अपोलो हॉस्पिटल्स ने दुर्लभ ट्विन लिवर ट्रांसप्लांट की मदद से फिलिपिनो जुड़वाँ भाईयों को दिया नया जीवन
अपोलो दिल्ली में किए गए 645 बच्चों के लिवर ट्रांसप्लांट में यह पहला और ऐतिहासिक ट्विन लिवर ट्रांसप्लांट था।
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 10 जुलाई 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली ने विश्व स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हॉस्पिटल में फिलीपींस के 23 महीने के जुड़वां भाईयों का लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करके उनकी जान बचाई गई है। यह हॉस्पिटल में आज तक किए गए बच्चों के 645 लिवर ट्रांसप्लांट्स में पहला जुड़वां बच्चों का लिवर ट्रांसप्लांट है। ये जटिल सर्जरियाँ एक के बाद एक डॉ. अनुपम सिबल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर एवं सीनियर पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और डॉ. नीरव गोयल, सीनियर कंसल्टैंट एवं हेड ऑफ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के मार्गदर्शन में की गईं। इससे एडवांस्ड पीडियाट्रिक केयर में अपोलो की लीडरशिप प्रदर्शित होती है। जुड़वां बच्चों, टायलर और केली का जन्म समय से पहले हो गया था। जन्म के समय उनका वजन केवल 2 किग्रा. और 2.4 किग्रा. था। इससे पहले भी उनके माता-पिता अपने एक बच्चे को खो चुके थे। इन जुड़वां बच्चों के जन्म के दो हफ्ते बाद ही उन दोनों को पीलिया हो गया और उन्हें पीले रंग का मल आने लगा। जाँच में सामने आया कि उन्हें एक जन्मजात बाइलियरी विकार कोलेडोकल सिस्ट टाईप 4ए था। इस जन्मजात विकार में बाईल डक्ट बहुत ज्यादा बड़ी हो जाती है और अगर समय पर इलाज न मिले, तो लिवर को गंभीर नुकसान पहुँचता है। इस विकार के कारण दोनों बच्चों का लिवर फेल हो गया। इसके बाद, इन जुड़वां बच्चों को बार-बार गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल ब्लीडिंग होने लगी। पेट में फ्लुइड जमा होने लगा। उनका विकास ठीक से नहीं हो पा रहा था और उन्हें बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ता था। डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बाद भी उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उनकी जान बचाने का एकमात्र विकल्प लिवर ट्रांसप्लांट था।
उनके सामने चुनौती केवल सर्जरी की नहीं थी। कुछ ही दिनों में दोनों भाईयों के ट्रांसप्लांट के लिए दो अनुकूल लिविंग डोनर तलाशना बहुत ही मुश्किल था। एक भाई के लिए बच्चों की माँ के लिवर का एक हिस्सा मिल गया, पर पिता लिवर डोनेट करने के लिए फिट नहीं पाए गए, इसलिए दूसरे बच्चे के लिए लिवर अभी भी नहीं मिल पाया था। फिर दूसरे बच्चे के लिए अपने लिवर का एक हिस्सा देने के लिए उनके मामा सामने आए, जिससे दोनों ट्रांसप्लांट संभव हो पाए। रिकवरी की पूरी प्रक्रिया में पिता ने अपनी पत्नी, दोनों बच्चों और उनके मामा की पूरी देखभाल की। टायलर के ट्रांसप्लांट की सर्जरी 15 घंटे से अधिक समय तक चली, वहीं केली की सर्जरी में 13 घंटे से अधिक समय लगा। दोनों सर्जरी में कॉम्प्लेक्स सर्जिकल रिकॉन्स्ट्रक्शन शामिल था। इन दोनों जुड़वां बच्चों ने अच्छी रिकवरी की और उनका लिवर अब स्वस्थ काम कर रहा है। फौलो-अप के दौरान दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।
श्री शिवकुमार पट्टाभिरमन, मैनेजिंग डायरेक्टर, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा हर ट्रांसप्लांट के पीछे एक परिवार की उम्मीद छिपी होती है। हम फिलीपींस के इस परिवार के आभारी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के इलाज के लिए हम पर भरोसा करके इतनी दूर यात्रा की। इलाज के नतीजे हमारी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम की सामर्थ्य को प्रदर्शित करते हैं। अपोलो हॉस्पिटल मरीजों को जटिल मेडिकल समस्याओं के लिए आधुनिक और सहानुभूतिपूर्ण इलाज प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. अनुपम सिबल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप और सीनियर पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एवं हेपेटोलॉजिस्ट, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा जुड़वां बच्चों में लिवर ट्रांसप्लांट के मामले देखने में नहीं आते हैं, और दोनों बच्चों का एक ही समय लिवर ट्रांसप्लांट करने के मामले तो और भी ज्यादा कम होते हैं। अपोलो हॉस्पिटल में हुए बच्चों के 645 लिवर ट्रांसप्लांट के इतिहास में जुड़वाँ बच्चों का ट्रांसप्लांट पहली बार किया गया है। ये दोनों बच्चे बहुत छोटे थे। इसलिए यह ट्रांसप्लांट और ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। भारत में सन 1998 में अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली में हुए पहले सफल लिवर ट्रांसप्लांट के बाद से लेकर अब तक हम कई जटिल ट्रांसप्लांट कर चुके हैं। हमने लिवर किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं। 3.5 किलोग्राम के बच्चों में ट्रांसप्लांट किए हैं, तथा एबीओ इनकॉम्पेटिबल ट्रांसप्लांट भी किए हैं, जिनमें डोनर और रेसिपिएंट के ब्लड ग्रुप मैच नहीं करते हैं। केली और टायलर बॉर्न टुगैदर, फॉट टुगैदर और सेव्ड टुगैदर (एक साथ जन्म, एक साथ संघर्ष और एक साथ बचने) की शक्तिशाली मिसाल पेश करते हैं।
डॉ. नीरव गोयल, सीनियर कंसल्टैंट एवं हेड ऑफ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, ‘‘एक ही जन्मजात विकार के लिए जुड़वां भाईयों का लिवर ट्रांसप्लांट करने के मामले बहुत ही कम होते हैं। इस परिवार के साहस और प्यार ने उनकी कहानी का बहुत खास बना दिया है। एक बच्चे को माँ ने अपना लिवर डोनेट किया। दूसरे बच्चे को उनके भाई ने अपना लिवर दिया। इस बलिदान ने दोनों बच्चों को जीवन का एक और मौका प्रदान किया। ये दोनों बच्चे स्वस्थ होकर हॉस्पिटल से वापस गए। उनके मुस्कुराते हुए चेहरे हमारा सबसे बड़ा इनाम हैं। ले. जन., डॉ. बिपिन पुरी, डायरेक्टर, मेडिकल सर्विसेज, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा हमने दिखा दिाय है कि क्लिनिकल विशेषज्ञता, आधुनिक टेक्नोलॉजी और मल्टीडिसिप्लिनरी टीमवर्क की मदद से आधुनिक हैल्थकेयर द्वारा क्या संभव है। फिलिपींस के जुड़वां भाईयों का एक के बाद एक लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट न केवल हमारे ट्रांसप्लांट प्रोग्राम की असाधारण क्षमताओं को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह दुनिया में सबसे जटिल मेडिकल स्थितियों को संभालने में भारत की बढ़ती लीडरशिप का भी उदाहरण है। यह एक उम्मीद की कहानी है, जिसमें समय पर इलाज, परिवार के अटूट सहयोग और समर्पित मेडिकल केयर ने दोनों बच्चों को जिंदगी जीने का एक और मौका दिया है। यह ट्विन लिवर ट्रांसप्लांट सफल बनाने वाली मल्टीडिसिप्लिनरी टीम में डॉ. अनुपम सिबल, डॉ. नीरव गोयल, डॉ. यज, डॉ. स्मिता, डॉ. श्रेया, डॉ. करुणेश, डॉ. रोहित (पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट), डॉ. नमित, डॉ. अरुण वी, डॉ. वरुण एम, डॉ. प्रदीप के, डॉ. ऋग्वेद जी., डॉ. एस अनेजा (एनेस्थेसियोलॉजिस्ट) और डॉ. रैना (एनेस्थेसियोलॉजिस्ट) शामिल हैं। उनका सहयोग समर्पित नर्सिंग और हैल्थकेयर टीमों द्वारा किया गया, जिनके तालमेल और विशेषज्ञता से इस जटिल मामले में सफल नतीजे मिल सके। यह मामला बच्चों में पीलिया और मल में पीलेपन के साथ शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत मेडिकल इलाज प्रदान करने के महत्व को प्रदर्शित करता है। जन्मजात बाइलियरी गड़बड़ियों को पहचानकर समय पर विशेषज्ञ पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर को रेफर करके तुरंत इलाज संभव बनाया जा सकता है। इससे लिवर को खराब होने तथा स्थिति को जानलेवा होने से बचाने में मदद मिलती है। इससे मरीज के बचने और बेहतर जीवन पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।




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