70 साल के नर्क से निकाल गांव को स्वर्ग बना दिया

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, मंगलवार 17 फरवरी 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। बहु घर आती उससे  पहले ही घुटनो तक फैले पानी मे फिसल कर गड्ढे में गिर गई, जेवर खो गया और डूब गया सम्मान ये सिर्फ मुझ गरीब के सम्मान पर चोट नही थी बल्कि पूरे गांव का सम्मान पर करारा तमाचा था,जब बहू बोली मेरे बाप ने मुझे नरक में ब्याह दिया। मेहमानों को पानी से बचने के लिए बुग्गीयो का कफिला जोड़ रखा था फिर भी पिता की तेरहवी पर दरवाजे तक नहीं ला पाए हम सभी मेहमानों को, अर्थी कंधे पर उठा घुटनों तक पानी में डूबी राहों पर शमशान तक का आखिरी सफर हमने हमारे बुजुर्गों  को कैसे विदा किया है वो दुखदाई मंजर आज भी हमारी आँखों मे कैद है। वो बुरे दिन सोच कर भी आंखें भर आती है। हम 70 साल तक बहन बेटियों की डोली अपने  दरवाजे से विदा करने के लिए हमें क्या-क्या जतन करने पड़ते थे यह हम और हमारे रिश्तेदार नातेदार भुलाये नही भूल पाएंगे।आजाद भारत का एक गांव जहां लोग कहते थे इस गांव से रिश्ता करने का मतलब नरक से रिश्ता जोड़ लेना है। गांव आजादी के 70 साल तक गंदे पानी से घुटनों घुटनों तक चारो ओर से डूबा रहता था जहां मौत से पहले और मौत के बाद भी मोहताज रही जिंदगी की राह।

गांव पहुंच कर अपनी आँखों से देखा एक नई उम्र के नौजवान की हिम्मत को जिसने बदली गांव की तकदीर तस्वीर, महज चार साल पहले इस नरक को मिटाने के लिए उसने बुलंद आवाज़ मे समाज को ललकारा सवाल उठाये कब तक रहोगे इस बदबूदार पानी के घेरे में? कब चलोगे साफ सुथरी सड़कों पर? कब आपके घर तक पहुंचेगी कार? कब बहू की डोली सीधे आंगन में उतरेगी? आखिर कब गांव से दूर उतर जल यात्रा के लिए मजबूर नहीं होगी कोई आने वाली बहू? ऊर्जा विश्वाश से भरी ये नई आवाज उम्मीद की किरण बन गई। शान सम्मान स्वाभिमान की लड़ाई एक गरीब नौजवान की बड़ी हवेली वाले रसूकदार प्रधान से थी,जिनका 70 वर्षों से प्रधानी पद पर कबजा रहा। युवा बीपी की पुकार ने जन-जन को झकझोर दिया चाहते तो गांव वाले भी यही थे पर सवाल वही पुराना था कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा? किसमें इतनी हिम्मत साहस दम है जो हवेली वालो से टकराएगा? वह दमदार हैं पैसे वाले हैं, जनबल है, चारो ओर तूति बोलती है हर आवाज को कुचलना दबाना उन्हें आता है।जवान बीपी गुर्जर ने 70 साल की प्रधानी को नासिर्फ चुनौती दी बल्कि सर पर कफन बांधकर मैदान में कूद गये। चुनाव हुआ कुल 1602 वोट वाले तीन गांव गढ़ीउदयराज, पिताबली पोखर, झूमकराय पूरा के इस पंचायत में मतदान वाले दिन कुल एक हजार वोट पड़े जिसमें से 625 वोट उम्मीद बन सामने आये बीपी गुर्जर के हिस्से मे और महज 375 वोट पर सिमट गया 70 साल पुराने प्रधान अवधपाल सिंह का दबदबा।  मतलब  ढाई सौ वोट से मिली इस जीत ने असम्भव को सम्भव कर दिखाया इस बदलाव ने वो कर दिखाया जो 70 साल मे कभी हुआ ही नही था।

गांव के घर-घर में अब स्वच्छ नल का जल पहुंचता है,हर खंभे पर बिजली की रोशनी चमकती है, सीसीटीवी कैमरो का जल सुरक्षा की गारंटी बने है, युवाओ के लिए खेल का मैदान,गरीबों के लिए आवास,मंदिर के बाउंड्री का घिराव, पुस्तकालय निर्माण की योजना और साफ सुथरी चौड़ी चौड़ी गांव के चारों ओर फैली सडके और एक-एक घर एक-एक आंगन को जोड़ती मजबूत कंक्रीट की गलियां चीख चीख कर बता रही जो चार साल पहले सपने में भी नहीं था आज गांव की हकीकत है। और गांव वाले इस खुशी पर झूमते इठलाते फिरते है। वोट की ताकत ग्रामीणों की चाहत नौजवान प्रधान की मेहनत रंग लाई और कभी नर्क कहे जाने वाले गांव के  विकास की तुलना आज पूरे जिले में शान सम्मान और उदाहरण के तौर पर की जाती है। जब प्रधान बीपी गुर्जर से पूछा तो बोले यह हमारे लोकप्रिय सांसद राजकुमार चाहर और उनकी दिखाई हुई राह पर चलने से हुआ है उनके सहयोग के बिना यह सपना  जो 70 साल से हमारे आँखों मे कैद थे कभी जमीन पर उतर ही नहीं सकते थे। मैं तो बस सेवक हूं अपने गांव वालों का उनके भरोसे को बनाए रखने के लिए एक-एक सांस कुर्बान कर सकता हूं। अभी तो शुरुआत है 70 साल के कलंक को मिटाने में चार साल एक पल भी चैन से नहीं बैठा, जब जिसने जहां बुलाया हाथ जोड़ हाजिर हो गया, दुख सुख गमी खुशी में शामिल होना सौभाग्य समझता रहा। सेवा का मौका जो गांव वालों ने दिया उसे निभाने में चार साल दिन रात खड़ा रहा। मेरा सपना मेरे गांव को मेरी पंचायत को प्रदेश के सबसे अच्छी पंचायत बनाने का है अभी तो 70 साल के गड्ढे को समतल भर किया है, विकास की रफ्तार तो अब आएगी, विकास तो गांव वाले अगली योजना में देखेंगे मैंने अपने हिस्से का काम ईमानदारी से किया है, मेहनत से किया है भाई बहनों का आशीर्वाद मिला और उन्होंने चाहा तो विकास की ये कड़ी बहुत बड़ी होगी मेरी पंचायत प्रदेश का उत्तम उदाहरण बनेगी।

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