ग्रेटीफाई ने एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने पेपरलेस परीक्षाएं करवाया
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, बुधवार 1 अप्रैल 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। ग्रेटीफाई, जो शिक्षा के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देने वाली कंपनी है, ने एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पांचों कैंपस – कट्टनकुलाथुर, रामापुरम, वाडापालानी, त्रिची और दिल्ली एनसीआर (गाजियाबाद) में पूरी तरह से पेपरलेस परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित करवाई हैं। 3,000 से ज़्यादा एमबीए और एम.टैक स्टूडेंट्स के लिए 40,000 से ज़्यादा परीक्षाएं डिजिटल फार्मेट से आयोजित की गईं, जिनमें छपे हुए प्रश्न पत्रों या कागज़ की उत्तर पुस्तिकाओं का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया। ये परीक्षाएँ ग्रेटीफाई के एग्जामएक्स (ExamX) प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके 45 दिनों की अवधि में आयोजित की गईं। इसके लिए लगभग 2,000 टैबलेट लगाए गए थे और एक ही समय पर लगभग 1,800 स्टूडेंट्स ने इसका इस्तेमाल किया, जिसमें प्लेटफ़ॉर्म में कोई रुकावट नहीं आई। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब भारत का एग्जामिनेशन सिस्टम सुरक्षा, कार्यक्षमता और डिजिटल अपनाने पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत नीतिगत निर्देशों और पेपर-बेस्ड परीक्षाओं में होने वाली कमज़ोरियों को लेकर बढ़ती चिंताओं के अनुरूप है।
परीक्षा की पूरी प्रक्रिया, सुरक्षित प्रश्न पत्र वितरण से लेकर मूल्यांकन तक, डिजिटल रूप से पूरी की गई। स्टूडेंट्स ने बायोमेट्रिक या चेहरे की पहचान (फेशियल रेकोग्निशन) का इस्तेमाल करके अपनी पहचान सुनिश्चित की और टैबलेट पर स्टाइलस का इस्तेमाल करके अपने जवाब लिखे। इसमें हाथ से लिखे जवाब, डायाग्राम्स और एकुऐशंस भी शामिल थे। यह सिस्टम एक सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड माहौल में ऑफ़लाइन क्षमता के साथ काम करता था, जिससे कनेक्टिविटी में उतार-चढ़ाव होने पर भी परीक्षाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहीं। परीक्षा खत्म होने के 10 मिनट के अंदर ही उत्तर पुस्तिकाएं मूल्यांकन करने वालों को उपलब्ध करा दी गईं, जिससे पेपर-बेस्ड पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में काम पूरा होने में लगने वाला समय काफी कम हो गया। इस प्लेटफ़ॉर्म ने स्टूडेंट्स के प्रदर्शन और मूल्यांकन प्रक्रियाओं के बारे में विस्तृत जानकारी (एनालिटिक्स) तक पहुंच भी आसान बना दी।काम की कार्यक्षमता के अलावा, इस पेपरलेस मॉडल ने लगभग 1.6 मिलियन कागज़ की शीटों का इस्तेमाल खत्म करके पर्यावरण को बचाने में भी योगदान दिया। इससे कागज़ की खपत और उससे होने वाले कार्बन एमिशन में कमी आई।
इस पार्टनरशिप के बारे में बात करते हुए, दिनेश कुमार पूबालन, सीईओ और सह-संस्थापक, ग्रेटीफाई ने कहा कि “भारत में एग्जामिनेशन टेक्नोलॉजी की कोई कमी नहीं है। कमी है तो भरोसे की; दशकों से पेपर लीक, लॉजिस्टिक्स में गड़बड़ियां और मूल्यांकन में देरी ने इस सिस्टम पर से लोगों का भरोसा ही खत्म कर दिया है। एसआरएम ने यह साबित कर दिया है कि एक बड़ा, मल्टी-कैंपस संस्थान पूरा एग्जामिनेशन साइक्लि - जिसमें विस्तार से दिए गए वर्णनात्मक, हाथ से लिखे जाने वाले और बहुत ज़्यादा महत्व वाले पेपर शामिल हैं - बिना कागज़ की एक भी शीट इस्तेमाल किए और बिना किसी रुकावट के चला सकता है। यह सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का एक 'प्रूफ़-ऑफ़-कॉन्सेप्ट' (सिर्फ़ एक आइडिया का सबूत) नहीं है। यह संस्थागत स्तर पर काम करने का पक्का सबूत है। अब इस सेक्टर के लिए सवाल यह नहीं रहा कि क्या डिजिटल एग्जामिनेशन काम करता हैं। बल्कि सवाल यह है कि संस्थान कितनी तेज़ी से इस बदलाव को अपनाने के लिए तैयार हैं।
इस सहयोग का समर्थन करते हुए, एसआरएम के प्रवक्ता ने कहा कि “एसआरएम में, हम ऐसी टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं जो एजुकेशनल क्वालिटी और इंस्टीट्यूशनल कार्यक्षमता को सही मायने में बेहतर बनाए। हमारे सभी कैंपस में पूरी तरह से डिजिटल परीक्षाएं आयोजित करना, मूल्यांकन के तरीकों को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। इस प्रक्रिया ने स्टूडेंट्स और फ़ैकल्टी, दोनों के लिए एक तेज़, ज़्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार एग्जामिनेशन साइक्लि सुनिश्चित किया है। इसके साथ ही हम इसे इस बात की नींव के तौर पर देखते हैं कि भविष्य में हमारे सभी प्रोग्राम में मूल्यांकन किस तरह से किया जाएगा। यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल परीक्षाओं के लिए एक ऐसा मॉडल स्थापित करती है जिसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है, और यह भारत में सुरक्षित, टेक्नोलॉजी-आधारित मूल्यांकन प्रणालियों की ओर हो रहे बदलाव को और भी अधिक मज़बूत बनाती है।





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