फिल्म समीक्षा : मैं वापस आऊंगा
प्रेम, बिछड़न और उम्मीद का संवेदनशील सिनेमाई सफर
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, रविवार 14 जून 2026, फिल्म समीक्षक : रेहाना परवीन (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। फिल्म मैं वापस आऊंगा बुधवार 10 जून 2026 को विशेष प्रेस शो डिलाइट डायमंड, दिल्ली में मुझे देखने का अवसर मिला। फिल्म मैं वापस आऊंगा में दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवरी, नसीरुद्दीन शाह इत्यादि मुख्य कलाकार हैं। फिल्म मैं वापस आऊंगा का निर्देशन इम्तियाज अली, संगीत ए.आर.रहमान ने दिया है। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से UA 16+ प्रमाण पत्र दिया गया है। इसका अर्थ है कि 16 वर्ष से कम आयु के दर्शकों को अभिभावकों की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी जाती है। फिल्म की अवधि लगभग 2 घंटे 46 मिनट (186 मिनट) है। फिल्म मैं वापस आऊंगा सिनेमा घरों में शुक्रवार 12 जून 2026 को सिनेमा घरों में प्रदर्शित हुई है। निर्देशक इम्तियाज अली अपनी फिल्मों में रिश्तों की गहराई और भावनाओं की बारीकियों को पर्दे पर उतारने के लिए जाने जाते हैं। उनकी नई फिल्म भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। यह केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि यादों, इंतजार, बिछड़न और लौट आने की उम्मीद का भावनात्मक दस्तावेज है। इम्तियाज अली की मैं वापस आऊंगा प्रेम, प्रतीक्षा और पुनर्मिलन की ऐसी भावनात्मक दास्तान है जो दर्शकों के दिलों में लंबे समय तक गूंजती रहेगी। इस फिल्म के माध्यम से इम्तियाज अली ने जिसका अपना कोई प्यारा, प्यारा स्थान या प्यारी वस्तु को खोता है तो उसका दर्द केवल वही जानता है बाकी लोग तो उस दर्द को हादसा मानकर आगे निकल जाते है इसी दर्द को फिल्म की कहानी दर्शकों को भावनाओं के ऐसे सफर पर ले जाती है जहां प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं बल्कि हर परिस्थिति में एक-दूसरे के लिए उम्मीद बनाए रखने का प्रतीक बन जाता है।
फिल्म का कथानक भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि से भी जुड़ता है जो इसकी संवेदनात्मक गहराई को और बढ़ा देता है। अभिनय की बात करें तो दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवरी और नसीरुद्दीन शाह ने अपने-अपने किरदारों में जान डाल दी है। विशेष रूप से नसीरुद्दीन शाह का सधा हुआ अभिनय और दिलजीत की भावनात्मक अभिव्यक्ति फिल्म को मजबूती प्रदान करती है। फिल्म का संगीत महान संगीतकार ए. आर. रहमान ने दिया है जो कहानी के भावनात्मक प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। गीत और बैकग्राउंड स्कोर लंबे समय तक दर्शकों के मन में बने रहते हैं। फिल्म कुछ हिस्सों में गति थोड़ी धीमी महसूस होती है। लंबी अवधि के कारण कुछ दर्शकों को फिल्म खिंची हुई लग सकती है। फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय दो अलग-अलग धर्म सिख और मुस्लिम प्रेमी कहानी के नायक भारत आने के कारण इस उम्मीद के साथ फिर मिलेंगे बिछड़ जाते है। 75 वर्षों के बाद अंतिम सांस तक मिलने की आशा को पूरा करने के लिए उसका पोता प्रयास करता है। फिल्म देखने का मजा खराब ना हो इसलिए पूरी कहानी आपको नहीं बता रही हूँ कियोंकि फिल्म को आप अपने दोस्तों के साथ सिनेमाघरों में जाकर बड़े पर्दे पर देखने का अलग मजा आएगा। मैँ इस फिल्म को पांच में से साढ़े तीन स्टार देती हूँ और जो दर्शक संवेदनशील, गहरे और दिल को छू लेने वाले सिनेमा को पसंद करते हैं उनके लिए पांच में से चार स्टार देती हूँ।






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