परिवर्तन केवल एक थीम न रहे इसे एक वैश्विक आंदोलन बनने दें : श्री भूपेंद्र यादव

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 27 फरवरी 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के वार्षिक प्रमुख मंच, विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (WSDS) 2026 के रजत जयंती संस्करण का आज ताज पैलेस में शुभारंभ हुआ। यह आयोजन जलवायु और विकास से जुड़े परिवर्तनकारी कार्यों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दुनिया भर के नेताओं, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है। परिवर्तन ट्रांसफॉर्मेशन्स: सतत विकास के लिए दृष्टि, स्वर और मूल्य” की व्यापक थीम के अंतर्गत आयोजित WSDS (WSDS) का यह 25वां संस्करण, शिखर सम्मेलन की विरासत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह 'ग्लोबल साउथ' (वैश्विक दक्षिण) में आधारित सतत विकास पर स्वतंत्र रूप से आयोजित होने वाला दुनिया का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय मंच है।  

स्वागत संबोधन देते हुए टेरी के अध्यक्ष, श्री नितिन देसाई ने कहा आज दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है। हमारे सामने चुनौती जागरूकता की नहीं, बल्कि कार्रवाई की है। विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन का पूरा सफर सिर्फ जागरूकता की बातें करने से हटकर अब इस बात की बेहतर समझ की ओर बढ़ा है कि स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए वास्तव में क्या किया जाना चाहिए। हमारे सामने सबसे गंभीर समस्या जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की है। टेरी की महानिदेशक, डॉ. विभा धवन ने अपने थीम संबोधन में इस बात पर जोर दिया पिछले 25 संस्करणों के दौरान, WSDS वैश्विक दक्षिण के लिए जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर विमर्श को दिशा देने वाला एकमात्र स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है। हम चर्चाएं तो बहुत कर चुके हैं, लेकिन आज हमें भारत और वैश्विक, दोनों स्तरों पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है। सत्र के समापन से पहले, डॉ. धवन ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया एक विशेष संदेश पढ़कर सुनाया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा हमारा दृष्टिकोण 'अंत्योदय' से प्रेरित है, जिसका अर्थ है सबसे वंचित व्यक्ति का उत्थान। जलवायु कार्रवाई को सबसे पहले कमजोर, गरीब और वंचित वर्ग की रक्षा करनी चाहिए। ग्लोबल साउथ जलवायु परिवर्तन का असमान रूप से बहुत अधिक भार वहन करता है, फिर भी उनके लिए विकास अनिवार्य है। इसलिए 'जलवायु न्याय' अत्यंत आवश्यक है। विकासशील देशों को पृथ्वी की रक्षा करते हुए गरीबी और भूख का उन्मूलन करना होगा, जिसके लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वित्तीय विकल्प और साझेदारियां बहुत जरूरी हैं।

विकसित देशों की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे तेजी से आगे बढ़ें, सतत जीवनशैली अपनाएं और बड़े पैमाने पर वित्त व तकनीक उपलब्ध कराएं। मुझे उम्मीद है कि यह सम्मेलन संकल्पों को मजबूत करेगा, सहयोग को गहरा करेगा और हमारे ग्रह के लिए एक सतत भविष्य सुनिश्चित करेगा। WSDS के रजत जयंती संस्करण में सार्थक विचार-विमर्श के लिए मेरी ढेरों शुभकामनाएं। विशेष संबोधन में, टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ, श्री सिद्धार्थ शर्मा ने जोर देते हुए कहा, “यह कार्रवाई का समय है। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम जलवायु परिवर्तन की भाषा का लोकतंत्रीकरण करें। इसे केवल सम्मेलनों, बैठक कक्षों या बोर्डरूम की चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आम जनमानस तक पहुँचना होगा। लोगों को यह समझना होगा कि यह उन पर कैसे प्रभाव डालता है। इसके बाद हमें ऐसे समाधानों पर काम करना होगा जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हों, और जिनमें अनुकूलन को भी उतना ही महत्व दिया जाए जितना हम शमन को देते हैं।

इस शिखर सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, माननीय श्री भूपेंद्र यादव द्वारा किया गया। अपने मुख्य संबोधन में, मंत्री ने समानता, लचीलापन और सतत विकास पर टिकी जलवायु महत्वाकांक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। WSDS (WSDS) के ग्लोबल साउथ से उभरकर एक ऐसे विशिष्ट मंच बनने पर, जो सरकारों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और समुदायों को एक साथ लाता है ताकि 'स्थिरता के विज्ञान' को नीतियों, साझेदारियों और धरातल पर व्यावहारिक कार्रवाई में बदला जा सके, श्री यादव ने कहा, “आज का दिन केवल एक विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवता और इस ग्रह के लिए एक निर्णायक क्षण है। इस शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम ट्रांसफॉर्मेशन्स: विजन, वॉयस और वैल्यूज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एक रणनीतिक जरूरत है। लेकिन नेतृत्व के लिए धैर्य और दृष्टि दोनों की आवश्यकता होती है। शिखर सम्मेलन में रेखांकित 'परिवर्तन का सिद्धांत' कंस्ट्रक्टिविज़्म, लर्निंग, ट्रांसफॉर्मेशन हमें याद दिलाता है कि मानक और नियम संवाद के माध्यम से विकसित होते हैं। लेकिन अगले 25 वर्ष केवल क्रियान्वयन के होने चाहिए। हमें आगे बढ़ना होगा: प्रतिज्ञाओं से प्रदर्शन की ओर; लक्ष्यों से प्रगति-पथ की ओर; और महत्वाकांक्षा से जवाबदेही की ओर। इस सम्मेलन को उस आयोजन के रूप में याद किया जाए जहाँ: विजन व्यावहारिक बना, आवाजें समावेशी हुईं और मूल्य संस्थागत बने। 'परिवर्तन' केवल एक विषय बनकर न रह जाए, बल्कि इसे एक वैश्विक आंदोलन बनने दें।

उद्घाटन संबोधन में, कोऑपरेटिव रिपब्लिक ऑफ गुयाना के उपराष्ट्रपति, महामहिम डॉ. भर्रत जगदेव ने कहा, “जब यह शिखर सम्मेलन पच्चीस साल पहले शुरू हुआ था, तब सारा ध्यान जलवायु और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने पर था। आज चुनौती जागरूकता की नहीं, बल्कि अपने लक्ष्यों को पाने के लिए ठोस कार्रवाई और उच्च महत्वाकांक्षा की है। ऐसे समय में जब बड़ी अर्थव्यवस्थाएं पीछे हट रही हैं, जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना—विशेष रूप से कार्बन मूल्य निर्धारण, बहुपक्षीय व्यवस्थाओं और विमानन व नौवहन जैसे क्षेत्रों में—कहीं अधिक कठिन हो जाता है इसके बावजूद, मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व प्रगति को आगे बढ़ा सकता है। गुयाना में, हमारी 2009 की लो-कार्बन डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी ने यह साबित किया है कि मौजूदा वनों को बचाए रखना उच्च गुणवत्ता वाला और किफायती समाधान प्रदान करता है। हमने तेल संसाधनों का जिम्मेदारी से विकास करने के साथ-साथ, स्वैच्छिक और अनुपालन बाजारों में करोड़ों डॉलर मूल्य के 'फॉरेस्ट कार्बन क्रेडिट' बेचे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सस्टेनेबिलिटी वास्तविक आर्थिक मूल्य प्रदान करती है।

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