जॉनसन एंड जॉनसन ने इंडिया डिफेक्ट्स टू डिफीट अभियान का दूसरा फेज़ किया शुरू
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शनिवार 21 मार्च 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), मुंबई। जॉनसन एंड जॉनसन (जेएंडजे) इंडिया ने अपने देशव्यापी रोग जागरुकता कार्यक्रम, ‘इंडिया डिटेक्ट्स टू डिफीट’ का दूसरा फेज़ शुरू किया। इसका उद्देश्य खासकर भारत की वंचित आबादी के बीच लंग कैंसर की समय पर पहचान और निदान सुनिश्चित करना है, ताकि इलाज के बेहतर नतीजे मिल सकें। अपने पहले फेज़ में भारत के सबसे लोकप्रिय स्टोरीटैलर, अमर चित्र कथा के सहयोग से स्थापित मजबूत बुनियाद को आगे बढ़ाते हुए कार्यक्रम के फेज़ 2 में 5 क्षेत्रीय भाषाओं, हिंदी, कन्नड़, तमिल, मलयालम और तेलुगू में विशेष बुकलेट प्रिंट और डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जा रही है। व्यापक पहुँच और उपलब्धता के लिए ये बुकलेट पूरे देश में चुनिंदा हैल्थकेयर प्रोवाईडर (एचसीपी) क्लिनिक्स या क्यूआर कोड द्वारा प्राप्त की जा सकती हैं। यह अभियान कितना जरूरी है, इसका अनुमान देश से मिले चौंकाने वाले आँकड़ों से मिल जाता है। भारत में लंग कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। साल 2015 में जहाँ देश में लंग कैंसर के 63,708 मामले दर्ज हुए थे, वहीं साल 2025 में 81,219 मामले दर्ज हुए हैं। लंग कैंसर बढ़ने के मुख्य कारणों में धूम्रपान और पर्यावरण में बढ़ता प्रदूषण शामिल है, क्योंकि भारत में लगभग 100 मिलियन व्यस्क धूम्रपान करते हैं।
लंग कैंसर भारत और विश्व में फैले सबसे गंभीर रोगों में से एक है। दुनिया में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले आमतौर से लंग कैंसर के होते हैं और यह कैंसर से होने वाली मौतों के सबसे बड़े कारणों में से एक है। भारत में लंग कैंसर चौथा सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है। यहाँ पर हर साल लंग कैंसर के लगभग 81,000 नए मरीज सामने आते हैं, जिनमें से लगभग 75,000 मरीजों की मौत हो जाती है । लंग कैंसर के मरीजों में पाँच साल तक सर्वाईवल दर केवल 3.7 प्रतिशत से 17 प्रतिशत के बीच है, जिसका मुख्य कारण इसके निदान में देर होना है। ध्यान देने वाली बात यह है कि लंग कैंसर के लगभग 85 प्रतिशत से 90 प्रतिशत मामले नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (एन.एस.सी.एल.सी) के होते हैं । भारत में लगभग 25 प्रतिशत से 30 प्रतिशत मरीजों में ईजीएफआर म्यूटेशन पाए जाते हैं। इसलिए डायग्नोसिस के समय विस्तृत मॉलिक्युलर टेस्टिंग करना बहुत जरूरी होता है। मरीजों को समय पर व्यक्तिगत केयर प्रदान करने तथा इलाज के बेहतर नतीजे प्राप्त करने के लिए म्यूटेशन प्रोफाईलिंग और बहुत मुश्किल से पाए जाने वाले एल्टरेशंस को पहचानने की जरूरत के बारे में जागरुकता बढ़ाना बहुत महत्वपूर्ण है।
पुष्कर कुलकर्णी, जनरल मैनेजर, जॉनसन एंड जॉनसन इंडिया एवं साउथ एशिया ऑपरेशंस ने कहा लंग कैंसर का निदान देर से कराया जाता है, जिससे समय पर प्रभावशाली इलाज शुरू करने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। बेहतर नतीजों के लिए सबसे असरदार उपाय समय पर पहचान है। इंडिया डिटेक्ट्स टू डिफीट के पहले फेज़ में हमने 786 मिलियन से अधिक लोगों और 6,500 हैल्थकेयर प्रोवाईडर्स तक पहुँचकर उन्हें स्पष्ट व महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई थी। साल 2026 में हम अपने इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हमने अपनी बुकलेट क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार की हैं, ताकि पूरे भारत के लोगों को लंग कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर प्रभावी इलाज प्राप्त करने में मदद मिले। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक लंग कैंसर पूरी दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का मुख्य कारण है। इस घातक बीमारी की पहचान करने में अक्सर देर हो जाती है और तब तक इलाज के विकल्प बहुत सीमित हो चुके होते हैं। जिन लोगों को इसका जोखिम अधिक है, उनकी जाँच करने से इसे पहचानने और इलाज के बेहतर नतीजे प्राप्त करने में काफी मदद मिल सकती है। जॉनसन एंड जॉनसन के फेज़ 2 में इस कमी को दूर किया जा रहा है। महत्वपूर्ण मेडिकल जानकारी आसान और समझने-योग्य फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि देश के लोगों के बीच अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढ़े।
गायत्री चंद्रशेखर, एडिटर-इन-चीफ, टिंकल (अमर चित्र कथा प्रा. लि.) ने कहा अमर चित्र कथा में हमारा मानना है कि कहानियाँ प्रेरणा देती हैं, शिक्षित बनाती हैं और गहरा सकारात्मक परिवर्तन लाती हैं। इस उपयोगी कहानियों के माध्यम से हम फेफड़ों के स्वास्थ्य और लंग कैंसर की समय पर पहचान के बारे में महत्वपूर्ण चर्चा छेड़ना चाहते हैं, ताकि परिवार अपने स्वास्थ्य के बारे में सूचित और जीवनरक्षक निर्णय लेने में समर्थ बनें। डॉ. सेवंती लिमये, डायरेक्टर, मेडिकल एंड प्रेसिज़न ऑन्कोलॉजी, सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल ने कहा लंग कैंसर के खिलाफ सबसे शक्तिशाली उपाय इसकी समय पर पहचान करना है। ‘इंडिया डिटेक्ट्स टू डिफीट’ सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। लोगों को स्पष्ट और कारगर जानकारी उपलब्ध कराने से निदान में होने वाले विलंब को खत्म किया जा सकता है, जिससे इलाज के बेहतर नतीजे पाने में मदद मिलेगी और भारत के लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा।






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