लिवर कैंसर की समय पर पहचान क्यों जरूरी, शुरुआती दौर में अक्सर नहीं दिखते लक्षण

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, सोमवार 26 अक्टूबर 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), हल्द्वानी। लिवर शरीर का एक अहम अंग है, जो शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने, खाना पचाने और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लिवर कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसका शुरुआती दौर में अक्सर पता नहीं चल पाता। इसके लक्षण आमतौर पर तब दिखाई देते हैं, जब बीमारी बढ़ने लगती है या लिवर की काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। ऐसे में बीमारी के जोखिम को समझना और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली स्थित मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर के जीआई एवं एचपीबी सर्जरी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन एवं हेड, डॉ. विवेक मंगला ने बताया लिवर कैंसर के ज्यादातर मामलों में लंबे समय से लिवर को हो रहा नुकसान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्रॉनिक लिवर डिजीज के कारण लिवर में सिरोसिस हो सकता है, जिसमें स्वस्थ टिशूज़ की जगह धीरे-धीरे घाव जैसे निशान बनने लगते हैं। लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचने और उसके बार-बार ठीक होने की प्रक्रिया से कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। लिवर कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई बार मरीज को बीमारी का पता देर से चलता है। बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन कम होना, भूख लगातार कम लगना, त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से में पीलापन आना और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द, भारीपन या बेचैनी होना इसके संभावित संकेत हैं। कुछ मरीजों में पेट में पानी भरने के कारण सूजन भी दिखाई दे सकती है। लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना भी लिवर से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

लिवर कैंसर के खतरे को कम करने के लिए उन बीमारियों से बचाव जरूरी है जो लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस सी की समय पर जांच से संक्रमण का पता लगाने में मदद मिलती है। लंबे समय तक अधिक शराब पीने से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है और सिरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और फैटी लिवर की समस्या भी लिवर की सेहत को प्रभावित कर सकती है। संतुलित डाइट लेना, वजन नियंत्रित रखना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना लिवर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। लिवर कैंसर का इलाज बीमारी के चरण, लिवर की स्थिति और मरीज के सामान्य स्वास्थ्य के आधार पर तय किया जाता है। शुरुआती चरण में कैंसर का पता चलने पर कुछ मरीजों में सर्जरी के जरिए ट्यूमर निकालना या लिवर ट्रांसप्लांट करना संभव हो सकता है। कुछ मामलों में ट्यूमर को नष्ट करने के लिए एब्लेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें गर्मी या ठंड के जरिए कैंसर सेल्स को खत्म किया जाता है। वहीं, बीमारी के बढ़ने पर टारगेटेड ड्रग थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे उपचार विकल्प भी उपलब्ध हैं। सही इलाज का चुनाव विशेषज्ञों की टीम द्वारा मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद किया जाता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

असंगठित श्रमिकों के अधिकारों पर राष्ट्रीय मंथन

प्रदूषण कम करने में किसानो का बड़ा योगदान होगा : बंकरमैन श्रीपाल

Healthcare से Solar Energy तक Mohammad Zeeshanul Haque ने बनाई सफलता और नवाचार की नई पहचान