फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला में मरीज के हृदय में जन्म से मौजूद बड़े आकार के छेद को किया बंद

मिनीमॅली इन्वेसिव रोबोट-एसिस्टेड सर्जरी ने मरीज के हृदय में जन्म से मौजूद बड़े आकार के छेद को बंद किया, इस प्रक्रिया ने पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी की जरूरत को खत्म किया और इस युवा मरीज की कम समय में रिकवरी को संभव बनाया 

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 18 सितम्बर 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के डॉक्टरों ने 26-वर्षीय मर्चेंट नेवी ऑफिसर के हृदय में मौजूद जन्मजात विकार को रोबोट-एसिस्टेड सर्जरी से दूर कर उन्हें मर्चेंट नेवी में कॅरियर बनाने का अपना सपना साकार करने का अवसर उपलब्ध कराया है। इस प्रक्रिया को डॉ ऋत्विक राज भुयान, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियो थोरेसिक वास्क्युलर सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, ओखला के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने डॉ निशीथ चंद्रा, प्रिंसीपल डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, ओखला के साथ मिलकर सफलतापूर्वक पूरा किया। उक्त 26-वर्षीय मरीज के मर्चेंट नेवी से जुड़ने के बाद रूटीन हेल्थ चेक-अप के दौरान इस जन्मजात हृदय विकार का पता चला था। हालांकि मर्चेंट नेवी ज्वॉइन करने से पहले भी उनकी जरूरी मेडिकल स्क्रीनिंग की गई थी, लेकिन ईसीजी जांच के दौरान उनकी इस कंडीशन का पता नहीं चला था। इसके बाद, एक अन्य रूटीन स्वास्थ्य जांच के दौरान इकोकार्डियोग्राम (इको) से उनके हृदय में बड़े आकार के एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) का पता चला था – यह हृदय के दोनों ऊपरी कक्षों (चैंबर) के बीच की दीवार में जन्मजात 

छेद होता है। इस विकार की वजह से फेफड़ों में अतिरिक्त रक्तप्रवाह होता है और यह हृदय के दाएं हिस्से पर भी अधिक दबाव बनाता है। इस डायग्नॉसिस के बाद मरीज को मर्चेंट नेवी सर्विस के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया, जो उनके कॅरियर और महत्वाकांक्षाओं पर कुठाराघात था। ऐसे में सही उपचार ही उन्हें अपने मनपसंद कॅरियर में वापसी का मौका दिला सकता था। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला में उनकी जांच के बाद कार्डियाक टीम ने उनके हृदय में मौजूद छेद को भरने के लिए रोबोट-एसिस्टेड मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया से उनका उपचार करने का फैसला किया। दा विंची Xi रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की मदद से, डॉक्टरों ने छोटे आकार के पोर्ट से होते हुए मरीज के हृदय तक पहुंच बनायी और बेहद मामूली चीरा लगाया, इस तरह से उनकी ब्रेस्टबोन को खोलकर उपचार करने की पारंपरिक प्रक्रिया से बचा गया। उन्नत रोबोटिक सिस्टम की मदद से, डॉक्टरों ने एक स्पेश्यलाइज़्ड पैच का उपयोग करते हुए मरीज के हृदय के छेद को बंद किया। यह सर्जरी बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरी की गई, और उसी दिन मरीज को वेंटिलेटर से भी हटा लिया गया। मरीज की रिकवरी सामान्य ढंग से हुई और उन्हें स्थिर तथा स्वस्थ अवस्था में, हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 

डॉक्टरों की टीम का आभार व्यक्त करते हुए, उक्त मरीज ने कहा मैं हृदय में इस विकार के साथ जन्मा था, लेकिन मुझे पहले कभी कोई बड़ी परेशानी नहीं हुई और मैं हमेशा से काफी एक्टिव रहता आया हूं और अपने कॅरियर को लेकर काफी समर्पित रहा हूं। लेकिन जब मुझे पता चला कि मेरे हृदय में जन्मजात विकार है, तो यह सूचना मेरे लिए काफी परेशानी का कारण बनी, और खासतौर से इसलिए भी क्योंकि समुंद की लहरों पर अपना कॅरियर बनाने का मेरा सपना बिखर रहा था। तब फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला में इस सफल रोबोट-एसिस्टेड सर्जरी ने मुझे मजबूत भरोसा दिया और नई उम्मीद से भरा। मैं अपने डॉक्टरों और अस्पताल की पूरी मेडिकल टीम का आभारी हूं जिन्होंने मुझे जिंदगी में आगे बढ़ने और मर्चेंट नेवी में काम करने का अपना सपना जारी रखने का हौंसला दिया है।”

 इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ ऋत्विक राज भुयान, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियो थोरेसिक वास्क्युलर सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, ओखला ने कहा, “एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) कोई असामान्य कंडीशन नहीं है, लेकिन इस युवक के हृदय में इतने बड़े आकार का छेद होने से काफी गंभीर परिणाम भी हो सकते थे। उक्त मामले में मरीज का सपना मर्चेंट नेवी में अपना कॅरियर बनाने का था लेकिन एएसडी की वजह से वह इस अवसर का लाभ नहीं उठा पा रहा था। इसके कारण मरीज पर मनोवैज्ञानिक रूप से दबाव बढ़ सकता था और यह एंग्जाइटी का कारण भी था, जबकि वह पूरी तरह से फिट दिखायी देते थे और अपने प्रोफेशनल कॅरियर को लेकर काफी उत्साहित थे। चूंकि यह विकार काफी बड़ा था और डिवाइस से बंद करने लायक नहीं था, ऐसे में हमने रोबोटिक-एसिस्टेड सर्जिकल प्रक्रिया की मदद लेने का फैसला किया। इस प्रक्रिया ने हमें बिना पारंपरिक ओपन सर्जरी किए ही मरीज का विकार दूर करने के साथ-साथ शीघ्र रिकवरी में मदद पहुंचायी और मरीज भी जल्द से जल्द अपने काम पर लौटने के लिए तैयार हो सके।

डॉ निशीथ चंद्रा, प्रिंसीपल डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, ओखला ने कहा हालांकि हृदय के कई विकारों को ग्रोइन की धमनियों में से कैथेटर-आधारित डिवाइस को गुजारकर बंद किया जा सकता है, लेकिन इस मामले में विकार बड़ा और उसकी संरचना (एनेटॅमी) इतनी अलग प्रकार की थी, कि उसे डिवाइस से बंद नहीं किया जा सकता था। पारंपरिक तौर पर, सर्जिकल एएसडी क्लोज़र को ओपन-हार्ट सर्जरी से किया जाता है जिसमें ब्रेस्टबोन से होकर हृदय तक पहुंचा जाता है। लेकिन उक्त मरीज की उम्र, और उनकी सेहत के मद्देनज़र, तथा उनकी प्रोफेशनल आकांक्षाओं को देखते हुए, टीम ने उनकी रोबोटिक-एसिस्टेड सर्जरी करने का फैसला किया। डॉ विक्रम अग्रवाल, रीजनल डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, ओखला ने कहा फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला में, हमारा जोर क्लीनिकल विशेषज्ञता और एडवांस टेक्नोलॉजी से मेल से मरीजों के लिए कारगर तथा मिनीमॅली इन्वेसिव उपचार विकल्पों को मुहैया कराने पर रहता है। इस मामले ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि किस तरह से रोबोटिक-एसिस्टेड कार्डियाक सर्जरी से युवा मरीजों की रिकवरी तेजी से होती है, खासतौर से उस स्थिति में यह और भी जरूरी होता है जब उन्हें जल्द से जल्द अपनी सामान्य प्रोफेशनल और पर्सनल जिंदगी में वापसी करनी होती है। इस जटिल एएसडी को सफलतापूर्वक पूरा कर हमने अपनी कार्डियाक सर्जिकल टीम की दक्षता और मिनीमॅली इन्वेसिव कार्डियाक केयर को बेहतर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है।


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