अपोलो एथेना ने भारत का पहला इंटीग्रेटेड गायने-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी इकोसिस्टम किया लॉन्च
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शब्दवाणीसम्माचारटीवी, बुधवार 28 अप्रैल 2026, (प्रबंधसम्पादकीयश्रीअशोकलालवानी
8803818844), नईदिल्ली। अपोलो एथेना, एशिया का पहला ऐसा व्यापक कैंसर सेंटर जो केवल महिलाओं के लिए समर्पित है, ने भारत का पहला पूरी तरह एकीकृत गायने-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी इकोसिस्टम लॉन्च करने की घोषणा की है। यह पहल महिलाओं के कैंसर इलाज में मौजूद एक बड़ी और लंबे समय से अनदेखी कमी को दूर करने के लिए तैयार की गई है। भारत में स्त्री रोग संबंधी कैंसर (गायनेकोलॉजिकल कैंसर) का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ग्लोबोकैन 2022 के अनुसार, ये कैंसर भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर में शामिल हैं और बीमारी तथा मृत्यु दोनों का बड़ा कारण बनते हैं। वहीं, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, हर साल महिला जननांग कैंसर के 1,71,000 से अधिक नए मामले सामने आते हैं और करीब 86,000 मौतें होती हैं। इतने बड़े स्तर पर बीमारी होने के बावजूद, विशेषज्ञ और एकीकृत इलाज की सुविधा अब भी सीमित है। मरीजों को अक्सर अलग-अलग डॉक्टरों और अस्पतालों के बीच भटकना पड़ता है, और शुरुआती चरण में विशेषज्ञ इलाज तक पहुंच बहुत कम लोगों को मिल पाती है। इसी चुनौती को देखते हुए, अपोलो एथेना का नया गायने-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी सेंटर इस बढ़ती जरूरत और सीमित सुविधाओं के बीच की खाई को भरने के लिए बनाया गया है। इस इकोसिस्टम में एक ही जगह पर शुरुआती पहचान, सटीक जांच, उन्नत रोबोटिक और कम चीरे वाली सर्जरी और इलाज के बाद की पूरी देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीजों को अलग-अलग जगहों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। समय पर विशेषज्ञ इलाज मिल पाता है, जो इन कैंसर में बेहतर परिणाम के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, यह सुविधा मां बनने की क्षमता को सुरक्षित रखने वाले इलाज, बेहतर सर्जरी, कम समय तक अस्पताल में रहना, जल्दी रिकवरी और जल्दी सामान्य जीवन में वापसी को संभव बनाती है। हर चरण पर अलग-अलग विशेषज्ञों की टीम मिलकर काम करती है, जिससे इलाज ज्यादा सटीक, निरंतर और मरीज-केंद्रित बनता है। अपोलो एथेना न केवल भारत में महिलाओं के लिए विशेष कैंसर सेंटर की कमी को दूर कर रहा है, बल्कि यह भी तय कर रहा है कि महिलाओं का कैंसर इलाज अब ज्यादा समग्र, सटीक और निरंतर होगा।
अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप की एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरपर्सन, डॉ. प्रीथा रेड्डी ने कहा अपोलो एथेना की शुरुआत इस विश्वास के साथ हुई थी कि महिलाओं को ऐसा कैंसर इलाज मिलना चाहिए जो पूरी तरह उनकी जरूरतों के अनुसार बना हो। इस इंटीग्रेटेड गायने-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी इकोसिस्टम के लॉन्च के साथ, हम सिर्फ सुविधाएं नहीं बढ़ा रहे, बल्कि इलाज के स्तर को भी नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। हमने एक मजबूत विशेषज्ञ टीम तैयार की है, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बड़ी संख्या में सर्जरी का अनुभव है। एक ही सिस्टम में काम करने से इलाज ज्यादा सटीक, भरोसेमंद और बेहतर बनता है। हमारा लक्ष्य है कि हर महिला को उसके इलाज के हर चरण में सटीक, निरंतर और संवेदनशील देखभाल मिले। इस विस्तार के तहत, अपोलो एथेना ने देश के दो प्रमुख विशेषज्ञों को अपनी टीम में शामिल किया है डॉ. रुपिंदर सेखों, प्रिंसिपल लीड, गायने-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी और डॉ. अमिता नैथानी, सीनियर कंसल्टेंट, गायने-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी। इससे अस्पताल की सर्जिकल क्षमता और विशेषज्ञता और मजबूत हुई है। दोनों विशेषज्ञ अपने साथ अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण, बड़ी संख्या में सर्जरी का अनुभव और उन्नत रोबोटिक तकनीक में महारत लेकर आए हैं। इससे भारत के मरीजों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की सटीकता और बेहतर इलाज मिल सकेगा। इनका जुड़ना केवल व्यक्तिगत विशेषज्ञता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे एक मजबूत और संगठित सिस्टम तैयार हो रहा है, जिसमें शुरुआती पहचान के बेहतर तरीके, मजबूत रेफरल सिस्टम और बेहतर इलाज के परिणाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
अपोलो एथेना की प्रिंसिपल लीड, गायने-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी, डॉ. रुपिंदर सेखों ने कहा महिलाओं के कैंसर का इलाज सिर्फ बीमारी के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी को ध्यान में रखकर होना चाहिए। आज कम चीरे वाली और रोबोटिक सर्जरी की मदद से हम महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बचा सकते हैं, जटिलताओं को कम कर सकते हैं और रिकवरी को तेज बना सकते हैं। इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत इसका एकीकरण है, जहां हर कदम मरीज की जरूरत के अनुसार जुड़ा हुआ है। एथेना का यह प्रयास भारत में महिलाओं के कैंसर इलाज को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है जहां अब इलाज खंडित और देर से होने के बजाय एकीकृत, समय पर और मरीज-केंद्रित होगा। विशेषज्ञ डॉक्टर, उन्नत रोबोटिक तकनीक और बहु-विषयक सहयोग को एक साथ लाकर, यह संस्थान महिलाओं को बेहतर इलाज, बेहतर परिणाम और एक समग्र देखभाल अनुभव देने में मदद कर रहा है।
शब्दवाणी सम्माचार टीवी , शुक्रवार 1 मई 2025 ( प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया से निलंबित पूर्व अध्यक्ष एस.कुमार ने गैर कानूनी तरिके से सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया का विस्तार कर रहे हैं जबकि यह मामला कोर्ट में भी विचाराधीन है। यह जानकारी सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मोहन दास लाधानी ने पत्रकारों को दिया उन्होंने एस.कुमार के निलंबन के बारे में बताया काशी सिंधी समाज मंदिर की भूमि को लगभग 30 वर्ष पूर्व चार भाइयों द्वारा दानस्वरूप दी गई थी। परंतु उस भूमि को दानस्वरूप देने वाले एक भाई के पोते जो बनारस के रहने वाले एस.कुमार ने काशी सिंधी समाज मंदिर के प्रबंधक कमेटी से काशी सिंधी समाज मंदिर को उनके दादा द्वारा दान में दिए भूमि को सिंधी समाज मंदिर के प्रबंधक कमेटी से वापसी मांगने लगे। नहीं देने पर एस.कुमार ने सिंधी समाज मंदिर की भूमि को लेकर कोर्ट केस कर दिया। इस पर उनके खिलाफ कई सामाजिक संगठनों और व्यक्तियों द्वारा विरोध किया गया था। उस समय एस.कुमार सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे इस कारण इनक...
शब्दवाणी सम्माचार टीवी , वीरवार 9 अप्रैल 2026, ( प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और नीतिगत चुनौतियों पर केंद्रित एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 'कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया' में भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक संघ (बीआरएमजीएसयू) द्वारा किया गया। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और श्रम मंत्रालय के प्रतिनिधियों सहित श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के लेबर वेलफेयर असिस्टेंट श्री संदीप चौरसिया, एटीएसईसी के श्री संजय कुमार मिश्रा और विश्वजीत घोष जैसे प्रमुख वक्ताओं ने भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने श्रमिकों की स्थिति, नीतिगत सुधारों और जमीनी वास्तविकताओं पर व्यापक चर्चा की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आईएलओ के मुख्य तकनीकी अधिकारी जियोवानी सोलेदाद ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन वे अब भी औपचारिक मान्यता और संस्थागत सुरक्षा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व की कमी और सामूहिक सौदेबाजी के अभाव के कारण ये श्रमिक ...
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