फिल्म समीक्षा : दादी की शादी

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शनिवार 9 मई 2026, फिल्म समीक्षक : रेहाना परवीन  (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। फिल्म दादी की शादी जो सिनेमाघरों में 8 मई 2026 को प्रदर्शित हुई है। फिल्म दादी की शादी वीरवार 7 मई 2026 को विशेष प्रेस शो डिलाइट डायमंड, दिल्ली में मुझे देखने का अवसर मिला। फिल्म दादी की शादी में नीतू कपूर, कपिल शर्मा, सादिया खतीब, आर.सरथकुमार, रिद्धिमा कपूर साहनी, दीपक दत्ता, जितेंद्र हुड्डा और तेजस्विनी कोल्हापुरे, इत्यादि मुख्य कलाकार हैं फिल्म दादी की शादी का निर्देशन आशीष आर मोहन और निर्माता है श्रद्धा अग्रवाल, अक्षित लहोरिआ, कोमल शाहनी फिल्म का निर्माण शिमला टाल्कीस प्रोडक्शन ने किया है। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से U (Universal) प्रमाण पत्र मिला है यानी यह फिल्म सभी आयु वर्ग के दर्शकों देख सकते है। फिल्म की अवधि लगभग 2 घंटे 31 मिनट (151 मिनट) है। फिल्म दादी की शादी पारिवारिक भावनाओं और सामाजिक संदेश से भरपूर मनोरंजक है आज के दौर में जहां फिल्मों में तेज़ रफ्तार कहानी और आधुनिक रिश्तों की उलझनों को दिखाया जाता है वहीं दादी की शादी एक ऐसी पारिवारिक फिल्म बनकर सामने आती है जो रिश्तों की गर्माहट, बुजुर्गों के सम्मान और परिवार की एकता का सुंदर संदेश देती है। फिल्म का विषय सरल होने के बावजूद दर्शकों के दिल को छू लेने वाला है।

फिल्म की कहानी एक ऐसी दादी के इर्द-गिर्द घूमती है जिनकी जिंदगी परिवार की जिम्मेदारियों में बीत जाती है। उम्र के इस पड़ाव पर परिवार उनके अकेलेपन और भावनाओं को नहीं समझती दादी अपने घर शिमला में अकेली रहती है और उनके बच्चे दिल्ली मे अपने परिवारों के साथ रहते हैं उनके पास इतना समय नहीं है की अपनी माँ जो शिमला में अकेले रहती है उनके पास जाकर मिल लें। इसी बीच बड़े लड़के की लड़की फिल्म की हीरोइन सादिया खतीब की शादी के लिए लड़का देखा जा रहा है तभी पुरे परिवार को दादी की शादी का पता चलता है। दादी की शादी का पता चलते ही पुरे परिवार को सदमा लगता है अब समाज में सभी की बेज्जती होगी यही सोचते हुए पूरा परिवार एक साथ दादी की शादी को रोकने के लिए शिमला पहुँच जाते हैं। शिमला के घर में जब दादी पुरे परिवार को एक साथ देखती है तो उसके ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता है। लेकिन तभी दादी को पता चलता है पूरा परिवार उनकी शादी को रोकने आये हैं। तब दादी सोचती है इसी बहाने सही पूरा परिवार आया तो सही फिर दादी पुर परिवार को कुछ दिन रोकने के लिए अपनी शादी की बात को आगे बढ़ाती है। 

निर्देशक ने कहानी को हल्के-फुल्के हास्य, भावनात्मक दृश्यों और पारिवारिक संवादों के साथ आज के दौर के रिश्तों की समस्याओं को प्रस्तुत किया है। फिल्म कहीं भी बोझिल नहीं लगती और दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखती है। कई दृश्य ऐसे हैं जो हंसी के साथ आंखें भी नम कर देते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकार हैं। दादी का किरदार बेहद जीवंत और प्रभावशाली बन पड़ा है। उनकी मासूमियत, भावनाएं और जीवन को दोबारा जीने की चाह दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती है। सह कलाकारों ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। संगीत और पार्श्व धुनें कहानी के माहौल को और खूबसूरत बनाती हैं। पारिवारिक माहौल, भारतीय संस्कार और रिश्तों की मिठास फिल्म में साफ दिखाई देती है। यही कारण है कि यह फिल्म हर आयु वर्ग के दर्शकों को पसंद आ सकती है। यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं करती बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि जीवन में खुश रहने और नए सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती। बुजुर्गों की भावनाओं को समझना और उन्हें सम्मान देना हर परिवार की जिम्मेदारी है। दादी की शादी एक साफ-सुथरी, भावनात्मक और संदेशपूर्ण पारिवारिक फिल्म है जिसे पूरे परिवार के साथ देखा जा सकता है। हास्य, भावनाओं और सामाजिक सोच का सुंदर संतुलन इसे एक यादगार फिल्म बनाती है। फिल्म देखने का मजा खराब ना हो इसलिए पूरी कहानी आपको नहीं बता रही हूँ कियोंकि फिल्म को आप अपने परिवार व् दोस्तों के साथ सिनेमाघरों में जाकर बडे पर्दे पर देखने का अलग मजा आएगा। मैँ इस फिल्म को पांच में से साढ़े तीन स्टार देती हूँ और पारिवारिक फिल्म देखने वाले दर्शकों के लिए पांच में से चार स्टार देती हूँ।

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