मिशन ऑपरेशन शुद्धि 5 लाख लोगों को जोड़कर ₹50,000 करोड़ की हरित अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य : सुशील अग्रवाल

प्लास्टिक अब समस्या नहीं, बनेगा राष्ट्रनिर्माण की शक्ति

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 6 मार्च 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। भारत में जिस प्लास्टिक को आज तक केवल प्रदूषण और संकट के रूप में देखा जाता रहा, उसे अब एक बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय अवसर में बदलने का प्रयास शुरू हो गया है। इस परिवर्तनकारी सोच के पीछे हैं AVRO इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन श्री सुशिल अग्रवाल जिन्होंने पिछले 24 वर्षों से प्लास्टिक पुनर्चक्रण और पुनर्प्रयोग के क्षेत्र में लगातार कार्य करते हुए एक नया मॉडल विकसित किया है। उद्योग जगत में उन्हें स्नेहपूर्वक डैडी ऑफ प्लास्टिक कहा जाता है क्योंकि उन्होंने यह सिद्ध किया है कि यदि प्लास्टिक का व्यवस्थित संग्रहण, वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और तकनीकी पुनर्प्रयोग किया जाए, तो वही प्लास्टिक जो कचरे के रूप में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है वह देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए एक मजबूत संसाधन बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्येक किलो रीसाइकल्ड प्लास्टिक लगभग 2.5 किलो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करता है। इसका अर्थ है कि बड़े स्तर पर प्लास्टिक रीसाइक्लिंग केवल कचरा प्रबंधन नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबले का एक प्रभावी औद्योगिक समाधान भी बन सकता है। इसी दूरदर्शी सोच को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के लिए “मिशन ऑपरेशन शुद्धि” का शुभारंभ 10 मार्च को मालवीय स्मृति भवन में किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य देशभर में प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, प्रसंस्करण और पुनर्प्रयोग के लिए एक संगठित और तकनीकी नेटवर्क तैयार करना है। इस अभियान के माध्यम से 5 लाख से अधिक लोगों को जोड़ने और लगभग ₹50,000 करोड़ की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म Avro Recycling App भी विकसित किया गया है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति या संस्था प्लास्टिक कचरे की मात्रा, फोटो, लोकेशन और अपेक्षित मूल्य की जानकारी देकर सीधे रीसाइक्लिंग नेटवर्क से जुड़ सकती है। सुशील कुमार अग्रवाल का कहना है प्लास्टिक समस्या नहीं है समस्या उसका असंगठित प्रबंधन है। ऑपरेशन शुद्धि के माध्यम से हम इसे राष्ट्रनिर्माण और हरित अर्थव्यवस्था की शक्ति में बदल सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यदि समाज, उद्योग और सरकार मिलकर इस दिशा में संगठित प्रयास करें, तो भारत न केवल प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या का समाधान कर सकता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी का एक उदाहरण भी बन सकता है।

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