नाबार्ड ने हथकरघा बुनकरों पर दो दिवसीय प्रदर्शनी का किया आयोजन, 3 लाख रुपये से अधिक का व्यवसाय

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 13 अगस्त 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। नाबार्ड के नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में 10-11 अगस्त 2026 को प्रदर्शनी-सह-विक्रय एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में हथकरघा क्षेत्र के समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियों, जैसे सतत विकास, प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि तथा बाजार विस्तार की रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. के. महेश, आईएएस, सचिव, संस्कृति, जीएनसीटीडी तथा प्रबंध निदेशक, दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने हथकरघा क्षेत्र के समग्र विकास हेतु सरकारी एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों, कारीगरों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। श्री नवीन कुमार राय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के सतत विकास में नाबार्ड, भारत सरकार, एनएचडीसी तथा अन्य संस्थाओं जैसी पारिस्थितिकी तंत्र समर्थक संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने वित्तीय एवं विकासात्मक हस्तक्षेपों, क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी उन्नयन तथा बाजार उपलब्धता में नाबार्ड के योगदान का उल्लेख करते हुए दिल्ली की विशिष्ट हथकरघा पहचान विकसित करने के लिए सभी पक्षों से सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। श्री चंदन कुमार, मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए ऋण तक पहुंच, प्रौद्योगिकी का अपनाव तथा कौशल विकास अत्यंत आवश्यक हैं। 

श्री राजीव अशोक, प्रबंध निदेशक, एनएचडीसी ने भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों के संवर्धन तथा बुनकरों की कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए एनएचडीसी की पहलों पर प्रकाश डाला, जबकि श्री टी.डी. शिवकुमार, मुख्य महाप्रबंधक, एक्जिम बैंक ने भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक बाजार पहुंच बढ़ाने में वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। अन्य वक्ताओं एवं बुनकर प्रतिनिधियों ने सभी हितधारकों द्वारा समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता व्यक्त करते हुए आशा जताई कि नाबार्ड द्वारा इस दिशा में एक सार्थक पहल की गई है। संगोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. के. महेश ने की। कार्यक्रम में श्री चंदन कुमार, श्री नवीन कुमार राय, श्री पुष्पास पाण्डेय, कमोडोर राजीव अशोक (सेवानिवृत्त), श्री टी.डी. शिवकुमार, डॉ. शिन्जू महाजन तथा श्री विशेष नौटियाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त दिल्ली राज्य के सभी लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, बुनकर सहकारी समितियाँ, कारीगर समूह तथा नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।  राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी-सह-विक्रय में कुल 7 स्टॉल लगाए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के हथकरघा उत्पाद प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी में कांचीपुरम साड़ियाँ, बाटिक प्रिंट, दोहर, धोती, रेडीमेड परिधान, टेबल मैट, दरियाँ तथा अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिन्होंने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह प्रदर्शनी भारत की समृद्ध, विविधतापूर्ण एवं उत्कृष्ट हथकरघा परंपरा का प्रभावी प्रदर्शन रही। सात स्टॉलों वाली इस प्रदर्शनी में दो दिनों में 3 लाख रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई, जिसने बुनकरों के हौसले को बढ़ाया ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

असंगठित श्रमिकों के अधिकारों पर राष्ट्रीय मंथन

प्रदूषण कम करने में किसानो का बड़ा योगदान होगा : बंकरमैन श्रीपाल