फिल्म समीक्षा : चरक (फेयर ऑफ़ फेथ)

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शनिवार 7 मार्च 2026, फिल्म समीक्षक : रहना परवीन (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। फिल्म चरक (फेयर ऑफ़ फेथ) जो सिनेमाघरों में 6 मार्च 2026 को प्रदर्शित हुई है। फिल्म चरक (फेयर ऑफ़ फेथ) वीरवार  5 मार्च 2026 को विशेष प्रेस शो डिलाइट, दिल्ली में मुझे देखने का अवसर मिला।  फिल्म चरक (फेयर ऑफ़ फेथ) में अंजलि पाटिल (लेखिका), साहिदुर रहमान (पुलिस इंस्पेक्टर), सुब्रत दत्ता, शशि भूषण, नवनीश नील, शंखदीप इत्यादि मुख्य कलाकार हैं। फिल्म चरक (फेयर ऑफ़ फेथ) को शीलादित्य मौलिकद्वारा निर्देशित और सुदीप्तो सेन, जयंतीलाल गाड़ा द्वारा निर्मित। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से A प्रमाण-पत्र मिला है जिसका मतलब है कि यह फिल्म 18 साल और उससे ऊपर के के लोग देख सकते हैं। फिल्म की अवधि लगभग 2 घंटे 3 मिनट है। फिल्म की कहानी चरक उत्सव से जुड़ी है जो लगभग एक हजार वर्षों से पूर्वी भारत के राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड के साथ दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी मनाया जाता रहा है। यह उत्सव हर साल लगभग 15 मार्च से 15 मई के बीच आयोजित होता है। चरक उत्सव को मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस समय देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। लेकिन इसी उत्सव का एक दूसरा पक्ष भी है तांत्रिक साधनाएं, अघोरी प्रथाएं और अंधविश्वास। कुछ क्षेत्रों में आज भी बलि जैसी कुप्रथाओं की चर्चा और मान्यताएं देखने को मिलती हैं।

कहानी एक ऐसे गांव की है जो चारों ओर से ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। गांव के अधिकांश लोग बेहद गरीब हैं, लेकिन जीवन की कठिनाइयों के बीच शाम की शराब और ताश के खेल में अपनी कमाई का हिस्सा खर्च कर देते हैं। इसी गांव में चरक उत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं और दूर-दराज से कई अघोरी साधु भी यहां डेरा डाले हुए हैं। गांव के स्कूल में पढ़ने वाले दो बच्चे इस कहानी के अहम किरदार हैं। दूसरी ओर गांव की पुलिस चौकी का इंस्पेक्टर और उसकी लेखिका पत्नी भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। शादी के बारह साल बाद भी उनके यहां संतान नहीं है, और कहीं न कहीं इंस्पेक्टर के मन में चरक उत्सव के दौरान पिता बनने की इच्छा पल रही है। इसी बीच गांव के दो बच्चों का अचानक अपहरण हो जाता है। इसके बाद जो घटनाएं घटती हैं, वह कहानी को एक ऐसे मोड़ पर ले जाती हैं जो दर्शकों को अंदर तक झकझोर देता है। फिल्म की लीड जोड़ी अंजलि पाटिल (लेखिका) और साहिदुर रहमान (पुलिस इंस्पेक्टर) अपने किरदारों में पूरी तरह जमे हुए नजर आते हैं। सहायक कलाकारों में सुब्रत दत्ता, शशि भूषण और नवनीश नील ने भी अपने किरदारों को जीवंत बना दिया है। फिल्म की खास बात यह है कि इसे स्टूडियो सेट पर नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल के एक वास्तविक गांव में शूट किया गया है जिससे इसकी कहानी और माहौल और भी वास्तविक लगते हैं।

अगर आप यह मानते हैं कि अंधविश्वास केवल अनपढ़ या दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक सीमित है तो फिल्म का क्लाइमेक्स आपका यह भ्रम तोड़ देता है। चरक (फेयर ऑफ़ फेथ) एक ऐसी फिल्म है जो मनोरंजन से ज्यादा समाज की कड़वी सच्चाई को सामने लाती है। जो दर्शक सिनेमा हॉल में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि समाज की वास्तविकताओं को देखने की उम्मीद लेकर जाते हैं उनके लिए यह फिल्म जरूर देखने लायक है। इस फिल्म की पूरी कहानी आपको नहीं बता रही हूँ। फिल्म को आप अपने परिवार व् दोस्तों के साथ सिनेमाघरों में जाकर बडे पर्दे पर देखने का अलग मजा आएगा। मैँ इस फिल्म को आम दर्शकों के लिए पांच में से चार स्टार और सस्पेंस, विशेष विषय पर बनी फिल्म पर आधारित फिल्म देखने वाले दर्शकों के लिए साढ़े चार स्टार देती हूँ।

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