फिल्म समीक्षा : चांद मेरा दिल


प्रेम, एहसास और रिश्तों की नज़ाकत को बयां करती फिल्म

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शनिवार 23 मई 2026, फिल्म समीक्षक : रेहाना परवीन (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। फिल्म चांद मेरा दिल वीरवार 21 मई 2026 को विशेष प्रेस शो डिलाइट डायमंड, दिल्ली में मुझे देखने का अवसर मिला। फिल्म चांद मेरा दिल में अनन्य पांडेय, लक्ष्य, इत्यादि मुख्य कलाकार हैं। फिल्म चांद मेरा दिल का निर्देशन विवेक सोनी निर्माता है कारन जोहर फिल्म का निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस ने किया है। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से UA 16+ प्रमाण पत्र दिया गया है। इसका अर्थ है कि 16 वर्ष से कम आयु के दर्शकों को अभिभावकों की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी जाती है। फिल्म की अवधि लगभग 2 घंटे 15 मिनट (135 मिनट) है। फिल्म चांद मेरा दिल सिनेमा घरों में 22 मई 2026 को प्रदर्शित हुई है। आज के दौर में जहां फिल्मों में तेज़ रफ्तार कहानी और चमक-दमक को ज्यादा महत्व दिया जाता है वहीं चांद मेरा दिल एक ऐसी रोमांटिक फिल्म बनकर सामने आती है जो दिल की भावनाओं, रिश्तों की सच्चाई और प्रेम की मासूमियत को बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारती है। निर्देशक विवेक सोनी ने इस फिल्म को केवल एक प्रेम कहानी तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसमें आत्मसम्मान, भरोसे और टूटते-बिखरते रिश्तों की भावनात्मक गहराई को भी शामिल किया है। फिल्म की कहानी युवाओं की सोच और आधुनिक रिश्तों के संघर्ष को दर्शाती है, जिससे दर्शक खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

 फिल्म में अनन्य पांडेय और लक्ष्य की जोड़ी नई ताजगी लेकर आती है। अनन्या पांडे ने अपने किरदार में भावनात्मक मजबूती और मासूमियत दोनों को प्रभावशाली ढंग से निभाया है वहीं लक्ष्य ने एक संवेदनशील प्रेमी के रूप में बेहतरीन अभिनय किया है। दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री कई दृश्यों में दर्शकों के दिल को छू जाती है। फिल्म का संगीत इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है। रोमांटिक गीत और मधुर बैकग्राउंड स्कोर कहानी की भावनाओं को और गहराई देते हैं। सिनेमैटोग्राफी शानदार है और बड़े शहरों की चमक के बीच अकेलेपन और प्रेम की अनुभूति को कैमरे ने बेहद खूबसूरती से कैद किया है। हालांकि फिल्म का शुरुआती भाग थोड़ा धीमा लगता है लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, भावनात्मक पकड़ मजबूत होती जाती है। इंटरवल के बाद फिल्म दर्शकों को पूरी तरह बांध लेती है और क्लाइमैक्स भावुक कर देता है। फिल्म की कहानी कॉलेज जाने वाले युवाओं की सोच पर आधारित है। अनन्य पांडेय (चांदनी उर्फ़ चाँद) और लक्ष्य (अर्णव) दोनों इंजीनियरिंग करते करते दोनों में प्यार हो जाता है और माँ बाप भी बन जाते है। इनके इस रिश्तों को दोनों के परिवार वाले मानने से इंकार कर देते हैं फिर यहां से शुरू होती है बेरोजगार माँ बाप के संघर्ष की कहानी फिल्म देखने का मजा खराब ना हो इसलिए पूरी कहानी आपको नहीं बता रही हूँ कियोंकि फिल्म को आप अपने दोस्तों के साथ सिनेमाघरों में जाकर बड़े पर्दे पर देखने का अलग मजा आएगा। मैँ इस फिल्म को पांच में से साढ़े तीन स्टार देती हूँ और प्रेम, एहसास और रिश्तों की नज़ाकत को समझने वाले फिल्म के दर्शकों के लिए पांच में से चार स्टार देती हूँ।

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