एनएसई की लोकेशन घोटाला में दिल्ली कोर्ट ने 44 आरोपियों के खिलाफ लिया संज्ञान
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, सोमवार 11 मई 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष CBI अदालत ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को-लोकेशन घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए पूर्व NSE प्रबंध निदेशक और CEO चित्रा रामकृष्ण समेत 44 आरोपियों को समन जारी किया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 18 और 20 मई 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है। विशेष न्यायाधीश एम.पी. सिंह ने यह आदेश पारित किया। अदालत ने CBI द्वारा दाखिल 300 से अधिक पन्नों की पूरक चार्जशीट का अवलोकन करने के बाद कहा कि कई स्टॉक ब्रोकरों, कंपनी निदेशकों, ट्रेडिंग संस्थाओं और पूर्व NSE अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इन पर वर्ष 2010 से 2014 के बीच NSE के को-लोकेशन सर्वरों तक अनुचित और विशेष पहुंच हासिल करने का आरोप है। CBI के अनुसार, कुछ ब्रोकर बार-बार NSE के तथाकथित “सेकेंडरी सर्वर” से जुड़ते थे, जिससे उन्हें अन्य बाजार प्रतिभागियों की तुलना में तेज गति से मार्केट डेटा फीड मिलती थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इससे चुनिंदा फर्मों को हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में अनुचित स्पीड एडवांटेज मिला और उन्होंने बाजार की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित करते हुए अवैध लाभ कमाया।
पूर्व NSE प्रमुख चित्रा रामकृष्ण को इस मामले में प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया है। CBI का आरोप है कि उनके संयुक्त प्रबंध निदेशक और बाद में प्रबंध निदेशक रहने के दौरान को-लोकेशन आर्किटेक्चर में लोड बैलेंसर और रैंडमाइजर जैसे जरूरी सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए, जबकि सिस्टम की कमजोरियों की जानकारी पहले से मौजूद थी। एजेंसी के अनुसार, इन सुरक्षा उपायों की अनुपस्थिति ने कुछ ट्रेडिंग सदस्यों को बार-बार सिस्टम का फायदा उठाने का अवसर दिया। पूर्व NSE अधिकारी महेश एम. सोपारकर और देव प्रसाद सिंह को भी मामले में समन जारी किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने सर्वर एक्सेस पैटर्न में बार-बार सामने आ रहे उल्लंघनों और चेतावनियों के बावजूद अनुपालन सुनिश्चित करने या सुधारात्मक कदम उठाने में विफलता दिखाई। चार्जशीट में SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज, PACE स्टॉक ब्रोकिंग सर्विसेज, टॉवर रिसर्च कैपिटल मार्केट्स इंडिया, PRB सिक्योरिटीज, क्वाडआई सिक्योरिटीज, मारवाड़ी शेयर्स एंड फाइनेंस और शेयर इंडिया सिक्योरिटीज सहित कई ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडिंग फर्मों के नाम शामिल हैं। CBI ने को-लोकेशन व्यवस्था के जरिए विभिन्न फर्मों द्वारा अर्जित कथित अवैध लाभ का आकलन करने के लिए इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) की रिपोर्ट पर भरोसा किया है। आरोपियों को भारतीय दंड संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत समन किया गया है। इनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और कंप्यूटर सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच जैसे आरोप शामिल हैं।





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