फिल्म समीक्षा : पति पत्नी और वोह दो

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, रविवार 17 मई 2026, फिल्म समीक्षक : रेहाना परवीन (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। फिल्म पति पत्नी और वोह दो शुक्रवार 15 मई 2026 को विशेष प्रेस शो डिलाइट, दिल्ली में मुझे देखने का अवसर मिला। फिल्म पति पत्नी और वोह दो में आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, वामिका गब्बी, रकुल प्रीत सिंह, विजय राज, तिग्मांशु धूलिया, इत्यादि मुख्य कलाकार हैं। फिल्म पति पत्नी और वोह दो का निर्देशन मुदस्सर अज़ीज़ निर्माता है भूषण कुमार, रेणु रवि चोपड़ा फिल्म का निर्माण T-सीरीज, बीएआर चोपड़ा ने किया है।  इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से UA 16+ प्रमाण पत्र दिया गया है। इसका अर्थ है कि 16 वर्ष से कम आयु के दर्शकों को अभिभावकों की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी जाती है। फिल्म की अवधि लगभग 1 घंटे 57 मिनट (117 मिनट) है। फिल्म पति पत्नी और वोह दो भारतीय पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों की उलझनों को हल्के-फुल्के हास्य और भावनात्मक अंदाज़ में पेश करने वाली फिल्म दर्शकों को मनोरंजन के साथ सोचने पर भी मजबूर करती है। फिल्म आधुनिक रिश्तों, विश्वास, पारिवारिक मूल्यों और बदलते सामाजिक समीकरणों को कॉमेडी तथा ड्रामा के संतुलन के साथ प्रस्तुत करती है। फिल्म की कहानी एक ऐसे दंपति के इर्द-गिर्द घूमती है जिनके जीवन में अचानक एक तीसरे व्यक्ति की एंट्री से रिश्तों में भ्रम, हास्य और भावनात्मक टकराव पैदा हो जाता है। कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं और पारिवारिक दर्शकों के लिए मनोरंजन का पूरा पैकेज तैयार करते हैं। निर्देशक ने फिल्म को हल्के-फुल्के अंदाज़ में प्रस्तुत किया है, जिससे गंभीर विषय भी बोझिल नहीं लगते। संवाद चुटीले हैं और कई दृश्य हँसी पैदा करने में सफल रहते हैं। फिल्म का स्क्रीनप्ले तेज़ गति से आगे बढ़ता है, हालांकि कुछ स्थानों पर कहानी थोड़ी अनुमानित लगती है।

कलाकारों का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। पति-पत्नी के रिश्ते में पैदा होने वाली गलतफहमियों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से निभाया है। सहायक कलाकारों ने भी हास्य दृश्यों में अच्छा योगदान दिया है। संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के माहौल के अनुरूप हैं। गीत कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं और पारिवारिक मनोरंजन का स्वाद बनाए रखते हैं। सिनेमैटोग्राफी रंगीन और आकर्षक है जो फिल्म को हल्का और मनोरंजक बनाए रखती है। फिल्म का सबसे सकारात्मक पक्ष यह है कि यह रिश्तों में विश्वास और संवाद की अहमियत को मनोरंजन के माध्यम से दर्शाती है। पारिवारिक दर्शकों के लिए यह फिल्म एक साफ-सुथरी और मनोरंजक प्रस्तुति साबित होती है। फिल्म की कहानी आयुष्मान खुराना (प्रजापति पांडे) जो फारेस्ट अधिआरी है और उनकी चहेती पत्रकार पत्नी के इर्द-गिर्द घूमती है आयुष्मान खुराना (प्रजापति पांडे) के पारिवारिक जिंदगी में दुसरो के निगाह में दो और लड़की आ जाती है जिससे वो शादी करने जाता है बस इसी कहानी के आसपास फिल्म रहती है। यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं करती बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है सिर्फ आखों देखी बात  भी कभी गलत हो सकती है इसलिए देखने के बाद भी समझने की कोशिश करनी चाहिए शायद हमारे देश में नेता भी यही करते है और जनता उसी को सच मान लेती है। फिल्म देखने का मजा खराब ना हो इसलिए पूरी कहानी आपको नहीं बता रही हूँ कियोंकि फिल्म को आप अपने परिवार व् दोस्तों के साथ सिनेमाघरों में जाकर बड़े  पर्दे पर देखने का अलग मजा आएगा। मैँ इस फिल्म को पांच में से साढ़े तीन स्टार देती हूँ और पारिवारिक फिल्म के साथ सन्देश देने वाली फिल्म को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए पांच में से चार स्टार देती हूँ।

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