सिंधु समाज दिल्ली ने मनाया विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस

 

बुजुर्गों ने सुनाई विस्थापन की दर्दनाक दास्तान

सिंध से खाली हाथ भारत आए सिंधी समाज के संघर्ष, साहस और योगदान को किया याद

नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का लिया संकल्प

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शनिवार 15 अगस्त 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान सिंधी समाज द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन, संघर्ष और साहस को याद करते हुए सिंधु समाज दिल्ली (पंजीकृत) एवं राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी को झेलने वाली बुजुर्ग पीढ़ी को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनकी आपबीती सुनी गई और उनके संघर्ष एवं योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सिंधी समाज ने भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय सिंध में अपना घर, कारोबार, संपत्ति और वर्षों पुरानी जड़ें छोड़कर लगभग खाली हाथ भारत का रुख किया। विस्थापन की पीड़ा के बावजूद समाज ने अपनी मेहनत, साहस और जीवटता के बल पर भारत में न केवल स्वयं को पुनर्स्थापित किया, बल्कि देश के आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सिंधु समाज दिल्ली के महासचिव श्री नरेश बेलानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के माध्यम से उस पीढ़ी के संघर्ष को याद किया जा रहा है, जिसने विभाजन की भयावह त्रासदी को अपनी आंखों से देखा और झेला। उन्होंने कहा कि आज भी उस दौर को झेलने वाली पीढ़ी के अनेक बुजुर्ग हमारे बीच मौजूद हैं। कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित कर उनकी आपबीती सुनी गई और सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में ऐसे लोगों को भी आमंत्रित किया गया जो विभाजन के समय बहुत छोटे बच्चे थे। उन्होंने अपने माता-पिता, दादा-दादी एवं नाना-नानी से सुनी और परिवार के माध्यम से संजोई गई विभाजन की यादों और पीड़ा को साझा किया। इन अनुभवों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने इतिहास और विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया गया।

सिंधु समाज दिल्ली के अध्यक्ष श्री जगदीश नागरानी ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को यह बताना है कि विभाजन के समय सिंधी समाज और उनके बुजुर्गों ने सिंध में अपना सब कुछ छोड़कर भारत में किस प्रकार संघर्षपूर्ण जीवन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि समाज की इस ऐतिहासिक यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों की यादों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी विरासत को समझें और उसे आगे बढ़ाएं। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी को झेल चुके बुजुर्गों के अनुभवों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन की स्मृतियां केवल अतीत की पीड़ा नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस, एकता और पुनर्निर्माण की प्रेरणादायक गाथा भी हैं। सिंधी समाज ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को जीवित रखते हुए भारत की विकास यात्रा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कार्यक्रम के माध्यम से समाज ने संकल्प लिया कि विभाजन की पीड़ा और उससे जुड़े अनुभवों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि इतिहास की यह अमर गाथा विस्मृत न हो और युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों के संघर्ष, त्याग और उपलब्धियों से प्रेरणा ले सके।


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