वंदे मातरम विरोध के पीछे वोट बैंक की राजनीति : इंद्रेश कुमार

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, रविवार 15 फरवरी 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने हरियाणा भवन में “भारतीय मुस्लिमों की गौरव गाथाएं” पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए MRM के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने वंदे मातरम विवाद और बांग्लादेश की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाया। समारोह की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम गान से हुई, जिसने मंच की राष्ट्रवादी दिशा को रेखांकित किया। इंद्रेश कुमार ने कहा, “देशभर में लाखों मुसलमान गर्व से वंदे मातरम गाते हैं और इसे अपनी भारतीय पहचान का अभिन्न अंग मानते हैं। इसका विरोध वोट बैंक की संकीर्ण राजनीति से प्रेरित है। राष्ट्रगीत भारत की संस्कृति, इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। इसे अस्वीकार करना उस साझा विरासत से दूरी बनाना है, जिसने देश को एक सूत्र में बांधा। राष्ट्र पहले है, राजनीति बाद में। बांग्लादेश पर उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से वहां की सांस्कृतिक जड़ें भारतीयता से जुड़ी हैं। 1947 से पहले लोग हिंदुस्तानी थे; राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद सांस्कृतिक आधार आज भी मौजूद है। क्षेत्रीय शांति के लिए भारत-बांग्लादेश सहयोग अनिवार्य है। भारत से सकारात्मक संबंध ही वहां स्थायी शांति सुनिश्चित कर सकता है।

याजवेंद्र यादव द्वारा लिखित पुस्तक भारतीय मुस्लिमों की गौरव गाथाएं को मंच ने भारत की साझा राष्ट्रीय विरासत का दस्तावेज बताया। पुस्तक स्वतंत्रता संग्राम, सेना, शिक्षा, विज्ञान, साहित्य और सामाजिक सेवा में भारतीय मुसलमानों के योगदान को रेखांकित करती है। वक्ताओं ने कहा कि यह कृति विभाजनकारी भ्रांतियों को दूर करती है और सिद्ध करती है कि भारतीय मुसलमानों ने देश की एकता, अखंडता और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और संविधान के प्रति निष्ठा में है। शिक्षा सामाजिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है, जो कट्टरता और वैचारिक टकराव का समाधान प्रस्तुत कर सकती है। असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक विवाद का केंद्र बनाना राष्ट्रहित के खिलाफ है।

डॉ. शालिनी अली ने सहअस्तित्व और पारस्परिक सम्मान को भारत की पहचान बताया। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों पर गहरी चिंता जताई और कहा कि निर्दोषों के अधिकारों का हनन कहीं भी हो, उसकी सशक्त आवाज उठानी जरूरी है। मानवाधिकारों पर समान दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। विमोचन से पहले MRM की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक हुई, जिसमें जनजागरण अभियान, सद्भाव यात्राएं, युवा संवाद और राष्ट्रवादी मूल्यों पर आधारित परिचर्चाओं को तेज करने का फैसला लिया गया। बैठक में देशभर से लगभग 150 पदाधिकारी शामिल हुए। हरियाणा भवन से निकला संदेश साफ था: भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता पर कोई समझौता नहीं। मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्र के सम्मान और साझा प्रतीकों को राजनीतिक हथियार बनाना अस्वीकार्य है। MRM ने दोहराया—“Nation First” केवल नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प है। कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति: डॉ. शाहिद अख्तर, डॉ. शालिनी अली, शिक्षाविद फिरोजबख्त अहमद, मोहम्मद अफजाल, गिरीश जुयाल, अबू बकर नकवी, सैयद रजा हुसैन रिज़वी, शाहिद सईद, इमरान चौधरी, हाफिज साबरीन, रेशमा हुसैन, एस.के. मुद्दीन सहित अन्य गणमान्य नागरिक।

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