अंतरधार्मिक विवाह रोकने के लिए कानून बनाने की अकाली दल ने किया मांग

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 26 फरवरी 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। सिख बेटियों के अंतरधार्मिक विवाह तथा धर्मांतरण की लगातार सामने आ रहीं घटनाओं  के लिए कमजोर कानूनों को शिरोमणी अकाली दल, दिल्ली इकाई ने जिम्मेदार बताया है। पार्टी कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना तथा मनजीत सिंह जीके ने कश्मीर के बारापूला से 12 फरवरी को अगवा हुई सिख बेटी की हैदराबाद से हुई बरामदगी की जानकारी दी। सरना ने कहा कि हम इस मामले में बारामूला पुलिस का धन्यवाद करते है, जिन्होंने त्वरित कार्रवाई करके बेटी को परिवार के पास वापस पहुंचाया है। इस मामले में आरोपी की पकड़ के लिए कश्मीर पुलिस द्वारा की गई छापेमारी के समय बेटी के परिवार की मदद दिल्ली कमेटी द्वारा नहीं करने पर गुस्सा जताते हुए सरना ने कहा कि कोई भी संगठन लोगों से चलता है, पर इस समय संगठन के तौर पर दिल्ली कमेटी की कारगुजारी सिखों को ही रास नहीं आ रही। सरना ने उक्त परिवार के सहयोग के लिए दिल्ली कमेटी सदस्य सतनाम सिंह, अकाली नेता गुरपाल सिंह बाजवा तथा जीके के द्वारा किए गए कार्यों के लिए उनका आभार व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने सिख बेटियों के अंतरधार्मिक विवाह को रोकने के लिए बेटी के अभिभावकों की मर्जी को लाजमी करने की भी सरकार से मांग उठाई।

जीके ने दावा किया कि इस कश्मीरी सिख बेटी को ब्लैकमेल करने तथा बेचने तक की कोशिश इसको अगवा करने वाले आपराधिक प्रवृत्ति के एक मुस्लिम युवक ने की थी। पर बारामूला पुलिस की तत्परता तथा दिल्ली के जामिया थाने की पुलिस के सहयोग से हैदराबाद से बेटी बरामद हुई है। जीके ने कहा कि आप इसको लव जिहाद कहो, ग्रुमिंग गैंग का काम कहो या धर्मांतरण की कोशिश कहो, पर यह बेटी के परिवार के लिए ज़हर है। बीते दिनों लंदन में ग्रुमिंग गैंग के द्वारा नाबालिग सिख बेटी को बहला-फुसलाकर अगवा करके  सामने आई "कौर टू खान" थ्योरी का हवाला देते हुए जीके ने इस मामले में सिखों को जागरूक होने की अपील की। जीके ने कहा कि सिख बेटियों के अंतरधार्मिक विवाह रोकने के लिए पहलकदमी सिखों को करनी चाहिए। क्योंकि नकारा कानून ऐसे मसलों पर नाकाफी हैं। इस मौके पर दिल्ली कमेटी सदस्य सतनाम सिंह, महिंदर सिंह, अकाली नेता डॉ परमिंदर पाल सिंह, गुनजीत सिंह बख्शी, जतिंदर सिंह बोबी, हरजिंदर सिंह, परमजीत सिंह मक्कड़, हरविंदर सिंह तथा बख्शीश सिंह आदि मौजूद थे।

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