हिंदू नव वर्ष को हिन्दू श्री फाउंडेशन ने राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की किया मांग

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 19 मार्च 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। देश की सांस्कृतिक पहचान और प्राचीन परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, हिन्दू श्री फाउंडेशन ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से आग्रह किया कि हिंदू नव वर्ष (विक्रम संवत के प्रारंभ) को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र में हिन्दू श्री फाउंडेशन ने आग्रह किया कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के सम्मान में देशभर के नागरिकों द्वारा 19 मार्च 2026, जो विक्रम संवत के आरंभ का दिन है, को “हिंदू नववर्ष” के रूप में राष्ट्रीय मान्यता देने का आग्रह किया गया है। भारतवासियों को यह पूरी उम्मीद है कि इस तरह का फैसला सिर्फ आपकी अगुआई में चल रही सरकार ही ले सकती है। हिन्दू श्री फाउंडेशन ने इस बात पर बल दिया गया है कि हिन्दू नववर्ष केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी कालगणना प्रणाली और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है। विक्रम संवत ने सदियों से भारतीय जीवन, परंपराओं और त्योहारों को एक संरचित आधार प्रदान किया है, जो आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में विविध रूपों में जीवंत है।

चेत्र मास से शुरू होने वाले संवत नव वर्ष,हिन्दू नववर्ष देश के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है जैसे चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, उगादी, चेटी चंड, नवरेह और अन्य क्षेत्रीय स्वरूप। इन सभी उत्सवों का मूल भाव एक ही है "नए वर्ष का स्वागत, प्रकृति के नवचक्र का उत्सव और जीवन में नई शुरुआत" ऐसे में इन विविध परंपराओं को एक साझा राष्ट्रीय पहचान के अंतर्गत जोड़ना सांस्कृतिक एकता और समरसता को और सुदृढ़ कर सकता है। इस समय वातावरण में परिवर्तन, नई ऊर्जा और संतुलन का अनुभव होता है, जिसे भारतीय ज्ञान परंपरा में विशेष महत्व दिया गया है। सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित भारतीय पंचांग इस परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टि से भी सुदृढ़ आधार प्रदान करता है, जिससे यह केवल आस्था ही नहीं, बल्कि प्रकृति और खगोल विज्ञान के समन्वय का उदाहरण भी बनता है।।  हिन्दू श्री फाउंडेशन लंबे समय से सनातन परंपराओं के संरक्षण, सांस्कृतिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संगठन का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए एक सशक्त सांस्कृतिक तंत्र का निर्माण करना है, जिसमें मंदिरों, विद्वानों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।

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