नारायणा अस्पताल में दोहरी सर्जरी से नेपाल के 7 महीने के शिशु को मिली नई जिंदगी

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, बुधवार 1 अप्रैल 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), गुरुग्राम। नारायणा अस्पताल, गुरुग्राम के डॉक्टरों ने एक सात महीने के गंभीर रूप से बीमार शिशु का सफलतापूर्वक इलाज कर उसे नई जिंदगी दी। नेपाल निवासी यह बच्चा जन्मजात लीवर रोग बिलियरी एट्रेसिया और जीवन-खतरनाक मस्तिष्क रक्तस्राव (ब्रेन हेमरेज) से जूझ रहा था। जन्म के शुरुआती दिनों में ही बच्चे में पीलिया और क्ले-कलर्ड स्टूल जैसे लक्षण दिखे, जिसके बाद जांच में बिलियरी एट्रेसिया  की पुष्टि हुई। जुलाई 2025 में नेपाल में सर्जरी करवाई गई, लेकिन इसके बावजूद लीवर की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और बच्चे को  बिलियरी सिरोसिस व पोर्टल हाइपरटेंशन  हो गया। इससे पेट और आंतों में बार-बार रक्तस्राव होने लगा और उसे कई बार अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। स्थिति और गंभीर तब हुई जब बच्चे के मस्तिष्क के बाएं हिस्से में रक्तस्राव पाया गया, जिससे मस्तिष्क पर दबाव बढ़ने लगा और ब्रेन हर्निएशन का खतरा उत्पन्न हो गया। 

नारायणा अस्पताल की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने इस जटिल मामले में चरणबद्ध उपचार अपनाया। पहले चरण में 23 जनवरी 2026 को न्यूनतम आक्रामक तकनीक से ब्रेन सर्जरी कर रक्त को हटाया गया और मस्तिष्क पर दबाव कम किया गया। इसके बाद बच्चे को स्थिर कर उचित पोषण और चिकित्सा देखभाल दी गई। दूसरे चरण में 12 फरवरी 2026 को बच्चे के पिता द्वारा लीवर दान कर सफल लिविंग डोनर लीवर ट्रांसप्लांट किया गया। सर्जरी के छह सप्ताह बाद बच्चा अच्छी रिकवरी कर रहा है, उसे कोई न्यूरोलॉजिकल नुकसान नहीं है और वह उम्र के अनुसार सामान्य विकास कर रहा है। डॉ. संजय गोजा के अनुसार, लीवर की खराबी के कारण रक्त जमने की क्षमता प्रभावित हो रही थी, जिससे मस्तिष्क में भी रक्तस्राव हुआ। ऐसे में लीवर प्रत्यारोपण न केवल जीवन बचाने बल्कि न्यूरोलॉजिकल नुकसान को रोकने के लिए भी आवश्यक था। यह मामला नवजात पीलिया की समय पर पहचान, विशेषज्ञ केंद्रों पर रेफरल और मल्टीडिसिप्लिनरी उपचार के महत्व को रेखांकित करता है।

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