श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र, प्रहलाद चरित्र एवं नवधा भक्ति का किया वर्णन

 

शब्दवाणी सम्माचार टीवीमंगलवार 28 अप्रैल 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), गौतमबुद्ध नगर।  ईडब्लूएस पॉकेट 7 सेक्टर-82 में स्वामी रूपनानंद ब्रह्मचारी जी महाराज के सानिध्य में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास नीलांशु दास जी महाराज  ने प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए ध्रुव चरित्र , प्रहलाद चरित्र एवं नवधा भक्ति की कथा सुनाई। राजा उत्तानपाद के दो रानियां हैं। बड़ी रानी का नाम सुनीति है और छोटी का नाम सुरुचि है। राजा छोटी रानी और उसके पुत्र को अधिक प्यार करते हैं। एक बार ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठ जाते हैं तो छोटी रानी सुरुचि उसको गोद से उतार देती है। ध्रुव रोकर मां के पास पहुंचते हैं और सारी बात बताते हैं। मां ने समझाया तब बाल ध्रुव के मन में वैराग्य उत्पन्न हो जाता है और वह तपस्या के लिए वन में चले जाते हैं। रास्ते में नारद ऋषि मिलते हैं और समझाते हैं जब ध्रुव नहीं मानते हैं तब वह द्वादश मंत्र देते हैं। ध्रुव कठिन तपस्या करते हैं ।भगवान उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर वर मांगने को कहते हैं। ध्रुव जी भगवान से उनकी भक्ति एवं राजा के सिंघासन से ऊंचा स्थान मांगते हैं। कथा व्यास नीलांशु दास जी महाराज कहते हैं कि जब व्यक्ति सांसारिक विषयों का परित्याग कर प्रभु की शरण में जाता है तो वह सर्वोच्च स्थान को प्राप्त कर लेता है।  आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राघवेंद्र दुबे ने बताया कि 28 अप्रैल को समुद्र मंथन, राम जन्म, कृष्ण जन्म, नंदोत्सव आदि कथाओं का वर्णन व्यास जी द्वारा किया जाएगा। कथा प्रतिदिन सायं 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक होती है। इस मौके पर संयोजक संजीव ढाली, देवमणि शुक्ल,  रमेश शर्मा, गोरे लाल, रवि राघव, संजय पांडेय, सर्वेश तिवारी, विष्णु शर्मा, नीरज शर्मा, टोनी कपूर, रमेश वर्मा, निर्मल बिस्वास, गोपाल पाल, असीम मजूमदार, संतोष बिस्वास, मखन बसु, बाबू सरकार, कनाई लाल, असित बाघ, गोविंद बिस्वास, संजय हालदार, तुषार, प्रेम जी, टोनी ढाली , सुखदेव, शुभमय, विश्वजीत सरकार, अनिमेष मंडल, सहित भारी संख्या में सेक्टर वासी मौजूद रहे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया से निलंबित पूर्व अध्यक्ष एस.कुमार ने गैर कानूनी तरिके से किया सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया का विस्तार, जल्द होगी कानूनी कार्यवाही

असंगठित श्रमिकों के अधिकारों पर राष्ट्रीय मंथन