बल्‍लभगढ़ की श्रमिक आपूर्ति करने वाली कंपनियों पर करोड़ों के PF, ESI एवं GST घोटाले के आरोप

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, मंगलवार 9 जून 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), बल्‍लभगढ़/फरीदाबाद। बल्‍लभगढ़ क्षेत्र में श्रमिक आपूर्ति का कार्य करने वाले तथाकथित बालाजी ग्रुप से जुड़ी विभिन्न कंपनियों के संचालकों पर श्रमिकों के PF, ESI एवं GST में बड़े स्तर पर अनियमितताओं और घोटालों के गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री योगेश कुमार निवासी फरीदाबाद, श्री दीपांशु कुमार पुत्र श्री योगेश कुमार, श्री मनोज गुलाटी पुत्र श्री कृष्ण गोपाल गुलाटी निवासी बल्‍लभगढ़ तथा श्री मोहन सिंह पटवाल पुत्र श्री उम्मेद सिंह पटवाल द्वारा संचालित कंपनियां बालाजी रिक्रूटमेंट सर्विसेज, बालाजी मैनपावर रिक्रूटमेंट प्राइवेट लिमिटेड, बालाजी एसोसिएट्स, बालाजी इंडस्ट्रियल सर्विसेज एवं बालाजी इंडस्ट्रियल मैनपावर प्राइवेट लिमिटेड जैसी विभिन्न निर्माण सामग्री बनाने वाली कंपनियों में श्रमिक आपूर्ति का कार्य करती हैं।

सूत्रों एवं प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोप है कि उक्त कंपनियां श्रमिकों का PF एवं ESI नियमित रूप से जमा नहीं करतीं तथा मजदूरों के अधिकारों से जुड़े धन का गबन कर रही हैं। आरोप यह भी है कि ये कंपनियां केवल लगभग 25% श्रमिकों का ही PF एवं ESI जमा करती हैं तथा उन्हीं कर्मचारियों के ECR चालान विभिन्न कंपनियों को प्रस्तुत कर शेष 75% श्रमिकों के हिस्से का पैसा हड़प लेती हैं। जानकारी के अनुसार, यह मामला उस समय सामने आया जब रुद्रपुर, उत्तराखंड स्थित Maini Scaffold Systems तथा पूर्व में पलवल स्थित मैनी कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के पार्टनर/डायरेक्टर श्री अजय मैनी एवं अन्य सहयोगियों ने संबंधित कंपनियों से PF जमा करने के प्रमाण मांगे। आरोप है कि इसके बाद राजनीतिक दबाव बनाकर उन्हीं के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवा दिया गया। सूत्रों के अनुसार, उक्त कंपनियों द्वारा केवल Maini समूह के साथ ही करोड़ों रुपये के PF एवं ESI में अनियमितता तथा लगभग ₹1.37 करोड़ के GST घोटाले का मामला सामने आया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस प्रकार के घोटाले विभिन्न कंपनियों में श्रमिक आपूर्ति के दौरान किए गए हैं और कुल राशि लगभग ₹100 करोड़ तक हो सकती है। मजदूर संगठनों एवं संबंधित पक्षों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि श्रमिकों के भविष्य एवं उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके।

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