रिहैबिलिटेशन की बढ़ती जरूरत के सामने भारत की शिक्षा व्यवस्था कमजोर
देश में बढ़ती रिहैबिलिटेशन की जरूरत 2.68 करोड़ दिव्यांगजन, 2023 में 4.8 लाख सड़क दुर्घटनाएं और 4.6 लाख से अधिक लोग घायल शब्दवाणी सम्माचार टीवी , रविवार 5 अप्रैल 2026, लेखक : के. श्री हर्ष शशांक सीईओ, सेंट मैरीज़ रिहैबिलिटेशन यूनिवर्सिटी, ( प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। भारत में स्वास्थ्य पर चर्चा अक्सर अस्पतालों, डॉक्टरों और बिस्तरों की संख्या तक सीमित रह जाती है। लेकिन असली सवाल तब सामने आता है जब मरीज अस्पताल से घर लौटता है। सर्जरी के बाद, स्ट्रोक के बाद, दुर्घटना के बाद या किसी बीमारी के इलाज के बाद—कौन व्यक्ति को फिर से सामान्य जीवन जीने में मदद करेगा? यही वह जगह है जहां पुनर्वास यानी रिहैबिलिटेशन की भूमिका शुरू होती है। यह केवल इलाज नहीं, बल्कि व्यक्ति को दोबारा चलने, बोलने, सीखने, काम करने और सम्मान के साथ जीवन जीने लायक बनाने की प्रक्रिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में करीब 2.4 अरब लोग ऐसे हैं जिन्हें किसी न किसी रूप में पुनर्वास की जरूरत है। भारत में भी स्थिति गंभीर है। गैर-संचारी रोग कुल मौतों के 66%...