आशीर्वाद बाय अलियाक्सिस ने देश के गुमनाम नायकों को दिया सम्मान

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, सोमवार 16 मार्च 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। आशीर्वाद बाय अलियाक्सिस, जो भारत में प्लंबिंग और पानी से जुड़े समाधान देने वाली प्रमुख कंपनी है, ने वर्ल्ड प्लंबिंग डे के अवसर पर एक भावुक और दिल को छू लेने वाली फिल्म जारी की है। इस फिल्म के जरिए देश के प्लंबर समुदाय को सम्मान दिया गया है। प्लंबर वे लोग हैं जो हमारे घरों, अस्पतालों, निर्माण स्थलों, रेस्तरां और कई जरूरी इमारतों में पानी की सप्लाई को सुचारु बनाए रखते हैं। हमारे रोज़मर्रा के जीवन में उनकी बड़ी भूमिका होती है, लेकिन अक्सर उनके काम पर ध्यान नहीं दिया जाता। यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि उस समुदाय के प्रति आभार व्यक्त करने की कोशिश है जो पानी जैसे जीवन के सबसे जरूरी संसाधन को हमारे घरों तक पहुंचाता है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में मशहूर संगीतकार बिक्रम घोष का संगीत है, जबकि इसका कॉन्सेप्ट और स्क्रिप्ट लियो इंडिया ने तैयार की है। यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ एक अहम संदेश भी देती है। इसमें उन लोगों की कहानी दिखाई गई है जिनके बारे में अक्सर चर्चा नहीं होती। इस बार फिल्म के हीरो कोई फिल्म स्टार या खिलाड़ी नहीं, बल्कि वे लाखों प्लंबर हैं जो हमारे जीवन को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में प्लंबिंग क्षेत्र से लाखों लोग जुड़े हुए हैं, जो देश की पानी की व्यवस्था को डिजाइन करते हैं, उसे लगाते हैं और उसकी देखभाल करते हैं। प्लंबिंग व्यवस्था से गहराई से जुड़ी कंपनी आशीर्वाद बाय अलियाक्सिस इस पहल को लोगों की सोच बदलने और प्लंबर्स को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा मानने की दिशा में एक कदम मानती है। इस फिल्म के बारे में बात करते हुए आशीर्वाद बाय अलियाक्सिस के चीफ मार्केटिंग एंड स्ट्रैटेजी ऑफिसर अमित घेजी ने कहा, “लोग हमें एक ऐसी कंपनी के रूप में जानते हैं जो अच्छी गुणवत्ता की पाइप बनाती है, और यह सही भी है। लेकिन पानी सिर्फ पाइप से नहीं बहता। इसके पीछे एक कुशल और मेहनती वर्कफोर्स होती है, जिसे अक्सर वह सम्मान नहीं मिलता जिसकी वह हकदार है। प्लंबर जीवन के सबसे जरूरी संसाधन पानी को हमारे घरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। यह फिल्म उसी अनदेखे सच की ओर ध्यान दिलाती है।

फिल्म की शुरुआत एक क्लासरूम से होती है, जहां एक छोटे बच्चे से उसके पिता के पेशे के बारे में बोलने के लिए कहा जाता है। बच्चा झिझकता है। तभी उसके पिता, जो एक प्लंबर हैं, आगे आते हैं और एक कविता सुनाते हैं। उस कविता में एक सरल लेकिन गहरा सवाल पूछा जाता है—  “कभी सोचा, पानी कैसे आया? यह सवाल फिल्म में कई जगह गूंजता है अस्पतालों, निर्माण स्थलों, रेस्तरां की रसोई, दूर-दराज के गांवों और यहां तक कि एक स्पेस सेंटर तक, जहां रॉकेट लॉन्च की तैयारी चल रही है। हर जगह एक ही बात सामने आती है—इन सबके पीछे किसी न किसी प्लंबर का योगदान है। फिल्म के अंत में एक सहपाठी कहता है अखिल के पापा तो सुपरहीरो हैं।” यह संवाद इस संदेश को मजबूत करता है कि प्लंबर आधुनिक पानी की व्यवस्था के पीछे के असली लेकिन अनदेखे नायक हैं। फिल्म की अंतिम पंक्ति अभियान का मुख्य संदेश देती है— “पानी को देश की हर गली, हर घर और हर कोने तक पहुंचाना आसान नहीं है। वक्त आ गया है कि हम प्लंबर्स को उनका सही सम्मान दें।

फिल्म का निर्देशन अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने किया है, जो राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार हैं और 'पिंक'  जैसी चर्चित हिंदी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, आम लोगों की कहानियों को संवेदनशील तरीके से दिखाने के लिए मशहूर हैं। इस ब्रांड फिल्म में भी उन्होंने उसी भावनात्मक गहराई को पेश किया है। प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने कहा बहुत कम ब्रांड फिल्में ऐसी होती हैं जिनमें आम लोग हीरो बनते हैं। इस कहानी ने मुझे इसलिए आकर्षित किया क्योंकि इसमें हमें एक प्लंबर की नजर से दुनिया देखने का मौका मिलता है। हमने एक ऐसे व्यक्ति की कहानी दिखाई है जिसका काम जीवन को आसान बनाता है, लेकिन जिसकी अक्सर सराहना नहीं होती। पिता और बेटे के बीच की भावनाओं को दिखाना इस कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। इस अभियान का कॉन्सेप्ट और स्क्रिप्ट लियो ने तैयार की है। इसमें पिता-पुत्र के रिश्ते के जरिए इस पेशे से जुड़े गर्व और सम्मान को दिखाया गया है।

लियो के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव रक्षित ने कहा हम आम लोगों तक उस समुदाय की कहानी पहुंचाना चाहते थे जिसकी बहुत कम चर्चा होती है, लेकिन जो पानी जैसी रोज़मर्रा की जरूरी चीज में बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए हमने कहानी को पिता-पुत्र के रिश्ते के इर्द-गिर्द बुना, ताकि पेशेवर गर्व और भावनात्मक जुड़ाव दोनों सामने आ सकें। पानी की पूरी व्यवस्था को चलाने में इस समुदाय की भूमिका बहुत अहम है। यह अभियान आशीर्वाद बाय अलियाक्सिस की ब्रांड फिलॉसफी “इस पाइप में साइंस है” से भी जुड़ा है, जो आधुनिक प्लंबिंग सिस्टम के पीछे मौजूद इंजीनियरिंग और इनोवेशन को दर्शाती है। इस फिल्म के जरिए कंपनी उम्मीद करती है कि उन लोगों के बारे में एक बड़ी बातचीत शुरू होगी जो देश की हर गली और हर घर तक पानी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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