केयर हेल्थ इंश्योरेंस ट्रेंड्स रिपोर्ट 2025 जारी

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, मंगलवार 30 दिसंबर 2025 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने अपनी बड़ी 2025 एनुअल ट्रेंड्स रिपोर्ट अनाउंस किया। रिपोर्ट में बदलते कंज्यूमर बिहेवियर, डिजिटल अपनाने और उभरते हेल्थ क्लेम पैटर्न के एनालिसिस में प्रोएक्टिव हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने की तरफ एक बड़ा बदलाव और डिजिटल एंगेजमेंट के लिए एक मज़बूत प्रेफरेंस को हाईलाइट किया गया है। रिपोर्ट के डेटा के मुताबिक, भारतीयों में एक्टिवली हेल्थ इंश्योरेंस लेने का एक पक्का ट्रेंड है। अंडरराइटिंग ईयर 2023–2024 से 2024–2025 तक इंश्योर्ड मेंबर्स की संख्या में 27% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है — यह बढ़ते मेडिकल खर्चों की वजह से कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ कवर की ज़रूरत के बारे में बढ़ती जागरूकता को दिखाता है।

केयर हेल्थ इंश्योरेंस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, मनीष डोडेजा ने कहा हमारी सालाना ट्रेंड्स रिपोर्ट से यह साफ़ है कि भारतीय हेल्थ इंश्योरेंस कंज्यूमर पहले से ही कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ कवरेज की तलाश कर रहे हैं और ज़्यादा टेक-सैवी बन रहे हैं। कंज्यूमर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और लाइफस्टाइल केयर को प्राथमिकता दे रहे हैं। इन व्यवहारिक बदलावों के ज़रिए, हमें गाइड किया जाता है और यह पक्का किया जाता है कि केयर हेल्थ इंश्योरेंस ऐसे सॉल्यूशन दे जो आसान हों। हम हेल्थ इंश्योरेंस को समझने में आसान, ज़्यादा एक्सेसिबल और हमारे कस्टमर्स की बदलती ज़रूरतों के हिसाब से अडैप्टेबल बनाने के लिए टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट करने के लिए कमिटेड हैं। कंपनी ने अलग-अलग उम्र के ग्रुप्स में खरीदने की आदतों में भी बदलाव देखा है। सभी ग्रुप्स में एवरेज सम इंश्योर्ड में सालाना बढ़ोतरी देखी गई है। उदाहरण के लिए, 0–17 साल के लोगों के लिए औसत SI 2024–2025 से 2025–2026 तक 7% से ज़्यादा बढ़ गया, जिससे पता चलता है कि परिवार अपने बच्चों के लिए ज़्यादा कवरेज ले रहे हैं। इसके अलावा, पहली बार पॉलिसी खरीदने वाले (18–35 साल के), साल 2025-2026 तक सभी पॉलिसी होल्डर्स का एक बड़ा हिस्सा बने रहेंगे, जिनकी कुल हिस्सेदारी 30% से ज़्यादा होगी। साथ ही, सीनियर सिटिज़न्स (60 साल और उससे ज़्यादा उम्र के) का हिस्सा 2025–2026 में बढ़कर लगभग 14% हो गया।

जिन टॉप हेल्थ कंडीशन के लिए क्लेम सेटल किए गए, उनके एनालिसिस से पता चलता है कि डेंगू, मलेरिया और कॉमन फ्लू जैसी बीमारियों, लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों जैसे सांस के इन्फेक्शन और दिल की बीमारियों, कैंसर और आर्थराइटिस पर फोकस है। इससे पता चलता है कि लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों और बुज़ुर्गों के लिए हेल्थकेयर के लिए बहुत ज़्यादा क्लेम किए जा रहे हैं। अब बहुत सारे कस्टमर अपने हेल्थ इंश्योरेंस को मैनेज करने के लिए डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। इस फाइनेंशियल ईयर के पहले छह महीनों में ज़्यादा खरीदारी के इरादे वाली वेबसाइट विज़िट पिछले तीन सालों के मुकाबले दोगुनी से ज़्यादा हो गई हैं। इसके अलावा, ज़्यादा से ज़्यादा कस्टमर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और ओवरऑल वेलनेस पर फोकस कर रहे हैं। अपने रिन्यूअल प्रीमियम पर डिस्काउंट पाने के लिए हमारे मोबाइल ऐप पर स्टेप ट्रैकिंग फीचर का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में 2.5 गुना बढ़ोतरी हुई है।

अब रिन्यूअल का सबसे पसंदीदा तरीका ऑनलाइन है, जिसमें डिजिटल तरीके से रिन्यूअल प्रीमियम का पेमेंट करने वाले कस्टमर में लगभग 10% की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह, ऐप-बेस्ड सर्विसेज़ की डिमांड भी बढ़ी है। कस्टमर आसानी से सर्विस एक्सपीरियंस के लिए केयर हेल्थ के मोबाइल ऐप (केयर हेल्थ – कस्टमर ऐप) का तेज़ी से इस्तेमाल कर रहे हैं—चाहे वह क्लेम फाइल करना हो, पॉलिसी रिन्यू करना हो, हॉस्पिटल नेटवर्क एक्सेस करना हो, या हेल्थ चेक शेड्यूल करना हो। कंपनी ने पिछले साल देखा है कि उसके करीब 30% कस्टमर ने ऐप के ज़रिए क्लेम फाइल किए और 15% से ज़्यादा पॉलिसी रिन्यूअल मोबाइल ऐप के ज़रिए हुए। कम्प्रिहेंसिव हेल्थ सिक्योरिटी कस्टमर के बीच ज़्यादा से ज़्यादा पॉपुलर हो रही है। टॉप-अप कवरेज, OPD बेनिफिट्स, वेलनेस इनिशिएटिव्स, टेलीकंसल्टेशन, होम केयर, और कैशलेस हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स का एक बड़ा नेटवर्क, ये सब वजहें हैं जिन पर कस्टमर्स अपना हेल्थ कवरेज खरीदने से पहले सोच रहे हैं - और यह सही भी है!

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