उत्सव ने एटॉमिक कैपिटल के नेतृत्व में सीरीज़ ए के लिए जुटाई रु 36 करोड़

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 28 अगस्त 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। भारतीय जीवन में आस्था का सबसे गहरा महत्व है। देश में लगभग 6,50,000 मंदिर हैं - यानी हर 5 वर्ग किलोमीटर की दूरी पर तकरीबन एक मंदिर - फिर भी इनके आस-पास का इकोसिस्टम ऑफ़लाइन, बिखरा हुआ और अव्यवस्थित है। पूजा बुक करने से लेकर प्रसाद पाने तक, श्रद्धालुओं को आज भी किस्मत, दूरी और लोगों की बातों पर ही निर्भर करना पड़ता है। रोज़ाना में ज़बरदस्त मांग और लगभग न के बराबर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के बीच का यह अंतर भारत के सबसे बड़े अवसरों में से एक है जिनका अभी तक पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ है। भारत के रिलीजन-टेक और पूजा बुकिंग प्लेटफ़ॉर्म, उत्सव ने एटॉमिक कैपिटल के नेतृत्व में सीरीज़ ए फ़ंडिंग में रु 36 करोड़ की राशि जुटाई है। इसमें मौजूदा निवेशकों इंडिया कोशेंट और इक्वानिमिटी इन्वेस्टमेंट्स ने भी निवेश किया है, इस तरह जुटाई गई कुल राशि रु36 करोड़ हो गई है। इस धनराशि का उपयोग प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी, विकास एवं टीम के विस्तार के लिए किया जाएगा, क्योंकि ‘उत्सव’ देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं, मंदिरों और रीति-रिवाजों को जोड़ने वाला एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बना रहा है। प्रोडक्ट-मार्केट फिट और अच्छे यूनिट इकोनॉमिक्स के बाद यह फंडिंग राउंड पूरा हुआ है।  फरवरी 2025 में रु6.35 करोड़ के राउंड के बाद से राजस्व में 8 गुना बढ़ोतरी हुई है और अब यह प्लेटफ़ॉर्म हर महीने 2.5 लाख ऑर्डर पूरे करता है। आस्था का सिलसिला जारी रहता हैः अमावस्या, पूर्णिमा, एकादशी, संक्रांति, श्रावण और नवरात्रि साल भर एक लय बनाए रखते हैं। लेकिन जगह की दूरी इस लय को तोड़ देती है और अनुमान के मुताबिक 40 करोड़ श्रद्धालु साल में सिर्फ़ एक बार तीर्थयात्रा करते हैं, और कई लोगों के लिए किसी खास मंदिर में दर्शन करना जीवन में एक बार पूरी होने वाली इच्छा ही बनी रहती है। इसी दूरी को कम करने के लिए ‘उत्सव’ को डिज़ाइन किया गया है।

उत्सव इस इकोसिस्टम के लिए टेक्नोलॉजी का निर्माण कर रहा है। यह भक्तों को एक ऐसा अनुभव देता है जिसका वे बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। दुबई में रहने वाला कोई परिवार किसी प्रतिष्ठित मंदिर में पूजा बुक कर सकता है, किसी वेरिफ़ाइड पुजारी से जुड़ सकता है, संकल्प में अपना नाम और गोत्र सुन सकता है, पूजा-विधि को लाइव देख सकता है और कुछ दिनों बाद अपने घर पर ही पवित्र प्रसाद पा सकता है। इस तरह पूजा एवं पुजारी से सलाह लेने से लेकर प्रसाद एवं खास तौर पर अपने लिए की जाने वाली पूजा-विधियों तक, सभी धार्मिक ज़रूरतें एक ही भरोसेमंद प्लेटफॉर्म के ज़रिए पूरी हो जाती हैं। आने वाले समय में नई सुविधाएँ जुड़ने के साथ भक्तों के लिए यह अनुभव और भी बेहतर होता जाएगा, साथ ही मंदिर अपनी भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे तक पहुँच पाएँगे।  सौरजीत बासु, अंकिता डे और प्रजता सामंत द्वारा शुरू किया गया ‘उत्सव’, स्केलेबल टेक्नोलॉजी और संचालन के बेहतर तरीकों को आस्था, पूजा-विधि और भरोसे की गहरी समझ के साथ जोड़ता है। कंपनी मंदिरों के पुजारियों, विद्वानों और आचार्यों के साथ मिलकर सुनिश्चित करती है कि प्लेटफ़ॉर्म पर होने वाली हर पूजा-विधि को वे लोग ही तय करें और मंज़ूरी दें जो शास्त्रों के सबसे अच्छे जानकार हैं। उनकी सोच एकदम स्पष्ट हैः टेक्नोलॉजी भक्ति की जगह न ले, इसके बजाए भक्तों तक पहुंच आसान बनाए। एटॉमिक कैपिटल के पार्टनर अपूर्व गौतम ने कहा भारत की डिवोशनल इकॉनमी (आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी अर्थव्यवस्था) बहुत बड़ी है, इसमें लगातार गतिविधियां होती रहती है। यह हर क्षेत्र, हर आय वर्ग और हर पीढ़ी तक फैली है, इसके बावजूद यह आज भी टेक्नोलॉजी से अछूती है। उत्सव इसे टेक्नोलॉजी से जोड़कर व्यवस्थित बनाना चाहता है। टीम के काम करने के तरीके ने हमें सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है। इस टीम ने कम लागत में बड़े स्तर पर बिज़नेस खड़ा किया है और ग्राहक बार-बार इनके पास आते हैं। जो इस बात का़ संकेत है कि मांग भी है और बिज़नेस मॉडल भी मज़बूत है; ऐसे में हमें इस क्षेत्र में विकास की ढेरों संभावनाएं दिखाई देती हैं।


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