फोर्टिस शालीमार बाग ने एकसाथ किया दुर्लभ लिवर ट्रांसप्लांट और हार्ट सर्जरी

शब्दवाणी सम्माचार टीवीरविवार 22 मई 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। फोर्टिस शालीमार बाग ने गंभीर रूप से बीमार दो रोगियों की जान बचाकर उल्लेखनीय चिकित्सकीय सफलता हासिल की है। ये रोगी लिवर फेलियर के एडवांस्ड्स्टे्ज के साथ ही हार्ट की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।यह बीमारियों का ऐसा कॉम्बिनेशन है जिसे बेहद जोखिम भरा और अक्सर जानलेवा माना जाता है।ऐसे रोगियों में लिवर ट्रांसप्लांट के साथ जटिल हार्ट सर्जरीको एक साथ सफलतापूर्वक अंजाम देने का मामला वैश्विक स्तर पर अत्यंत दुर्लभ है।चिकित्सा साहित्य में ऐसे केवल गिने-चुने मामले ही दर्ज हैं, विशेष रूप से उन रोगियों में जिन्हें लिवर की गंभीर बीमारी है।ऐतिहासिक रूप से, गंभीर सिरोसिस से पीड़ित रोगियों में अलग से की जाने वाली हृदय संबंधी सर्जरी के परिणाम बहुत ही खराब रहे हैं,इसे देखते हुए इन मामलों में सफल उपचार असाधारण प्रकृति और क्लींनिकल महत्व को रेखांकित करती है। दोनों रोगी डिकम्पहनसेटेड क्रोनिक लिवर डिजीजसे पीड़ित थे, जो लिवर फेलियर का एडवांस स्टेज है, जिसके कारण पेट में पानी जमा होना, चेतना में बदलाव, भोजन नली से खून बहना, पीलिया और किडनी की कार्यक्षमता में गड़बड़ी जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा होती हैं। उनकी स्थिति एक ऐसे स्टे ज पर पहुंच गई थी, जहां लिवर ट्रांसप्लांट ही उनकी जान बचाने का एकमात्र उपाय था। हालांकि ट्रांसप्लांट करने से पहले की जांच के दौरान चिकित्सचकों की टीम को दोनों रोगियों में हार्ट से जुड़ी कुछ गंभीर अंदरूनी समस्याओं का पता चला, जिसके चलते लिवर ट्रांसप्लांट करना तब तक सुरक्षित नहीं था, जब तक कि हार्ट की उन समस्याओं का इलाज न कर लिया जाए।46 वर्षीय पहले रोगी जो कशकादरिया (उज्बे्किस्तान) के रहने वाले हैं, के हार्ट की तीनों मुख्य धमनियों में गंभीर रुकावटें पाई गईं। दूसरे रोगी जिनकी उम्र 41 साल थी, वे हार्ट के उस वाल्व के गंभीर रूप से सिकुड़ने की समस्या से जूझ रहे थे जो हृदय से शरीर तक रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है। इन दोनों में से किसी भी स्थितिकियदि समय पर इलाज न किया जाए, तो जानलेवा साबित हो सकती है।

चिकित्स कों को पाया कि केवल एक अंग का इलाज करने से जीवित रहने की संभावनाओं में सुधार नहीं होगा इसलिए मेडिकल टीमों ने हृदय और लिवर, दोनों की समस्याओं को सावधानीपूर्वक और समन्वित तरीके से ठीक करने के लिएदोनों रोगी के हिसाब से अलग-अलग और मिले-जुले इलाज की योजना तैयार की। पहले रोगी के लिएसर्जन्सय ने धड़कते हार्ट पर कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी की,यह एक विशेष तरीका था जिसे एडवांस्डन लिवर की बीमारी के चलते खून बहने के जोखिम को कम करने के लिए अपनाया गया था। इसके तुरंत बादउसी ऑपरेशन के दौरान एक जीवित डोनर से लिवर ट्रांसप्लांट किया गया, जिससे दोनों शल्यऑ क्रियाओं के बीच सहज ट्रांजिशन सुनिश्चित हुआ।दूसरे रोगी के मामले मेंचिकित्ससकों कीटीम ने सबसे पहले खराब हो चुके हार्ट वाल्व को बदलने के लिए ओपन-हार्ट सर्जरी की। स्ट्रोक जैसी जटिलताओं की आशंका को खत्म करने के लिए 24 घंटे तक कड़ी निगरानी रखने के बादचिकित्सीकों की टीम ने अगले दिन एक जीवित डोनर से उनमें लिवर ट्रांसप्लांट किया। दोनोंसर्जरी बेहद जटिल थी और सर्जरी में कई घंटेलगे। उपचार के लिए बहुत ही बारीकी से सर्जिकल योजना बनाने, उन्नत एनेस्थीसिया सपोर्ट और चौबीसों घंटे लगातार गहन देखभाल निगरानी की आवश्यकता थी। इसमें लिवर फेलियर से जुड़ा अत्यधिक रक्तस्राव के जोखिम सहित अन्योसामने आने वाली स्वाभाविक चुनौतियों के बावजूद चिकित्सेकों की टीमों ने बहुत कम खून चढ़ाने की जरूरत के साथखून के नुकसान को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया।दोनों रोगी उपचार के बाद धीरे-धीरे ठीक हो गए और तीन हफ्तों के भीतर स्थिर स्थिति में उन्हें अस्प ताल से छुट्टी दे दी गई।उनके प्रत्यारोपित लिवर ठीक से काम कर रहे थे और हार्ट का फंक्शउन भी स्थिर अवस्थाी में था। इस तरह के संयुक्त हस्तक्षेपों की जटिलता और दुर्लभ प्रकृति को देखते हुएयह चिकित्साअ जगत में उल्लेखनीय उपलब्धि है।

फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में लिवर ट्रांसप्लांट और एचपीबी सर्जरी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. आशीष जॉर्ज ने कहा इन रोगियों में सर्जरी में देर करनेका कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि उनके लिवर फेलियर और हृदय की बीमारी बहुत गंभीर थी। क्लिनिकल हस्त क्षेपों की सफलता सही समय, सही सर्जिकल तकनीक का चुनाव और कई स्पेिशियलिटीज के बीच निर्बाध तालमेल पर निर्भर होतीथी। ये मामले इस बात को उजागर करते हैं कि जिन रोगियों को कभी ऑपरेशन के लायक नहींमाना जाता था, उनका भी सही विशेषज्ञता, मेडिकल इन्फ्रा स्ट्रक्चर और बेहतर तालमेल वाली मल्टी-डिसिप्लिनरी देखभाल के सहारे सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। फोर्टिस शालीमार बाग की कार्डियोलॉजी टीम ने कहा इन दोनों रोगियों को हृदय की गंभीर बीमारी थी, जो अपने आप में एक गंभीर कार्डियक सर्जरी का संकेत है।साथ ही  उन्हें एडवांस्डा स्टेरज की लिवर की भी बीमारी थी जिसके लिए लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत थी, ऐसे में यह बहुत ही जटिल स्थिति थी।पहले रोगी को गंभीर ट्रिपल वेसल डिज़ीजथी, जिसमें दो नसों में 100% और एक धमनी में 99% रुकावट थी।इसके लिए उनकी ओपीसीएबीजी (OPCABG)सर्जरी की गई। दूसरे रोगी को गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिसके साथ-साथ बाएं वेंट्रिकुलर डिस्फ़ंक्शनकी समस्या थी, जिसके लिए उनका मैकेनिकल एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंटकिया गया।इन जटिल बीमारियों के उपचार में बेहतरीन परिणामविभिन्न सुपर-स्पेशियलिटीज के बीच बेहतरीन टीमवर्क, इन बीमारियों से निपटने की विशेषज्ञता और उपयुक्त इन्फ्राबस्ट्ऱक्चCर से संभव हुआ है। श्री नवीन शर्मा, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग ने कहा ये दुर्लभ और जटिल मामले लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन्सय, कार्डियक सर्जन्सफ, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर टीमों के बीच घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से मल्टी-ऑर्गन फेलियर को प्रबंधित करने में फोर्टिस की विशेषज्ञता को दर्शाता है। ये ऐतिहासिक सफलताएं फोर्टिस शालीमार बाग की भूमिका को एडवांस्ड  लिवर ट्रांसप्लांट और जटिल हृदय देखभाल के अग्रणी केंद्र के रूप में और पुख्ता  करती हैं।यह केंद्र एकीकृत और रोगी-केंद्रित उपचार के माध्यम सेकई जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे रोगियों को एक नई उम्मीद प्रदान करता है।

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