फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला तथा नोटो ने अंगदान के बारे में बढ़ायी जागरूकता

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 13 अगस्त 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। विश्व अंगदान दिवस 2026 की पूर्व-संध्या पर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला ने नेशनल ऑर्गेन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइज़ेशन (नोटो)के सहयोग से ‘गिव द गिफ्ट ऑफ लाइफ’के महत्वपूर्ण विषय परएक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इसका मकसद भारत में प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध अंगों की भारी कमी के बारे में लोगों को जागरूक बनाना, भारत तथा पश्चिमी देशों के बीच मृतकों के अंगदान की दरों में मौजूदा अंतर को कम करना, तथा देशभर में इस बारे में जानकारी बढा़ने के साथ-साथ मृतक अंगदान संकल्पों में प्रतिभागिता को बढ़ावा देना था। कॉन्फ्रेंस में भाग ले रहे प्रमुख हेल्थकेयर विशेषज्ञों ने अंगदान की राह में पेश आने वाली मुख्य चुनौतियों पर चर्चा की और सर्जिकल समाधानों के बारे में जानकारी दी तथा अंग दान की संस्कृति विकसित करने के लिए रणनीति की रूपरेखा बतायी। इस पैनल का नेतृत्व डॉ अनिल कुमार, डायरेक्टर, नेशनल ऑर्गेन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार कर रहे थे। उनके साथ, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला के डॉ ज़ेड एस मेहरवाल, चेयरमैन एवं हेड, एडल्ट कार्डियाक सर्जरी; डॉ विवेक विज,चेयरमैन, लिवर ट्रांसप्लांट एंड हेपेटो-बिलियरी साइंसेज़;डॉ संजीव गुलाटी, चेयरमैन, नेफ्रोलॉजी;डॉ पंकज पंवार, एडिशनल डायरेक्टर, यूरोलॉजी एवं डॉ विक्रम अग्रवाल, वाइस प्रेसीडेंट एंड एसबीयू हेड, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला भी उपस्थित थे। भारत में अंग दान के क्षेत्र में काफी कमी बनी हुई है और अंग दान की दर प्रति मिलियन की आबादी पर 1 (पीएमपी) के मामूली आंकड़े से भी कम है, जो कि स्पेन (~49पीएमपी) तथा अमेरिका (~22–26पीएमपी) जैसे पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कम है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2020 से 2024 के दौरान, 2,805 मरीजों की मृत्यु अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हुए हो गई, जबकि मार्च 2026 को करीब 90,000 मरीज नेशनल ट्रांसप्लांट प्रतीक्षा सूची में थे। प्रत्यारोपणों की संख्या में वृद्धि के बावजूद, मृत डोनर अंगों की संख्या कुल प्रत्यारोपणों का मात्र 18%ही है, जो कि इस बात का सूचक है कि देश में मृत अंग दान में विस्तार करने की आवश्यकता है। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, डॉ अनिल कुमार, डायरेक्टर, नेशनल ऑर्गेन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा, “भारत के पास वर्ल्ड-क्लास सर्जिकल विशेषज्ञता और अत्याधुनिक ट्रांसप्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन इस बावजूद हर साल मृत अंग डोनर्स की संख्या में भारी कमी की वजह से कई बहुमूल्य जीवन असमय ही समाप्त हो जाते हैं। एक मृत डोनर से ही आठ जिंदगियों को बचाया जा सकता है और टिश्यू डोनेशन के जरिए दर्जनों अन्य मरीजों की जीवन गुणावत्ता में सुधार किया जा सकता है। हमारा उद्देश्य इस राह में पेश आने वाली प्रशासनिक अड़चनों, समाज में अंगदान के बारे में फैली गलतफहमियों को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक को अपने अंगों को दान करने के संकल्प के जीवनरक्षक प्रभावों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।”

डॉ ज़ेड एस मेहरवाल, चेयरमैन एवं हेड, एडल्ट कार्डियाक सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला ने कहा, “एंड स्टेज हार्ट फेलियर के साथ जीवन बिता रहे मरीज के लिए, हार्ट ट्रांसप्लांट ही नए जीवन का एकमात्र विकल्प है। ट्रांसप्लांट मेडिसिन में हुई प्रगति, और ग्रीन कॉरिडोर जैसी तालमेल आधारित प्रणालियों के चलते हमें डोनर अंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में काफी मदद मिली है और डोनर से प्राप्तकर्ता तक अंगों को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की हमारी क्षमता पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है। लेकिन अभी भी इस पूरी श्रंखला में एक कड़ी गायब है और वो है दान के लिए उपलब्ध अंगों का अभाव। हमें अंगदान को अपनी रोज़मर्रा की बातचीत में शामिल करना होगा और साथ ही, लोगों को अंगदान के अपने संकल्पों को रजिस्टर कराने के लिए भी प्रेरित करना होगा। हर डोनर में किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन जीने का अवसर प्रदान करने की क्षमता होती है। अंगदान के बारे में जागरूकता और प्रतिभागिता बढ़ाकर, हम यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं कि प्रतीक्षा सूची में मरीजों की संख्या कम हो सके और वे वहां केवल इस वजह से इंतजार नहीं करते रहें कि उस वक्त उचित हृदय उन्हें प्रत्यारोपण के लिए नहीं मिल पाया था जब उन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।

डॉ विवेक विज,चेयरमैन, लिवर ट्रांसप्लांट एंड हेपेटो-बिलियरी साइंसेज़, फोर्टिस हेल्थकेयर ने कहा भारत में एंड स्टेज लिवर रोगों का बोझ काफी है, और लिविंग-डोनर लिवर ट्रांसप्लांटेशन ने देश में ट्रांसप्लांट संबंधी जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभायी है। साथ ही, लिवर ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में भी तेजी से बदलाव हो रहा है, जो यह प्रदर्शित करता है कि किस प्रकार सर्जिकल दक्षता और टेक्नोलॉजी के मेल से मरीजों के लिए संभावनाओं में विस्तार किया जा सकता है। लेकिन यह भी जानना जरूरी है कि केवल मेडिकल क्षेत्र में प्रगति से ही इस अंगों की कमियों को दूर नहीं किया जा सकता। इस बारे में जागरूकता बढ़ाने की काफी जरूरत है। मृत और जीवित अंग दान के बारे में जानकारी बढ़ाना जरूरी है। अंगदान की मजबूत संस्कृति और प्रत्यारोपण के बारे में लगातार प्रगति से, यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि एंड स्टेज लिवर रोग से ग्रस्त अधिकाधिक मरीजों की पहुंच जीवनरक्षक लिवर ट्रांसप्लांट तक हो सकेगी।

डॉ संजीव गुलाटी, चेयरमैन, नेफ्रोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला ने कहा एडवांस किडनी रोग से ग्रस्त मरीज के लिए, डायलसिस कराने का हर दिन अनिश्चितता से भरा दिन हो सकता है, जबकि एक सफल किडनी ट्रांसप्लांट उन्हें अधिक आजादी और बेहतर लाइफ क्वालिटी का लाभ दिला सकता है। भारत में ट्रांसप्लांट मेडिसिन के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है, लेकिन किडनी की मांग आज भी समुचित अंगों की उपलब्धता की तुलना में अधिक बनी हुई है। इसलिए चुनौती केवल उन्नत क्लीनिकल क्षमताओं की ही नहीं है बल्कि उस पूरे इकोसिस्टम को मजबूत बनाने को लेकर भी है जो ट्रांसप्लांटेशन को संभव बनाता है। डॉ पंकज पंवार, एडिशनल डायरेक्टर, यूरोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला ने कहा ट्रांसप्लांटेशन के भविष्य को केवल सर्जिकल इनोवेशन से ही तय नहीं किया जाता, बल्कि यह काफी हद तक अंगदान करने की समाज की इच्छा पर भी निर्भर करता है। गुर्दे बेकार होने की समस्या से जूझ रहे मरीज के लिए प्रत्यारोपण आजीवन डायलसिस कराने के झंझट से आजादी दिलाने के साथ-साथ नए जीवन का उपहार भी दिलाता है। हर डोनर के पास अपरिवर्तनीय क्षति को किसी अन्य परिवार के लिए उम्मीद में बदलने की ताकत होती है। मैं लोगों से न सिर्फ अपने अंग दान करने का अनुरोध करता हूं बल्कि उन्हें अपने फैसले के बारे में अपने परिजनों से भी बातचीत करने की सलाह देता हूं। क्योंकि जब हम अंगदान करते हैं, तो केवल एक अंग ही नहीं देते, बल्कि हम किसी दूसरे को जिंदगी जीने का नया मौका भी देते हैं।

डॉ विक्रम अग्रवाल, वाइस प्रेसीडेंट एंड एसबीयू हेड, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला ने कहा भारत का ट्रांसप्लांट इकोसिस्टम काफी प्रगति कर चुका है, लेकिन यह सफर अभी अपनी मंजिल से काफी दूर है। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला में 23 हृदय प्रत्यारोपण करने के दौरान, हमने प्रत्यक्ष रूप से यह देखा है कि किस प्रकार अंगदान से किसी मरीज का जीवन पूरी तरह से बदल सकता है और उसके परिजनों को भी उम्मीद की एक नई किरण दिखायी देती है। नोटो के साथ मिलकर, विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर हमारा संदेश साफ है- अंगदान के बारे में संवाद की प्रक्रिया केवल अस्पतालों की दीवारों के पीछे ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। इस विषय को हर घर और समुदाय तक पहुंचना चाहिए। अधिक जागरूकता, अधिक खुले संवाद और अधिक डोनर्स के सामने आने से ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में बढ़ोतरी होनी चाहिए।


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