इंडियाफर्स्ट लाइफ ने विज्ञापन फिल्म एक शाम पापा के नाम किया जारी
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, मंगलवार 23 जून 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (इंडियाफर्स्ट लाइफ) ने फादर्स डे के अवसर पर एक शाम पापा के नाम नामक एक भावना से भरा केंपेन प्रारंभ किया है। यह अभियान बच्चों को एक पल ठहरकर अपने पिता को केवल परिवार का भरण-पोषण करने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में जानने और समझने के लिए प्रेरित करता है। द वूम्ब' द्वारा परिकल्पित और गुड मॉर्निंग फिल्म्स द्वारा निर्मित ‘एक शाम पापा के नाम’ एक मार्मिक फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म का निर्देशन शुजात सौदागर ने किया है। इसमें अभिनेता अविनाश तिवारी नजर आते हैं। पीढ़ियों से पिता अपने प्रेम को जिम्मेदारियों के जरिए व्यक्त करते रहे हैं। परिवार की सुरक्षा, पालन-पोषण और उनकी जरूरतों को अपनी प्राथमिकता बनाकर। लेकिन इन जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते उनके अपने सपने, कहानियां, डर और भावनाएं अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। ‘एक शाम पापा के नाम’ इसी खामोश दूरी को उजागर करता है। बच्चों को उस व्यक्ति को जानने के लिए प्रेरित करता है जो जिम्मेदारियों के पीछे छिपा हुआ है। यह अभियान इंडियाफर्स्ट लाइफ के ब्रांड वादे ‘जिम्मेदारियां हमसे बांटिए, हल्का लगेगा’ पर आधारित है और परिवार के मुख्य जिम्मेदार सदस्य का बोझ कम करने की ब्रांड की यात्रा का एक और कदम है। एक ऐसे ब्रांड के रूप में जो पिता को प्राथमिकता देता है। इंडियाफर्स्ट लाइफ बच्चों से अपील करता है कि वे भी अपने पिता को प्राथमिकता दें। उन्हें अपनी कहानियां साझा करने का अवसर दें। भावनात्मक रूप से हल्का महसूस कराने में मदद करें।
इंडियाफर्स्ट लाइफ के मुख्य मार्केटिंग अधिकारी (सीएमओ) सुभंकर सेनगुप्ता ने कहा इंडियाफर्स्ट लाइफ में हमारा मानना है कि सुरक्षा केवल वित्तीय संरक्षण तक सीमित नहीं है। यह उन रिश्तों की मजबूती से भी जुड़ी है जिन्हें हम संजोते हैं। पिता अक्सर हमारे जीवन के मौन स्तंभ होते हैं। उन्हें इस आधार पर पहचाना जाता है कि वे क्या करते हैं, न कि वे वास्तव में कौन हैं। समय के साथ यही उनकी पहचान बन जाती है। ‘एक शाम पापा के नाम’ की प्रभावशाली कहानी के माध्यम से हम परिवारों को ठहरने, फिर से जुड़ने और अपने पिता को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं, ताकि वे भी खुद को हल्का महसूस कर सकें। क्योंकि कई बार जो पल हम खो देते हैं, वही वे कहानियां होती हैं जिन्हें हम कभी सुन नहीं पाते।
द वूम्ब की सीनियर क्रिएटिव पार्टनर गुंजन गाबा ने कहा फादर्स डे पर कई ब्रांड पिता की महिमा का गुणगान करते हैं। लेकिन ऐसे कई संदेश लोगों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाते। एक ऐसे ब्रांड के रूप में जो परिवार की जिम्मेदारियां उठाने वाले व्यक्ति के साथ खड़ा है। हमने एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य से शुरुआत की। हममें से अधिकांश लोग अपने पिता को सिर्फ एक पिता के रूप में जानते हैं। वे अक्सर सबसे पहले घर से निकलते हैं। सबसे आखिर में लौटते हैं। वे पूरी जिंदगी अपने परिवार के लिए समर्पित रहते हैं। लेकिन एक व्यक्ति के रूप में अपने ही प्रियजनों के लिए अनजाने बने रहते हैं। हमने इस कहानी को पछतावे के माध्यम से कहने का फैसला किया। क्योंकि एक व्यक्ति का पछतावा कई लोगों के लिए एक संदेश बन सकता है,बहुत देर होने का इंतजार मत कीजिए। गुड मॉर्निंग फिल्म्स के फिल्म निर्देशक शुजात सौदागर ने कहा यादों के सवाल बन जाने का इंतजार मत कीजिए। अपने पिता कहलाने वाले उस व्यक्ति को जानने के लिए समय न निकाल पाने का पछतावा ही वह भावना थी जिसने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया। हमारा प्रयास एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने का था जिसकी भावनात्मक नींव बेहद सशक्त और स्पष्ट हो। "द वूम्ब' और इंडियाफर्स्ट लाइफ की टीमों के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा। साथ ही अविनाश तिवारी के साथ फिर से काम करने का अवसर मिला। जिन्होंने अपने प्रभावशाली अभिनय के जरिए फिल्म की भावनात्मक संवेदनाओं को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया।





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