भारत के 90% उपभोक्ता व्हाट्सऐप को अपना मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म मानते हैं : रुकम कैपिटल स्टडी

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 22 जनवरी 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। भारत की उपभोग-आधारित आर्थिक वृद्धि अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है, जो अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहर, उभरते शहरी क्षेत्र और छोटे कस्बे अब मांग, उद्यमिता और दीर्घकालिक आर्थिक गति को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी बदलाव को दर्शाते हुए, शुरुआती चरण के कंज़्यूमर ब्रांड्स में निवेश करने वाली वेंचर कैपिटल फर्म रुकम कैपिटल ने अपनी नई रिसर्च रिपोर्ट “बियॉन्ड मेट्रोस: द रियल स्टोरी ऑफ़ भारत नेक्स्ट 500 मिलियन” जारी की है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब भारत की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र स्पष्ट रूप से मेट्रो शहरों से आगे बढ़ रहा है। देश की लगभग 65% आबादी अब टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। जीएसटी के जरिए औपचारिकरण, कीमतों में सुधार से बढ़ती वहनीयता और 3G/4G नेटवर्क से लेकर यूपीआई जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के तेज विस्तार ने भारत को उपभोग वृद्धि का अगला बड़ा इंजन बना दिया है। यह उपभोक्ता रिपोर्ट मेट्रो-केंद्रित धारणाओं से हटकर यह दिखाती है कि भारत में उपभोग का व्यवहार अलग सोच और तर्क पर आधारित है | जहां संदर्भ, समुदाय का प्रभाव, मूल्य को लेकर अनुशासन और डिजिटल-फर्स्ट आदतें अहम भूमिका निभाती हैं। रिपोर्ट बताती है कि आज का भारत उपभोक्ता न तो जल्दबाज़ी में खरीदारी करता है और न ही केवल विज्ञापनों से प्रभावित होता है, बल्कि वह जानकारी-आधारित, रिसर्च-ड्रिवन और भरोसे पर आधारित फैसले लेता है।

रिपोर्ट के लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए अर्चना जहागीरदार, फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर, रुकम कैपिटल ने कहा लंबे समय तक भारत को मेट्रो शहरों के नजरिए से देखा गया, जिससे उपभोक्ताओं की सही समझ नहीं बन पाई। इस अध्ययन में हमें एक आत्मविश्वासी और सोच-समझकर निर्णय लेने वाला उपभोक्ता दिखा, जो गहराई से रिसर्च करता है, समुदाय की राय पर भरोसा करता है और दिखावे से ज्यादा निरंतरता को महत्व देता है। भारत में ब्रांड्स के लिए असली अवसर भरोसा जल्दी बनाने, वास्तविक जरूरतों के अनुसार प्रोडक्ट डिज़ाइन करने और स्थानीय संदर्भ से जुड़े रहने में है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उपभोक्ता निर्णय का सबसे अहम आधार भरोसा है। टियर-2 और टियर-3 के 22% उपभोक्ता माउथ-टू-माउथ यानी लोगों की राय से प्रभावित होते हैं। 43% टियर-3 उपभोक्ता खरीदारी से पहले ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट जांचते हैं और 32% ग्राहक सेवा अनुभव को भी अपने फैसले में शामिल करते हैं। साथ ही, सुरक्षा, सामग्री और सस्टेनेबिलिटी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। 23% उपभोक्ता पर्यावरण-अनुकूल दावों से प्रभावित होते हैं, खासकर तब जब इन्हें समुदाय या साथियों का समर्थन मिलता है।

भारत में खरीदारी जल्दबाज़ी नहीं, बल्कि सोच-समझकर की जाती है। टियर-2 और टियर-3 के 67% उपभोक्ता यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। टियर-2 के 52% उपभोक्ता डिस्काउंट और सेल पर नज़र रखते हैं, जबकि टियर-3 में त्योहारों का खर्च पर ज्यादा असर दिखता है। क्विक कॉमर्स की पहुंच अभी सीमित है—टियर-3 में 36%। फूड डिलीवरी 44% तक पहुंच चुकी है, जबकि इन-होम सर्विसेज़ अभी शुरुआती स्तर पर 22% पर हैं। व्हाट्सऐप भारत का डिजिटल आधार बन चुका है, जिसकी पहुंच लगभग ~90% है। यह कम्युनिकेशन, डिस्कवरी और कॉमर्स तीनों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स में जियो हॉटस्टार टियर-2 और टियर-3 में 54% से अधिक उपयोग के साथ आगे है। टियर-3 के 24% दर्शक क्षेत्रीय भाषा वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म पसंद करते हैं। म्यूजिक ऐप्स की पहुंच 46% से अधिक है और टियर-3 में टेलीग्राम का 46% उपयोग यह दिखाता है कि लोग अब उपयोगिता-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं।

भारत में आकांक्षाएं अब दिखावे पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जरूरतों पर आधारित हैं। 18% उपभोक्ता कस्टमाइज़्ड प्रोडक्ट पसंद करते हैं, 13% गुणवत्ता और विश्वसनीयता से जुड़ी पहचान को महत्व देते हैं। 12% नॉस्टेल्जिया से जुड़ते हैं और उतने ही उपभोक्ता स्मार्ट टेक्नोलॉजी व AI फीचर्स को पसंद करते हैं, जब वे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उपयोगी हों। गेमिंग अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक प्रभावी मार्केटिंग माध्यम बन गया है। टियर-2 के 55% और टियर-3 के 52% उपभोक्ता इन-गेम विज्ञापनों पर प्रतिक्रिया देते हैं, जिससे यह एक हाई-अटेंशन और भरोसेमंद चैनल बनता जा रहा है। जैसे-जैसे भारत $1 ट्रिलियन की रिटेल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत के अगले 50 करोड़ उपभोक्ता अब उभर नहीं रहे वे पहले से ही बाजार, मांग और सोच को आकार दे रहे हैं। आने वाला दशक उन्हीं ब्रांड्स और नीतियों का होगा जो भारत को सही मायनों में समझेंगे। यह सर्वे यूगोव के सहयोग से किया गया, जिसमें 18 राज्यों के 5000 से अधिक शहरी और अर्ध-शहरी उत्तरदाताओं को शामिल किया गया।

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