व्हाइट-कॉलर और गिग-वर्कफोर्स की हायरिंग में पाई गईं 5 फीसदी विसंगतियां : ऑथब्रिज

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, बुधवार 4 मार्च 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। भारत की अग्रणी ट्रस्ट एवं ऑथेन्टिकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी ऑथब्रिज ने अपनी अर्द्ध-वार्षिक रिपोर्ट वर्कफोर्स फ्रॉड फाइल्स- H1 FY26 जारी की है, जो भारत के कार्यबल में बैकग्राउंड वैरिफिकेशन ट्रैंड्ज़ का विश्लेषण करती है। रिपोर्ट के अनुसार पारम्परिक व्हाइट-कॉलर रोल्स और ऑन-डिमांड वर्कफोर्स, दोनों में हायरिंग में विसंगतियां बनी हुई है, भले ही रिक्रूटमेंट प्रक्रिया तेज़ी से डिजिटल हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 26 की पहली छमाही में व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों की भर्ती में 4.33 फीसदी विसंगतियां देखी गईं। ऑन-डिमांड इकोसिस्टम (ओडीई) में तुलनात्मक रूप से अधिक 5.61 फीसदी विसंगतियां रहीं, जो फ्लेक्सिबल और ऑपरेशनल रोल्स में वैरिफिकेशन के ज़ोखिम को दर्शाती हैं। ये परिणाम वित्तीय वर्ष 26 की पहली छमाही में ऑथब्रिज के बैकग्राउंड वैरिफिकेशन डेटा पर आधारित हैं, जिसके तहत पहचान, पता, नौकरी की हिस्ट्री, शिक्षा, क्रिमिनल रिकॉर्ड और सीवी वैलिडेशन की जांच शामिल है। इन परिणामों पर बात करते हुए श्री अजय त्रेहन, सीईओ एवं संस्थापक, ऑथब्रिज ने कहा, ‘‘वर्कफोर्स फ्रॉड फाइल्स- H1 FY26 स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि हायरिंग से जुड़ी विसंगतियां लगातार एक चुनौती बनी हुई हैं। हायरिंग की प्रक्रिया तेज़ और अधिक डिजिटल होने के बावजूद, बुनियादी पहलुओं जैसे नौकरी की हिस्ट्री, पते और शिक्षा की जांच में गड़बड़ियां देखी लाती हैं। यह कोई छोटी बात नहीं, इसका सीधा असंर संगठन में अनुपालन और भरोसे पर पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार संगठनों को हायरिंग में बैकग्राउंड वैरिफिकेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसे सिर्फ एक बार की जाने वाली औपचारिकता नहीं मानना चाहिए।

व्हाईट-कॉलर हायरिंग की बात करें तो, एम्पलॉयमेन्ट वैरिफिकेशन में 11.15 फीसदी विसंगतियां पाई गईं, इसके बाद पते की जांच में 7.68 फीसदी, शिक्षा की जांच में 4.49 फीसदी, रेफरेन्स चैक में 4.17 फीसदी विसंगतियां पाई गईं। ड्रग स्क्रीनिंग में 1.87 फीसदी और क्रिमिनल रिकॉर्ड चैक में 0.50 फीसदी की विसंगतियां देखी गईं। ऑन-डिमांड वर्कफोर्स में भी इस तरह की विसंगतियां बड़ी संख्या में दर्ज की गईं। पते की जांच में 9.70 फीसदी, पहचान की जांच में 2.53 फीसदी विसंगतियां देखी गईं। वहीं क्रिमिनल रिकॉर्ड में 2.23 फीसदी विसंगतियां इस बात की ओर इशारा करती हैं, कि कस्टमर इंटरैक्शन और फील्ड ऑपरेशन्स से जुड़े रोल्स में सख्त वैरिफिकेशन ज़रूरी है। उद्योग जगत के अनुसार विश्लेषण करें तो सबसे ज़्यादा विसंगतियां आईटी सेक्टर में दर्ज की गईं, जो 12.02 फीसदी रहीं। इसके बाद बैंकिंग एवं बीएफएसआई में 10.23 फीसदी, फार्मा में 11.21 फीसदी, रीटेल में 10.64 फीसदी, टेलीकॉम में 15.42 फीसदी रहीं। एम्पलॉयमेन्ट वैरिफिकेशन की विसंगितयां रीटेल में 16.37 फीसदी, टेलीकॉम में 14.32 फीसदी, बैंकिंग और बीएफएसआई में 13.00 फीसदी और फार्मा में 12.10 फीसदी रहीं।

शिक्षा से सबंधित विसंगतियां- रीटेल में 9.16 फीसदी, टेलीकॉम में 7.80 फीसदी दर्ज की गईं। इसी तरह सीवी वैलिडेशन में आईटी में 12.80 फीसदी, बैंकिंग और बीएफएसआई में 2.91 फीसदी विसंगतियां देखी गईं। हालांकि क्रिमिनल रिकॉर्ड और पहचान से जुड़ी विसंगतियां कम रहीं हैं, लेकिन खासतौर पर उपभोक्ता केन्द्रित सेक्टरों में इन पर ध्यान देना ज़रूरी है। इन सब के बीच ऑथब्रिज अपने टेक्नोलॉजी पर आधारित ट्रस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर कोमजबूत बना रहा है। हम शुरूआती अवस्था में ही जांच शुरू करने की सलाह देते हैं, ताकि अगर बाद में कोई उम्मीदवार वैरिफिकेशन में फेल हो जाता है तो हायरिंग टीम को फिर से पूरी प्रक्रिया शुरू न करनी पड़े। इसके अलावा एक बार बैकग्राउंड चैक पर्याप्त नहीं होता।  समय-समय पर जांच ड्रग टेस्टिंग, कोर्ट रिकॉर्ड चैक, लाईफस्टाइल रिस्क की जांच की जानी चाहिए। इससे डुप्लीकेशन, ऑनबोर्डिंग फ्रिक्शन और लॉन्ग टर्म वैरिफिकेशन ब्लाइंडस्पॉट की संभावना कम हो जाती है। इसके अलावा ऑथब्रिज का लीडरशिप ड्यू डिलिजेन्स फ्रेमवर्क, ऑथलीड सीनियर एवं क्रिटिकल रोल्स के लिए सख्त जांच को सुनिश्चित करता है। जहां विसंगतियां होने पर जोखिम बहुत ज़्यादा हो सकता है। वर्कफोर्स फ्रॉड फाइल्स- H1 FY26 में संरचित, फ्यूचर-रेडी बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के महत्व को दोहराया गया है। जैसे-जैसे संगठन स्पीड और स्केल के बीच तालमेल बनाते हैं, सशक्त, कम्प्लायन्ट और भरोसेमंद वर्कफोर्स के लिए भरोसा, सटीकता और अधिक ज़रूरी होते जाते हैं।

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