सेमीकंडक्टर, AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से भारत लगाएगा अगली टेक छलांग
PAFI के 13वें वार्षिक फोरम में आत्मनिर्भरता के साथ विविधीकरण पर जोर
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 25 सितम्बर 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। भारत के तकनीकी भविष्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लोकतंत्रीकरण पर जोर दिया गया। पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (PAFI) के 13वें वार्षिक फोरम में आयोजित लीडरशिप डायलॉग:इंडिया 3.0 द नेक्स्ट टेक लीप में भारत के तकनीकी विकास की दिशा पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का आधार तेजी से मजबूत हुआ है, लेकिन वैश्विक वैल्यू चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका हासिल करने के लिए देश में आवश्यक क्षमताओं का विकास करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जापान, कनाडा और अन्य देशों के साथ सहयोग के जरिए महत्वपूर्ण तकनीकी संबंधों को मजबूत किया जा रहा है।
एस. कृष्णन ने कहा कि कोविड-19 के बाद वैश्विक स्तर पर कंपनियों और सरकारों ने किसी एक बाजार, देश या सप्लाई स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को अधिक गंभीरता से समझा है। ऐसे में केवल लागत-प्रतिस्पर्धा के आधार पर उत्पादन केंद्र चुनने के बजाय सप्लाई चेन में विविधीकरण और लचीलापन महत्वपूर्ण हो गया है। PAFI के अध्यक्ष एवं PhonePe के पब्लिक पॉलिसी और गवर्नमेंट अफेयर्स के वाइस प्रेसिडेंट शिवनाथ ठुकराल ने कहा कि ‘इंडिया 3.0’ के दौर में सार्वजनिक नीति और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग जरूरी होगा, ताकि भारत अपने तकनीकी भविष्य को मजबूत आधार दे सके और वैश्विक वैल्यू चेन में अपनी भूमिका बढ़ा सके। कार्यक्रम के मॉडरेटर एवं PAFI के पूर्व अध्यक्ष तथा वार्षिक फोरम के को-चेयर विराट भाटिया ने कहा कि बुनियादी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे बढ़कर डीप-टेक इनोवेशन की दिशा में कदम बढ़ाना भारत के अगले दशक के लिए महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने पारदर्शी नीतिगत ढांचे और निरंतर सार्वजनिक-निजी सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। फोरम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे बढ़ते हुए स्वदेशी सेमीकंडक्टर निर्माण और AI तक व्यापक पहुंच** को कैसे मजबूत कर सकता है। सत्र में टेक्नोलॉजी की पहुंच, नवाचार, डिजिटल सुरक्षा और आत्मनिर्भर तकनीकी इकोसिस्टम को लेकर सरकार और उद्योग के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें