फोर्टिस मानेसर ने एएलपीआई ट्यूब टेक्नोलॉजी का किया प्रयोग

बेहद जटिल रेक्टल कैंसर सर्जरी के लिए 

इनोवेटिव फीकल डायवर्जन सिस्टम ने रेक्टल कैंसर से पीड़ित मरीज को बाहरी स्टोमा बैग की तकलीफ और दूसरी बार रिवर्सल सर्जरी से दिलायी मुक्ति

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 12 जून 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। कोलोरेक्टलकैंसर केयर के मामले में क्लीनिकल उत्कृष्टता का परिचय देते हुए, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर देश का पहला ऐसा अस्पताल बन गया है जिसने स्टेज 3 रेक्टल कैंसर से पीड़ित, बांग्लादेश के 55-वर्षीय मरीज का इनोवेटिव एएलपीआई ट्यूब फीकल डायवर्जन सिस्टम की मदद सेसफल उपचार किया है। इस जटिल प्रक्रिया को डॉ विनय सैमुअल गायकवाड़, सीनियर डायरेक्टर – सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर के नेतृत्व में रोबोटिक असिस्टेड कैंसर सर्जरी के तहत् नई तकनीक की मदद से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। मरीज श्री मोयज्ज़म हुसैन पिछले करीब पांच महीनों से लगातार मलाशय में दर्द (रेक्टल पेन) की शिकायत से ग्रस्त थे। अपने देश में एडवांस ट्रीटमेंट की सुविधा नहीं होने के कारण वह इलाज के लिए भारत आए और फोर्टिस मानेसर में विशेषज्ञों से सलाह-मश्विरा किया। उनके खून की जांच समेत ट्यूमर मार्कर जांच, और पीईटी-सीईसीटी स्कैन जैसे अन्य विस्तृत परीक्षणों से रेक्टम ट्यूमर की पुष्टि हुई जो कि लगभग 13 से.मी. आकार का था, और आसपास के अन्य कई टिश्यू भी इस ट्यूमर से प्रभावित थे। अस्पताल में जांच से मरीज के स्टेज III कोलोरेक्टल कैंसर से पीड़ित होने की पुष्टि हुई।

आमतौर पर, निचले मलाशय कैंसर की सर्जरीकराने वाले मरीजों को सर्जरी के बाद अस्थायी स्टोमा (यह पेट में एक प्रकार की ओपनिंग होती है जिसे सर्जिकल साइट के घाव भरने/हीलिंग के दौरान मल को दूर रखने के लिए बनाया जाता है) की आवश्यकता होती है। स्टोमा वास्तव में, एनेस्टोमिक रिसावों (ये आंतों के उन दो अलग-अलग भागों के बीच सर्जिकल कनेक्शन होता है, जो ठीक से हील नहीं होने की वजह से रिसाव का कारण बनते हैं) का जोखिम कम करने में सहायक होते हैं, और काफी हद तक जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं और अक्सर इनके रिवर्सल के लिए अलग से सर्जरी की आवश्यकता होती है। इस मामले में, डॉ विनय गायकवाड़ तथा उनकी टीम ने एक इनोवेटिव तकनीक की मदद से सर्जरी के दौरान आंत में एएलपीआई ट्यूब लगायी। इस डिवाइस से फीकल मैटल (मल) को नए तैयार किए गए कोलोरेक्टल जंक्शन से अलग रखने में मदद मिली, और इसका एक फायदा यह हुआ कि हीलिंग के दौरान सर्जिकल साइट को भी सुरक्षा मिली तथा अलग से बाहरी स्टोमा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। इस तरह, इस इनोवेटिव तकनीक ने मरीज को तकलीफ से बचाया और स्टोमा के चलते लाइफस्टाइल संबंधी परेशानियों से भी उनका बचाव हुआ। साथ ही, स्टोमा को बंद करने के लिए अलग से की जाने वाली सर्जरी की भी आवश्यकता नहीं पड़ी। यह सर्जरी करीब छह घंटे चली और इस दौरान ट्यूमर तथा प्रभावित टिश्यू निकालने के बाद आंत को रीकंस्ट्रक्ट किया गया, तथा एएलपीआई ट्यूब लगायी गई। इस प्रक्रिया के बाद मरीज की ठीक प्रकार से रिकवरी हुई और छह दिन बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। 

इस मामले की जानकारी देते हुए डॉ विनय सैमुअल गायकवाड़, सीनियर डायरेक्टर सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसरने कहा कई दशकों से, अस्थायी स्टोमा को ही निचले मलाशय की कैंसर सर्जरी के बाद बचाव का मानक उपाय माना जाता रहा है। बेशक यह क्लीनकल दृष्टि से प्रभावी होता है, लेकिन मरीजों के लिए यह मनोवैज्ञानिक, सामाजिक तथा शारीरिक बोझ साबित होता है। लेकिन अब कुछ सावधानीपूर्वक चुने गए मामलों में, एएलपीआई ट्यूब अधिक कारगर विकल्प के रूप में सामने आयी है जो आंतरिक स्तर पर फीकल डायवर्जन (मल को हटाकर) कर मरीज को सहूलित और सम्मान दोनों प्रदान करता है। इस विकल्प का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे रिकवरी में सुधार होता है, स्टोमा संबंधी जटिलताएं कम होती हैं और मरीज को रिवर्सल सर्जरी से भी नहीं गुजरना पड़ता। यदि इस मामले में मरीज का इलाज नहीं किया जाता, तो ट्यूमर और फैल सकता था, जिसके कारण आंत पूरी तरह से बाधित हो सकती थी, पोषण संबंधी गंभीर गिरावट पैदा होने, कमजोरी आने और अन्य कई प्रकार की जीवनघाती जटिलताएं पैदा होने का खतरा भी था।

अभिजीत सिंह, फेसिलटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर में, हमारा जोर मरीजों की हालत और जीवन गुणवत्ता दोनों में ही सुधार करने पर रहता है। एएलपीआई ट्यूब फीकल डायवर्जन सिस्टम, जो कि मरीजों के लिए अस्थायी स्टोमा की तुलना में अधिक सुरक्षित तथा आरामदायक विकल्प है, कोलोरेक्टल कैंसर सर्जरी के मामले में उल्लेखनीय विकल्प के तौर पर सामने आया है। देश में इस इनोवेटिव तकनीक का इस्तेमाल करने वाला पहला अस्पताल बनने का गौरव हासिल कर हमने क्लीनिकल उत्कृष्टता, नवाचार तथा मरीज-केंद्रित देखभाल के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है।

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