मीडिया और पाठकों के बीच विश्वास का सेतु बनेगा सुकून मीडिया प्रेस क्लब अतिथि गृह
मीडिया प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक लालवानी से मोहम्मद जोशी की विशेष बातचीत
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 9 अक्टूबर 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। समाचार पत्र और समाचार चैनल लोकतंत्र के उस मजबूत स्तंभ का हिस्सा हैं जो आम जनता और शासन-प्रशासन के बीच संवाद का माध्यम बनते हैं। लेकिन बदलते दौर में समाचार माध्यमों और उनके पाठकों-दर्शकों के बीच विश्वास की दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया ने सूचना के आदान-प्रदान को तेज तो किया है लेकिन अपुष्ट सूचनाओं, गैर-पेशेवर पपत्रकारिता और आर्थिक हितों के कारण समाचारों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। इसी चुनौती के बीच मीडिया प्रेस क्लब ने पत्रकारों के साथ-साथ समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों के स्थायी पाठकों एवं दर्शकों को अपने साथ जोड़ने की पहल की है। इसी सोच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है सुकून मीडिया प्रेस क्लब अतिथि गृह, धनौल्टी, उत्तराखंड, जिसके माध्यम से पाठकों-दर्शकों और मीडिया के बीच सीधे संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इन्हीं विषयों पर मीडिया प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक लालवानी से मोहम्मद जोशी ने विशेष बातचीत का मुख्य अंश प्रस्तुत है :
मीडिया प्रेस क्लब की मूल परिकल्पना क्या है?
अशोक लालवानी : मीडिया प्रेस क्लब केवल पत्रकारों का संगठन नहीं है। हमारा मानना है कि मीडिया की वास्तविक ताकत पत्रकारों के साथ उसके पाठक और दर्शक भी हैं। इसलिए मीडिया प्रेस क्लब में मीडिया कर्मियों के साथ-साथ समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों के स्थायी पाठकों एवं दर्शकों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हम चाहते हैं कि पत्रकार, समाचार माध्यम और पाठक-दर्शक एक-दूसरे के करीब आएं। जब पाठक मीडिया से जुड़ा रहेगा और पत्रकार अपने पाठक को सीधे समझेगा, तभी समाचार माध्यमों में विश्वास और जिम्मेदारी दोनों मजबूत होंगे।
आज समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों के प्रति पाठकों का विश्वास कम होने की बात कही जा रही है। इसका कारण क्या मानते हैं?
अशोक लालवानी : यह हमारे समय की गंभीर चुनौती है। समाचार पत्र और न्यूज चैनल लोकतंत्र में लोक और तंत्र को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यदि जनता का मीडिया से विश्वास उठता है तो लोकतांत्रिक संवाद कमजोर होता है। आज बहुत से पाठक समाचार पत्र खरीदकर पढ़ना या न्यूज चैनल नियमित रूप से देखना नहीं चाहते। इसके पीछे कई कारण हो सकता है जैसे खबरों की गुणवत्ता, पक्षपात की धारणा, अपुष्ट सूचनाएं और समाचार तथा प्रचार के बीच अंतर का धुंधला होना। हमें इस स्थिति को केवल शिकायत के रूप में नहीं देखना चाहिए। मीडिया को अपने पाठकों के बीच जाकर उनका विश्वास दोबारा अर्जित करना होगा।
क्या सोशल मीडिया इस समस्या का समाधान है या समस्या को और बढ़ा रहा है?
अशोक लालवानी : सोशल मीडिया निश्चित रूप से सूचना और विचारों के आदान-प्रदान का अत्यंत मजबूत माध्यम है। लेकिन हर माध्यम की तरह इसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है यह महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी समाचार देने लगे हैं जिनके पास पत्रकारिता का पर्याप्त अनुभव, प्रशिक्षण या संगठित संस्थागत व्यवस्था नहीं है। कई बार बिना तथ्य की पूरी जांच किए सूचनाएं प्रसारित हो जाती हैं। इससे सही और गलत सूचना में अंतर करना आम दर्शक के लिए कठिन हो जाता है। हम सोशल मीडिया के विरोध में नहीं हैं। हमारा उद्देश्य यह है कि सोशल मीडिया का उपयोग भी जिम्मेदार, तथ्यपरक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए हो।
आपने भुगतान लेकर खबर चलाने की प्रवृत्ति की भी बात कही है। इसका मीडिया पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अशोक लालवानी : जब खबर और आर्थिक हित के बीच की सीमा समाप्त हो जाती है तो पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। यदि कोई व्यक्ति अपने आर्थिक या व्यक्तिगत हित के लिए खबर को प्रभावित करता है और पाठक-दर्शक को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं मिलती तो इससे पूरे मीडिया जगत की छवि प्रभावित होती है। हमारा प्रयास है कि पत्रकार को अपनी आय के लिए खबर के साथ समझौता न करना पड़े। पत्रकार का ध्यान केवल खबर पर होना चाहिए।
जंतर-मंतर के धरना-प्रदर्शन का उदाहरण आप अक्सर देते हैं। उसमें आपको क्या संदेश दिखाई देता है?
अशोक लालवानी : जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील स्थानों पर खबरों के संकलन को लेकर जब अधिकृत पहचान रखने वाले पत्रकारों को प्राथमिकता दी जाती है, तो इसके पीछे सुरक्षा और विश्वसनीयता जैसे कारण भी हो सकते हैं। मेरा मानना है कि ऐसे मामलों में पत्रकारिता की पहचान, संस्थागत जवाबदेही और तथ्यपरक रिपोर्टिंग का महत्व बढ़ जाता है। हम किसी व्यक्ति या समूह को निशाना बनाने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन यदि कोई व्यक्ति केवल अपने निजी या आर्थिक हित के लिए खबर को प्रभावित करता है तो इससे संगठित और जिम्मेदार मीडिया संस्थाओं की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है। इसलिए जरूरी है कि पत्रकारिता की पहचान केवल कैमरा या सोशल मीडिया पेज से नहीं, बल्कि जवाबदेही, तथ्य-जांच और जनहित से हो।
इस स्थिति में मीडिया प्रेस क्लब क्या करना चाहता है?
अशोक लालवानी : हम मीडिया और पाठक-दर्शक के बीच विश्वास का रिश्ता फिर से मजबूत करना चाहते हैं। हमारा मानना है कि पाठक या दर्शक केवल समाचार खरीदने वाला ग्राहक नहीं है बल्कि वह हमारे समाचार माध्यम की रीढ़ है। यदि पाठक नहीं होगा तो अखबार किसके लिए निकलेगा और दर्शक नहीं होगा तो न्यूज चैनल किसके लिए चलेगा? इसीलिए हमने तय किया है कि पाठकों और दर्शकों को मीडिया के और करीब लाया जाए।
इसी सोच में सुकून मीडिया प्रेस क्लब अतिथि गृह की क्या भूमिका है?
अशोक लालवानी : सुकून मीडिया प्रेस क्लब अतिथि गृह, धनौल्टी, उत्तराखंड इसी सोच का एक महत्वपूर्ण प्रयोग है। हमारा उद्देश्य केवल अतिथि गृह बनाना नहीं है बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां मीडिया कर्मी और उनके स्थायी पाठक-दर्शक एक-दूसरे से सीधे जुड़ सकें। धनौल्टी की प्राकृतिक सुंदरता, देवदार के जंगलों और शांत वातावरण के बीच पाठकों-दर्शकों को मीडिया परिवार के साथ जुड़ने का अवसर मिलेगा। यह केवल पर्यटन की सुविधा नहीं बल्कि मीडिया और समाज के बीच संवाद का नया मॉडल होगा।
क्या धनौल्टी के बाद अन्य स्थानों पर भी ऐसे अतिथि गृह खोले जाएंगे?
अशोक लालवानी : जी हां, हमारी योजना सुकून मीडिया प्रेस क्लब अतिथि गृह, धनौल्टी सहित जल्द ही लगभग 12 अन्य पर्यटन स्थलों पर अतिथि गृह विकसित करने की है। हम चाहते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हमारे स्थायी पाठक-दर्शक मीडिया से जुड़े रहें और उन्हें ऐसा महसूस हो कि वे केवल किसी अखबार या न्यूज चैनल के ग्राहक नहीं बल्कि उसके परिवार का हिस्सा हैं।
लेकिन इन अतिथि गृहों से मीडिया की आर्थिक समस्या कैसे हल होगी?
अशोक लालवानी : यही इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत पक्ष है। हमारा प्रयास है कि पाठकों और दर्शकों से प्राप्त सदस्यता की आय का एक हिस्सा संबंधित समाचार पत्र या न्यूज चैनल के पत्रकारों और मीडिया व्यवस्था को मजबूत करने में लगाया जाए। हम पत्रकारों से कहेंगे ये आपके स्थायी पाठक हैं। इनके साथ आपका संबंध केवल आज की खबर तक सीमित नहीं है। इनके लिए पूरे वर्ष जिम्मेदारी के साथ काम कीजिए। हम चाहते हैं कि स्थायी पाठकों की खबरों और जनहित से जुड़ी सूचनाओं को उचित महत्व मिले और जहां संभव हो, उनका प्रकाशन या प्रसारण बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के किया जाए।
क्या इससे पत्रकारों की आय का नया मॉडल तैयार हो सकता है?
अशोक लालवानी : हमारा यही प्रयास है। यदि पाठक मीडिया से सीधे जुड़ता है और उसकी सदस्यता से उत्पन्न आय का एक हिस्सा पत्रकारों तक पहुंचता है, तो पत्रकार की आर्थिक निर्भरता केवल विज्ञापन या भुगतान वाली खबरों पर नहीं रहेगी। इससे पत्रकार को यह मजबूती मिलेगी कि वह खबर के साथ समझौता किए बिना काम कर सके।हमारा सपना है कि पत्रकार कह सके मेरी आय मेरी खबर की कीमत से नहीं मेरे स्थायी पाठकों के विश्वास से आती है।
क्या इसका मतलब यह है कि मीडिया प्रेस क्लब विज्ञापन को समाप्त करना चाहता है?
अशोक लालवानी : विज्ञापन मीडिया की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारा उद्देश्य विज्ञापन को समाप्त करना नहीं है। हमारा उद्देश्य मीडिया की आर्थिक निर्भरता को संतुलित करना है। यदि किसी समाचार पत्र या न्यूज चैनल के पास मजबूत और स्थायी पाठक-दर्शक आधार होगा तो उसे हर खबर के लिए विज्ञापनदाता या भुगतान करने वाले व्यक्ति पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम होगी। इससे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता दोनों मजबूत हो सकती हैं।
आप पाठक-दर्शक को केवल ग्राहक के बजाय क्या मानते हैं?
अशोक लालवानी : हमारे लिए पाठक और दर्शक मीडिया परिवार का स्थायी सदस्य है। वह खबर पढ़ता है, खबर देखता है, अपनी समस्या बताता है, स्थानीय घटनाओं की जानकारी देता है और मीडिया को समाज की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करता है। इसलिए हमारा लक्ष्य पाठक को केवल अखबार खरीदने वाला व्यक्ति बनाना नहीं, बल्कि उसे मीडिया का सहभागी और शुभचिंतक बनाना है।
आपकी नजर में पत्रकारिता का भविष्य क्या है?
अशोक लालवानी : पत्रकारिता का भविष्य बहुत उज्ज्वल है, बशर्ते हम उसके मूल सिद्धांतों को न भूलें। तकनीक बदलेगी, माध्यम बदलेंगे, समाचार पत्र का स्वरूप बदलेगा, डिजिटल माध्यम और मजबूत होंगे, लेकिन सच्ची और विश्वसनीय खबर की आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होगी। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मीडिया के बिना अधूरा रहेगा। इसलिए हमें पत्रकारिता को कमजोर नहीं, बल्कि और अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और जनविश्वसनीय बनाना होगा।
अंत में पाठकों और पत्रकारों के लिए आपका संदेश क्या है?
अशोक लालवानी : मेरा संदेश बहुत स्पष्ट है मीडिया और पाठक एक-दूसरे के विरोधी नहीं, एक-दूसरे के पूरक हैं। पत्रकारों को पाठकों का विश्वास अर्जित करना होगा और पाठकों को भी जिम्मेदार मीडिया का समर्थन करना होगा। अगर हम चाहते हैं कि खबर सच बोले, तो हमें उस मीडिया व्यवस्था को मजबूत करना होगा जो सच बोलने की कोशिश कर रही है। सुकून मीडिया प्रेस क्लब अतिथि गृह केवल एक भवन नहीं है। यह उस सोच का प्रतीक है जिसमें पत्रकार, पाठक और समाज एक-दूसरे के करीब आएं। हमारा प्रयास है कि पाठक को उसका विश्वास वापस मिले, पत्रकार को सम्मानजनक आर्थिक आधार मिले और समाचार माध्यमों को विज्ञापन तथा भुगतान वाली खबरों की मजबूरी से धीरे-धीरे बाहर निकलने का अवसर मिले। अंततः हमारा लक्ष्य एक ही है पत्रकार स्वतंत्र हो, खबर निष्पक्ष हो और पाठक का विश्वास अटूट हो।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें