दिल्ली राज्य सहकारी बैंक किसानों और कारीगरों के वित्तपोषण के क्षेत्र में करेगा विस्तार

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, मंगलवार 11 अगस्त 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सहकारी बैंकिंग तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, नाबार्ड, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने 10 अगस्त 2026 को दिल्ली राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (डीएसटीसीबी) के शाखा प्रबंधकों के लिए अपनी पहली क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सहकारी बैंकिंग के विकासात्मक, विनियामक, पर्यवेक्षी तथा व्यवसाय विकास संबंधी पहलुओं पर जागरूकता और क्षमता का संवर्धन करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए श्री नवीन कुमार राय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने वित्तीय समावेशन और स्थानीय आर्थिक विकास में सहकारी बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सतत विकास को गति देने के लिए सुदृढ़ प्रशासन, प्रौद्योगिकी के उपयोग, ग्राहक-केंद्रित सेवाओं तथा संस्थागत क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। 

कार्यशाला में श्री हरीश झिरवाल (सहायक महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक), श्री अनिल कुमार (उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियाँ, दिल्ली सरकार), डॉ. डी. के. राणा (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, के.वी.के. उजवा), श्रीमती संध्या कपूर (निदेशक, एनसीयूआई) तथा नाबार्ड प्रधान कार्यालय और नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय की टीम द्वारा विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में एकीकृत लोकपाल योजना, डीईए फंड, के.वाई.सी. अनुपालन, सहकारी सुशासन, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन, किसानों की ऋण आवश्यकताएँ, राष्ट्रीय सहकारी नीति तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम वित्तपोषण और डिजिटल बैंकिंग सहित व्यवसाय विविधीकरण के अवसरों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम ने डीएसटीसीबी के शाखा प्रबंधकों और वरिष्ठ अधिकारियों को सहकारी बैंकिंग में व्यावसायिकता, व्यवसाय विविधीकरण तथा प्रौद्योगिकी आधारित परिवर्तन पर विचार-विमर्श का एक प्रभावी मंच प्रदान किया।  अपने समापन संबोधन में, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने सहकारी बैंकों से किसानों, बुनकरों, कारीगरों तथा अन्य वंचित वर्गों की ऋण आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। 

साथ ही, उन्होंने अर्ध-शहरी और शहरी-गरीब परिवारों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहयोग प्रदान करने पर भी बल दिया। निचले स्तर पर सहकारी संरचना को सशक्त बनाने के नाबार्ड के दृष्टिकोण को दोहराते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों से दिल्ली में कम से कम एक सशक्त प्राथमिक कृषि ऋण समिति (PACS) / बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समिति (MPACS) के पुनर्जीवन अथवा विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी संस्था नए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने, वित्तीय समावेशन को गहरा करने, ऋण एवं सरकारी योजनाओं तक पहुँच में सुधार करने तथा भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के “सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। श्री राजीव कुमार कादयान, कार्यवाहक प्रबंध निदेशक, डीएसटीसीबी ने शाखा प्रबंधकों से नवाचार, ग्राहक-केंद्रित सेवाओं और डिजिटल तकनीकों को अपनाकर सहकारी बैंकिंग में परिवर्तन का नेतृत्व करने का आह्वान किया।

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