दुर्लभ किस्म के बोन कैंसर से पीड़ित को फोर्टिस शालीमार बाग में किया उपचार

किशोरी ने दुर्लभ और आक्रामक किस्म के बोन कैंसर इविंग्स सार्कोमा की एडवांस तीसरी स्टेज को मात दी, यह रोग दुनियाभर में दस लाख की आबादी में लगभग एक व्यक्ति में देखा गया है

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 15 मई 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। फोर्टिस हॉस्पीटल शालीमार बाग के डॉक्टरों ने स्टेज 3 इविंग सार्कोमा से पीड़ित 17-वर्षीय युवती का सफल उपचार किया है। यह दुर्लभ और आक्रामक किस्म का बोन कैंसर है, जिसके लिए मल्टी-डिसीप्लीनरी उपचार की आवश्यकता होती है, जिसमें गहन चिकित्सा देखभाल (आईसीयू) और समय पर कीमोथेरेपी जरूरी होती है। इविंग सार्कोमा बेहद दुर्लभ किस्म का रोग है और एक अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर में दस लाख में से एक व्यक्ति ही इसका शिकार होता है। डॉ सुहैल कुरैशी, एडिशनल डायरेक्टर एवं यूनिट हैड, मेडिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल शालीमार बाग के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने इस जीवनघाती कैंसर और गंभीर किस्म की श्वसन जटिलताओं का सफल उपचार कर उक्त युवती को नया जीवनदान दिया है। मरीज को लगातार सांस लेने में तकलीफ थी और पिछले करीब एक साल से भी अधिक समय से पीठ के ऊपरी हिससे में सूजन भी बनी हुई थी। इस दौरान, वे अन्य निजी डॉक्टरों से वैकल्पिक चिकित्सा लेती रही थीं, लेकिन कोई राहत नहीं मिली थी, जिसके कारण कैंसर फैलकर एडवांस स्टेज तक पहुंच चुका था। जब मरीज के लक्षण गंभीर होने लगे, तो उन्हें बेहद गंभीर अवस्था में इलाज के लिए फोर्टिस हॉस्पीटल शालीमार बाग में भर्ती कराया गया। 

अस्पताल में भर्ती के समय, मरीज सेप्टिक शॉक से गुजर रही थीं और गंभीर हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन का अत्यंत कम सतर) तथा हाइपोटेंशन (कम रक्तचाप) की शिकार भी थीं, जिसके लिए उन्हें तत्काल आईसीयू केयर, वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना जरूरी था। साथ ही, उनका रक्तचाप/ब्लडप्रेशर सामान्य करने के लिए उन्हें इनोट्रोपिक दवाएं भी दी गईं। अस्पताल में मरीज की विस्तृत जांच से पता चला कि मरीज के दाएं फेफड़े में पूरी तरह से कैंसरकारी ट्यूमर फैल चुका था, जो कि पसलियों से शुरू हुआ था। इस ट्यूमर ने मरीज के सीने में कई महत्वपूर्ण संरचनाओं पर दबाव डाला था और उन्हें दूसरी ओर धकेल दिया था, जिसके परिणामस्वरूप मरीज केवल एक फेफड़े से काम चला रही थीं। इसके अलावा, मरीज और भी कई तरह की गंभीर श्वसन समस्याओं से पीड़ित थीं, उनका रक्तचाप भी कम था जिसके लिए उन्हें तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता थी। मरीज की अस्थिर अवस्था को देखते हुए, उन्हें शुरू में कीमोथेरेपी के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया, लेकिन इंटेंसिव केयर सपोर्ट, IV एंटीबायोटिक, तथा 8 से 10 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद, अस्पताल की मेडिकल टीम ने आईसीयू में कड़ी निगरानी में उनकी कीमोथेरेपी शुरू की और इस दौरान उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। अगले कुछ दिनों में मरीज की हालत में सुधार दिखायी देने लगा और धीरे-धीरे उन्हें रेस्पीरेटरी सपोर्ट से हटा लिया गया। मरीज के PET स्कैन समेत अन्य जांच से इस बात की पुष्टि हुई यह रोग मरीज के सीने तक सीमित हो गया था, और लगातार इलाज ने मरीज की हालत और रिकवरी की संभावना भी बेहतर बनायी थी। 

इस मामले की और जानकारी देते हुए, डॉ सुहैल कुरैशी, एडिशनल डायरेक्टर एवं यूनिट हैड, मेडिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल शालीमार बागने कहा हालांकि इविंग सार्कोमा काफी दुर्लभ रोग है और साथ ही, यह बेहद आक्रामक लेकिन उपचारयोग्य भी है, बशर्ते इसका निदान और उपचार समय पर तथा साक्ष्य-आधारित तरीके से किया जाए। इस मामले में, मरीज को काफी गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जबकि उनका रोग बेहद एडवांस स्टेज में पहुंच चुका था जिसकी वजह से मरीज का एक फेफड़ा लगभग बेकार हो चुका था, सांस लेने में उन्हें काफी तकलीफ थी, सेप्टिसीमिया और हेमोडायनमिक अस्थिरता भी थी। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट और इंटेंसिव क्रिटिकल केयर की थी, जिसके कारण अन्य कई जटिलताओं जैसे अस्पताल में होने वाले इंफेक्शन, मल्टी-ऑर्गेन डिस्फंक्शन, तथा रिकवरी में देरी जैसे जोखिम बढ़ चुके थे। इस स्थिति में मरीज की कीमोथेरेपी करना काफी जोखिमपूर्ण हो सकता था, क्योंकि इसके कारण इम्युनिटी के और कमजोर होने का खतरा था जो पहले से मौजूद इंफेक्शन को और गंभीर बना सकता था। लेकिन, सावधानीपूर्वक आईसीयू मैनेजमेंट, आक्रामक तरीके से इंफेक्शन कंट्रोल और लगातार निगरानी से हम मरीज की हालत स्थिर बनाने के बाद उनका उपचार शुरू करने में समर्थ हुए। इविंग सार्कोमा जैसे रोगों में शीघ्र निदान तथा मल्टीडिसीप्लीनरी टीमों द्वारा उपचार मरीज की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण हैं। श्री नवीन शर्मा, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल शालीमार बाग ने कहा, “इस प्रकार के दुर्लभ और जटिल मामले इनका प्रबंधन करने की फोर्टिस की विशेषज्ञाता का सबूत हैं। इस मामले ने परस्पर सहयोगात्मक तरीके से एडवांस ओंकोलॉजी केयर, क्रिटिकल केयर में उत्कृष्टता तथा मरीज-केंद्रित उपचार के लिए फोर्टिस हॉस्पीटल शालीमार बाग की प्रतिबद्धता दर्शायी है।

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