जापान में सजेगा 27वां अंतर्राष्ट्रीय सिंधी सम्मेलन

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 22 जनवरी 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। सिन्ध केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक शाश्वत विचार है, जो हर सिंधी के हृदय में धड़कता है। सिन्ध की पावन धरा, जो वैदिक काल से ही सिंधु सभ्यता का उद्गम स्थल रही है, उसकी गौरव गाथा आज भी कालजयी है। यह वह भूमि है जहाँ ऋग्वेद की ऋचाओं ने पहली बार आकार लिया, जहाँ भगवान राम के वंशजों का प्रताप फैला और जहाँ हिंदू संस्कृति की जड़ें सबसे गहरी जमीं। सिन्ध का इतिहास पुस्तकों के पन्नों में ही नहीं, बल्कि हर सिंधी के रक्त में प्रवाहमान है। ​सन 1947 में अखंड भारत का विभाजन एक अमिट घाव दे गया। उस विभीषिका ने लाखों हिंदू सिंधियों को अपनी मातृभूमि से विछोह का दंश दिया। माताओं की सूनी गोद, खेतों में बिखरा रक्त और मंदिरों की थमी हुई घंटियां वह पीड़ा शब्दों से परे है। ​किंतु, विस्थापित होकर भारत और विश्व के कोने-कोने में पहुंचे सिंधियों ने हार नहीं मानी। उनके पुरुषार्थ ने राख से सोना उगाया। आज भले ही हम सिन्ध से दूर हैं, लेकिन सिन्ध की मिट्टी की सोंधी खुशबू हमारी सामूहिक चेतना का हिस्सा है, जो हमें बार-बार एकजुट करती है।

​बिखरे हुए मोतियों को माला में पिरोने का कार्य सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया पिछले 26 वर्षों से निरंतर कर रही है। संस्था का ध्येय स्पष्ट है सिंधी भाषा, संस्कृति और हिंदू मूल्यों का संरक्षण। ​नई पीढ़ी के भीतर 'सिन्धीयत' की लौ को प्रज्ज्वलित रखना। ​वैश्विक स्तर पर सिंधी समाज को एक मंच प्रदान करना। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु, अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दुबई जैसे देशों में सफल यात्राओं के बाद, अब कारवां उगते सूरज के देश की ओर बढ़ रहा है। ​जापान में 27वां सिंधी इंटरनेशनल कॉन्क्लेव: एक भव्य आयोजन संस्था के माननीय संस्थापक अध्यक्ष श्री सुरेश केसवानी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और ऊर्जावान पदाधिकारियों के सहयोग से 27वें सिंधी इंटरनेशनल कॉन्क्लेव का भव्य आयोजन जापान में किया जा रहा है।

​इस ऐतिहासिक यात्रा का कुशल नेतृत्व श्री गुलाब लढाणी: राष्ट्रीय अध्यक्ष, ​श्री अशोक निचानी: अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री अशोक भेरवानी: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्री चंद्र लालचंदनी: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्री अशोक लालवानी: नार्थ इंडिया अध्यक्ष, ​श्री राजिंन्द्र मनवानी: राष्ट्रीय यूथ अध्यक्ष एवं अन्य समर्पित साथी कर रहे हैं। जापान की सरज़मीं पर आयोजित इस सम्मलेन में परिचय सत्र, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम और सिंधी विरासत पर गहन चर्चा होगी। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि लोकगीतों, नृत्यों, लजीज व्यंजनों और आध्यात्मिक परंपराओं के माध्यम से सिंधी संस्कृति का वैश्विक उत्सव होगा। ​सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया इस 'सिन्धीयत प्रचार यात्रा' में सम्मिलित होने वाले सभी श्रद्धालु यात्रियों का हार्दिक अभिनंदन करती है। आपकी उपस्थिति सिन्ध की गौरव गाथा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी। आइए, हम सब मिलकर सिन्धीयत की इस अखंड ज्योति को सदा देदीप्यमान रखें!

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