फिल्म समीक्षा : दायरा
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, रविवार 20 सितम्बर 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), (फिल्म समीक्षक : रेहाना परवीन) नई दिल्ली। फिल्म दायरा बुधवार 16 सितम्बर 2026 को विशेष प्रेस शो PVR चाणक्य, दिल्ली में मुझे देखने का अवसर मिला। फिल्म दायरा में करीना कपूर खान, पृथ्वीराज सुकुमारन, जितेंद्र जोशी, क्षिती जोग, इत्यादि मुख्य कलाकार हैं। फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने दिया है फिल्म का निर्माण जंगली पिक्टुरेस & डॉ जयंतीलाल गदा (पेन स्टूडियोज) ने किया है। फिल्म की शैली क्राइम, ड्रामा, मिस्ट्री, थ्रिलर पर आधारित है। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने A प्रमाणपत्र दिया है यानी 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के दर्शक इसे सिनेमाघरों में देख सकते हैं। फिल्म की अवधि लगभग 2 घंटे 23 मिनट है। फिल्म सिनेमाघरों में 18 सितंबर 2026 को प्रदर्शित हुई है। बॉलीवुड में गंभीर सामाजिक और संवेदनशील विषयों को पर्दे पर उतारने के लिए पहचानी जाने वाली मेघना गुलजार एक बार फिर ऐसी कहानी लेकर आई हैं, जो मनोरंजन के साथ दर्शकों को कई असहज सवालों के सामने खड़ा करती है। फिल्म दायरा एक क्राइम-ड्रामा और इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर है, जिसमें करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिकाओं में हैं।
फिल्म की कहानी एक युवती के साथ हुए बलात्कार और हत्या के मामले तथा उसके बाद चार आरोपियों के पुलिस एनकाउंटर के इर्द-गिर्द घूमती है। एक तरफ पुलिस कार्रवाई को लोग तत्काल न्याय के रूप में देखते हैं, तो दूसरी ओर जांच इस सवाल को सामने लाती है कि क्या कानून लागू करने वालों को कानून की सीमाओं से बाहर जाकर न्याय करने का अधिकार है। यही टकराव फिल्म का केंद्रीय आधार बनता है।फिल्म दायरा सीधे तौर पर किसी एक पक्ष को अंतिम सत्य के रूप में स्थापित करने के बजाय कानून, न्याय, जवाबदेही और नैतिकता के बीच की जटिल रेखा पर सवाल उठाती है। फिल्म का विषय दर्शक को यह सोचने के लिए मजबूर करता है कि त्वरित न्याय और कानूनी न्याय में अंतर क्या है और व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए जवाबदेही कितनी जरूरी है। मेघना गुलजार ने कहानी को अत्यधिक मसालेदार बनाने के बजाय जांच की प्रक्रिया और पात्रों के दृष्टिकोण पर ध्यान दिया है। हालांकि, समीक्षकों के बीच फिल्म की गति और स्क्रीनप्ले को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ समीक्षाओं ने इसके पुलिस-प्रोसीजर वाले हिस्से और गंभीर प्रस्तुति की सराहना की है, जबकि कुछ ने कहानी के ट्रीटमेंट में असमानता और तनाव की कमी को कमजोरी माना है।
फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन ने डीसीपी रमन कुमार की भूमिका निभाई है। उनका किरदार कहानी के नैतिक और भावनात्मक संघर्ष को आगे बढ़ाता है। समीक्षाओं में उनके अभिनय को फिल्म के प्रमुख मजबूत पक्षों में गिना गया है। उनके चेहरे के हावभाव, संवाद अदायगी और किरदार की आंतरिक जटिलता फिल्म को गंभीरता प्रदान करती है। करीना कपूर खान डीसीपी अजूनी कोहली की भूमिका में हैं, जो मामले की जांच करती हैं। उनका अभिनय सहज और संयमित है। हालांकि, कुछ समीक्षकों का मानना है कि उनके किरदार को कहानी में उतनी गहराई और प्रभाव नहीं मिल पाया, जितनी इस भूमिका से अपेक्षा की जा सकती थी। सहायक कलाकारों में जितेंद्र जोशी, क्षिती जोग ने भी कहानी को विश्वसनीय बनाने में योगदान दिया है।
फिल्म तलवार और राजी जैसी फिल्मों के बाद मेघना गुलजार की फिल्मों से दर्शकों की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं। ‘दायरा’ में भी उनका जोर विषय को सनसनीखेज बनाने के बजाय उसके सामाजिक और कानूनी पहलुओं को सामने रखने पर दिखाई देता है। फिल्म की सिनेमाई भाषा गंभीर है और वातावरण कहानी के तनाव को बनाए रखने की कोशिश करता है। हालांकि, 2 घंटे 23 मिनट की फिल्म में कुछ हिस्से अपेक्षाकृत धीमे महसूस हो सकते हैं। यही वजह है कि फिल्म का प्रभाव दर्शक की गंभीर विषयों में रुचि पर काफी निर्भर करता है। दायरा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यह दर्शक को तैयार जवाब देने के बजाय सवालों के साथ छोड़ती है। क्या किसी जघन्य अपराध के बाद त्वरित सजा ही न्याय है? क्या पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाना अपराधियों के पक्ष में खड़ा होना है? और क्या कानून के रखवालों के लिए भी कानून की सीमाएं उतनी ही महत्वपूर्ण हैं? फिल्म इन्हीं सवालों के बीच अपनी कहानी आगे बढ़ाती है। यही इसकी गंभीरता भी है और चुनौती भी। फिल्म दायरा पारंपरिक मसाला फिल्म नहीं है। यह ऐसी गंभीर क्राइम थ्रिलर है जो दर्शक का मनोरंजन करने के साथ उसे कानून और न्याय व्यवस्था पर सोचने के लिए प्रेरित करती है। पृथ्वीराज सुकुमारन का प्रभावशाली अभिनय, करीना कपूर का संयमित प्रदर्शन और मेघना गुलजार का गंभीर निर्देशन फिल्म की प्रमुख विशेषताएं हैं। वहीं स्क्रीनप्ले की गति और कुछ पात्रों के सीमित विकास के कारण फिल्म हर दर्शक को समान रूप से प्रभावित करे, यह जरूरी नहीं। फिल्म देखने का मजा खराब ना हो इसलिए पूरी कहानी आपको नहीं बता रही हूँ कियोंकि फिल्म को आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ सिनेमाघरों में जाकर बड़े पर्दे पर देखने का अलग मजा आएगा। मैँ इस फिल्म को पांच में से साढ़े तीन स्टार देती हूँ और जो दर्शक गंभीर, विचारोत्तेजक और पुलिस-प्रोसीजर आधारित सिनेमा पसंद करते हैं उनके लिए पांच में से चार स्टार देती हूँ।


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