भारती इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी और यूपी स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के बीच नॉलेज पार्टनरशिप पर एमओयू साइन
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 6 मार्च 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), लखनऊ। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के भारती इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी ने उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के साथ एक नॉलेज पार्टनरशिप के अंतर्गत मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) साइन किया है। इस नॉलेज पार्टनरशिप के तहत स्टेट डेटा अथॉरिटी की स्थापना और उसे मजबूत बनाने के लिए टेक्निकल सपोर्ट, एनालिटिकल सपोर्ट तथा कैपेसिटी बिल्डिंग सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि गवर्नेंस सिस्टम अधिक प्रभावी, पारदर्शी और रिजल्ट-ओरिएंटेड बन सके। इस ज्ञान साझेदारी के तहत, भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी की टीम स्टेट डेटा अथॉरिटी, स्टेट मेटाडेटा रजिस्ट्री बनाने और इंटरऑपरेबिलिटी प्रोटोकॉल और स्ट्रेटेजिक फ्रेमवर्क बनाने में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन को अपना सपोर्ट देगी। यह सहयोग डेटा गवर्नेंस को “विकसित उत्तर प्रदेश 2047” विज़न के केंद्र में रखता है, जो राज्य को बिखरे हुए, डिपार्टमेंट-स्पेसिफिक डिजिटल साइलो के माहौल से एक इंटीग्रेटेड, एनालिटिक्स-रेडी इकोसिस्टम की ओर ले जाता है।
इस एम.ओ.यू पर हस्ताक्षर स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एसटीसी) और प्लानिंग विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के सीईओ मनोज कुमार सिंह तथा अश्विनी छत्रे, एसोसिएट प्रोफेसर और एक्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर एवं डॉ. आरुषि जैन, पॉलिसी डायरेक्टर और सरकारी मामलों की प्रमुख, भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा किए गए। एम.ओ.यू पर हस्ताक्षर करते हुए मनोज कुमार सिंह ने कहा, “$1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था तक पहुंचने के लिए, हमें सैंपल पर आधारित डेटा से आगे बढ़कर रियल-टाइम, पूरी आबादी के लिए शासन प्रणाली की ओर बढ़ना होगा। इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस के साथ यह एम.ओ.यू एक बुनियादी सुधार है, जिसके अंतर्गत स्टेट डेटा अथॉरिटी रॉ डेटा को कारगर जानकारी में बदलने के लिए आवश्यक संस्थागत तालमेल प्रदान करेगी, ताकि पॉलिसी का हर निर्णय कठोर प्रमाणों पर आधारित हो। इस एम.ओ.यू के अंतर्गत स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के अंदर एक मिशन-मोड वर्टिकल के रूप में स्टेट डेटा अथॉरिटी (एस.डी.ए) का गठन किया जाएगा। एस.डी.ए एक रेगुलेटरी और स्टैंडर्ड निर्धारित करने वाली संस्था के रूप में काम करेगी तथा स्थिर आर्थिक विकास के लिए आवश्यक संस्थागत क्षमता का निर्माण करेगी।
इस पहल की तकनीकी दूरदर्शिता पर जोर देते हुए भारती इंस्टीट्यूट ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी की एक्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर, प्रोफेसर अश्विनी छत्रे ने कहा इस सहयोग के अंतर्गत हम एक मानक आधारित परिवेश का निर्माण करने पर केंद्रित रहेंगे। स्टेट मेटाडेटा रजिस्ट्री का गठन करके, हम बंटे हुए विभागों की समस्या को हल कर रहे हैं, जिनकी वजह से बड़े स्तर पर डिजिटाइजेशन में अक्सर दिक्कत होती है। यह केवल टेक्नोलॉजी का उपयोग करने के लिए नहीं है, बल्कि यह डेटा के अनुशासन की संस्कृति का विकास करने और आने वाले दशक में राज्य को ए.आई-रेडी बनाने के लिए भी है। डॉ. आरुषि जैन ने कहा हमारे इस सहयोग से राज्य को प्रमाण-आधारित शोध और डेटा सिस्टम मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। हम नागरिक-केंद्रित, परिणाम-आधारित शासन को बढ़ावा देना चाहते हैं, जो उत्तर प्रदेश की दीर्घकालिक विकास योजनाओं के अनुरूप है। इस साझेदारी द्वारा मजबूत डेटा आर्किटेक्चर, समन्वित मानकों, और लक्ष्य पर केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की मदद से संरचनाबद्ध संस्थागत सुधार मुमकिन होगा। इस पहल का उद्देश्य जवाबदेह और परफॉर्मेंस पर आधारित शासन की संस्कृति का विकास करके राज्य में सेवा आपूर्ति और पॉलिसी के प्रभावों में सुधार करना है।





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