अब तक ₹25 करोड़ का पूंजीगत निवेश किया गया है, और इसमें वित्त-वर्ष 2027 तक ₹30 करोड़ और निवेश करने की योजना बनाई गई है। पर्यावरण की हिफाजत के अपने लंबे समय के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, कंपनी आने वाले समय में ग्रीनफील्ड रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट्स के ज़रिए पूरे भारत में विस्तार करने की योजना भी बना रही है। Avro इंडिया लिमिटेड की स्थापना साल 2002 में हुई थी, और कंपनी पूरे भारत में घरों, व्यवसायों और संस्थानों को लगातार टिकाऊ, अव्वल दर्जे की गुणवत्ता वाले और किफायती प्लास्टिक-मोल्डेड फर्नीचर उपलब्ध करा रही है। आज कंपनी ने देश भर में अपनी पहचान बनाई है, साथ ही यह NSE और BSE दोनों पर सूचीबद्ध है। Avro ने देश का सबसे बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार किया है, जिसके साथ 24 राज्यों के 300 से ज़्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स और 30,000 से ज़्यादा रिटेलर्स जुड़े हुए हैं।
लंबे अरसे से सीमेंट, नमक, चीनी और पुट्टी की बोरियों और कैल्साइट पैकेजिंग जैसे प्लास्टिक कचरे की प्रोसेसिंग करना लगभग नामुमकिन था, और यह मान लिया गया था कि ऐसे कचरे को रीसायकल नहीं किया जा सकता। इसे या तो कम गुणवत्ता वाले कामों में इस्तेमाल किया जाता था, या फिर असंगठित क्षेत्र द्वारा इनका निपटान किया जाता था। तीन साल से ज़्यादा वक्त तक गहराई से रिसर्च, परीक्षणों और टेक्नोलॉजी में इनोवेशन के बाद, Avro ने अपना खुद का एक ऐसा सिस्टम तैयार कर लिया है जो इस तरह के जटिल प्लास्टिक कचरे को बड़े पैमाने पर बेहतर उपयोग के लायक बना सकता है। इसकी मदद से भारत में हर साल निकलने वाले करीब 10 लाख मीट्रिक टन (MTPA) प्लास्टिक कचरे की सही तरीके से प्रोसेसिंग करना अब मुमकिन हो गया है। इस फैसिलिटी में रीसाइक्लिंग के बाद तैयार किए जाने वाले ग्रैन्यूल्स का इस्तेमाल प्लास्टिक फर्नीचर, एयर कूलर, वॉशिंग मशीन, गाड़ियों के पुर्जों के साथ-साथ उद्योगों तथा घरों में उपयोग होने वाली कई मूल्यवान चीजों के निर्माण में किया जाता है। वर्जिन प्लास्टिक के मुकाबले 40% तक सस्ते होने के बावजूद ये ग्रैन्यूल्स कठोर तकनीकी मानकों पर खरे और बेहद टिकाऊ होते हैं। इससे निर्माताओं को लागत में बचत करने, नियमों का पालन करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बने रहने में मदद मिलती है। भारत सरकार द्वारा लागू एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) नियमों के तहत अब रिजिड प्लास्टिक में कम-से-कम 30% रीसायकल किए गए प्लास्टिक सामग्री का इस्तेमाल करना अनिवार्य हो गया है। इस वजह से कई बड़े ब्रांड्स अच्छी गुणवत्ता वाले रीसायकल किए गए कच्चे माल की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। इस समस्या का समाधान निकालने वाली कंपनी, Avro India अब इस उद्योग से जुड़ी कंपनियों को बड़े पैमाने पर और लगातार अच्छी गुणवत्ता वाले रीसाइकिल प्लास्टिक उपलब्ध करने के मामले में देश की सबसे बड़ी और सबसे भरोसेमंद कंपनी बन गई है।
मौजूदा प्रगति पर अपनी राय जाहिर करते हुए, Avro India Limited के अध्यक्ष एवं पूर्णकालिक निदेशक, श्री सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा भारत में प्लास्टिक की समस्या का समाधान छिटपुट कोशिशों से संभव नहीं है। इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रयास, टेक्नोलॉजी और मजबूत इरादे की ज़रूरत है। Avro में, हमने कई सालों तक रिसर्च के बाद एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जो जटिल प्लास्टिक कचरे को मूल्यवान कच्चे माल में बदल देता है। हमारा लक्ष्य सिर्फ रीसाइक्लिंग करना नहीं है बल्कि हम पूरे देश में एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं जो कचरे को संभावनाओं में बदले और हमारी धरती को भी सुरक्षित रखे। Avro India आने वाले समय के लिए पूरे भारत में मदर एंड बेबी रीसाइक्लिंग प्लांट्स का एक नेटवर्क तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य कचरे की प्रोसेसिंग को स्थानीय स्तर पर लाना और भारत को एक ऐसी अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करना है जहाँ कुछ भी बेकार न जाए। कंपनी ने इनोवेशन, बड़े पैमाने पर काम और आपसी सहयोग के ज़रिए भारत को प्लास्टिक कचरे के सस्टेनेबल तरीके से निपटान में विश्व गुरु बनाने में अहम भूमिका निभाने का लक्ष्य रखा है।




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