न्यूट्रिशन सप्लीमेंट पोषण की कमी वाले बच्चों को मजबूत बनाने में सहायक : स्टडी

न्यूट्रिशन की कमी वाले जिन बच्चों को ओरल न्यूट्रिशन सप्लीमेंट दिया गया, उनमें केवल डाइटरी काउंसलिंग वाले बच्चों के मुकाबले लंबाई लगभग 2.4 गुना बढ़ी और लीन मास लगभग 15% बढ़ा।

स्टडीज में केवल ऊंचाई और वजन के अलावा विकास की क्वालिटी (लीन मास और बोन हेल्थ) में भी सुधार देखा गया।

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 20 अगस्त 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), मुंबई ग्लोबल हेल्थकेयर लीडर, Abbott ने एक रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के नतीजे जारी किए हैं। इन नतीजों के मुताबिक भारत में जिन बच्चों को पोषण की कमी का खतरा है, उनमें केवल डाइटरी काउंसलिंग वाले बच्चों की बजाय डाइटरी काउंसलिंग के साथ ओरल न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट देने पर शारीरिक और मानसिक विकास में काफी सुधार देखा गया। जिन बच्चों को छह महीनों तक सप्लीमेंट दिया गया, उनकी लंबाई लगभग 2.4 गुना बढ़ी और लीन मास में लगभग 15% वृद्धि हुई। जर्नल्स चिल्ड्रन और जर्नल ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन में प्रकाशित यह ट्रायल 3 से 7 साल की उम्र के 223 भारतीय बच्चों पर किया गया, जिन्हें खाने-पीने की आदतों के कारण या तो न्यूट्रिशन की कमी थी या इसका खतरा था। स्टडी में शामिल परिवारों और बच्चों को छह महीने तक डाइटरी काउंसलिंग दी गई। लगभग आधे बच्चों को Abbott पीडियाट्रिक ओरल न्यूट्रिशन सप्लीमेंट, पीडियाश्योर की रोज दो सर्विंग दी गईं। इसके बाद पहले से निर्धारित समय अंतरालों पर उनके विकास, डाइट, बॉडी कंपोजिशन और अन्य हेल्थ इंडिकेटर्स का आकलन किया गया। ड्युअल-एनर्जी एक्स-रे एबसॉर्प्शियोमेट्री (डीएक्सए) की मदद से बॉडी कंपोजिशन और बोन हेल्थ का मूल्यांकन किया गया, जो इमेजिंग बेस्ड मेजरमेंट का गोल्ड-स्टैंडर्ड है तथा लीन मास, फैट मास और बोन मिनरलाइजेशन का सटीक माप प्रदान करता है। लीन मास में बॉडी फैट को छोड़कर मांसपेशियां, हड्डियां, सभी अंग और बॉडी कंपोनेंट्स आते हैं।

डॉ. अनुराधा खादिलकर कंसल्टैंट पीडियाट्रिशियन, जहाँगीर क्लिनिकल डेवलपमेंट सेंटर प्राईवेट लिमिटेड, पुणे, भारत ने कहा, ‘‘यह रिसर्च टारगेटेड न्यूट्रिशन सपोर्ट की मदद से न्यूट्रिशन की कमी को तुरंत दूर करने के महत्व को प्रदर्शित करती है। लेकिन इस रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि इसके फायदे केवल शारीरिक वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें लीन मास और बोन हैल्थ में होने वाला सुधार भी शामिल है, जो न्यूट्रिशन के जोखिम वाले बच्चों में स्वस्थ विकास को लेकर ज्यादा व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। डॉ. प्रीति ठकोर, डायरेक्टर मेडिकल एवं साईंटिफिक अफेयर्स, Abbott न्यूट्रिशन बिजनेस, इंडिया ने कहा, ‘‘यह स्टडी इस बात के बढ़ते हुए प्रमाणों को सपोर्ट करती है कि टारगेटेड न्यूट्रिशनल सपोर्ट से न्यूट्रिशन के जोखिम वाले बच्चों के स्वस्थ विकास में मदद मिलती है। इन नतीजों ने न केवल ऊँचाई और वजन में सुधार प्रदर्शित किया है, बल्कि उनके लीन मास और बोन हैल्थ में भी सुधार हुआ है, जो विकास के नतीजों का ज्यादा विस्तृत दृष्टिकोण प्रदान करता है।

Abbott की पीडियाश्योर का समर्थन 30 सालों में 20 से अधिक क्लिनिकल अध्ययन कर चुके हैं। इन अध्ययनों में सामने आया है कि जिन बच्चों को न्यूट्रिशन का जोखिम है या जिनका विकास धीरे-धीरे हो रहा है, उन्हें पीडियाश्योर से स्वस्थ विकास करने में मदद मिलती है। बचपन में होने वाली न्यूट्रिशन की कमी भारत में जनस्वास्थ्य की एक बड़ी समस्या है। नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे (एन.एफ.एच.एस-6, 2023-24) के डेटा में सामने आया कि देश में 5 साल से कम उम्र के 29.3 प्रतिशत बच्चों का विकास रुक गया है और लगभग 31.8 प्रतिशत बच्चों का वजन बहुत कम है। इससे प्रभावशाली न्यूट्रिशन उपायों की जरूरत प्रदर्शित होती है। इस संदर्भ में इन नतीजों से उन बढ़ते हुए वैज्ञानिक प्रमाणों को सपोर्ट मिलती है, जो न्यूट्रिशन की रणनीतियों का आकलन करके अपर्याप्त डाईट लेने वाले बच्चों में विकास की कमी को दूर करने में मदद कर सकते हैं।

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