आतंकिस्तान की समाप्ति तक चलेगा ऑपरेशन सिंदूर : इंद्रेश कुमार

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 23 अप्रैल 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), लखनऊ। लिद्दर नदी आज भी उसी रफ्तार से बह रही है—जैसे वक्त ठहरा ही न हो। लेकिन उसके किनारे खड़ा वह पत्थर, वह स्मारक, हर गुजरते इंसान को रोक देता है। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी के उस खूबसूरत घास के मैदान में जो हुआ, उसने सिर्फ 26 जिंदगियां नहीं छीनीं—उसने पूरे देश के दिल पर एक स्थायी निशान छोड़ दिया। अब वही जगह शोक, स्मृति और संकल्प का केंद्र बन चुकी है। पर्यटक यहां तस्वीर लेने नहीं, ठहरकर सोचने आते हैं। एक अनकहा मौन जो किसी भाषण से ज्यादा असरदार है। पहलगाम हमले की बरसी इस बार सिर्फ शोक का दिन नहीं रही। यह दिन एक साफ संदेश बनकर उभरा आतंकवाद अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने देशभर में बैठकें, प्रदर्शन और जनसभाएं आयोजित कर इस दिन को जनआंदोलन का रूप दे दिया। सड़कों पर गुस्सा था, आंखों में आंसू थे, लेकिन सबसे ऊपर था एक दृढ़ निश्चय। पुतले जले, नारे लगे, और हर आवाज में एक ही बात थी अब जवाब मिलेगा, और निर्णायक मिलेगा।

इंद्रेश कुमार ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” कोई अस्थायी कदम नहीं, बल्कि आतंकवाद के खात्मे तक चलने वाला मिशन है। उनके शब्दों में साफ चेतावनी थी—अब भारत सहने वाला देश नहीं रहा। अगर पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने दोबारा सिर उठाया, तो जवाब पहले से ज्यादा कड़ा और निर्णायक होगा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पहलगाम के हर पीड़ित के आंसू का जवाब है। इंद्रेश कुमार ने पाकिस्तान की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाली नीतियों का अंत तय है। उनके अनुसार, पाकिस्तान आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा है और आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पीओजेके (PoJK) एक दिन भारत का हिस्सा बनेगा—यह केवल दावा नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है।

डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि पहलगाम जैसी घटनाएं केवल सुरक्षा बलों के लिए चुनौती नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी हैं। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। सरकार को और सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। डॉ. शालिनी अली ने भावुक शब्दों में कहा कि पहलगाम में जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया, उनके दर्द को देश ने महसूस किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने इसका जवाब दिया है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने देश की महिलाओं को भी इस लड़ाई में मजबूती से खड़े रहने का आह्वान किया। मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफज़ल ने स्पष्ट कहा कि अब समय सिर्फ बयानबाजी का नहीं है। उन्होंने मांग की कि आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों को लगातार और तेज किया जाए। उनके अनुसार, सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब आतंक की जड़ों को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।

पहलगाम की बरसी ने देश को फिर याद दिलाया कि आतंकवाद कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है। इस बार देश ने सिर्फ आंसू नहीं बहाए उसने अपने भीतर उबल रहे आक्रोश को एक स्पष्ट संकल्प में बदल दिया। संदेश बिल्कुल साफ है न भूलेंगे, न छोड़ेंगे। जब तक आतंक की आखिरी जड़ खत्म नहीं होती, यह लड़ाई थमने वाली नहीं। यही वजह रही कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेतृत्व में देशभर में जन आक्रोश सड़कों पर उतर आया। कहीं रैलियां निकलीं, कहीं जुलूस, तो कहीं आतंकवाद के प्रतीकों का पुतला दहन हुआ। हर शहर में, हर सभा में एक ही स्वर गूंजा अब नरमी नहीं, सीधी और निर्णायक कार्रवाई। यह सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि एक जनभावना थी, जो साफ कह रही थी कि देश अब इंतजार नहीं करेगा। लोगों ने एक सुर में सरकार और सेना से अपील की आतंक के खिलाफ कार्रवाई रुके नहीं, झुके नहीं, बल्कि और तेज हो।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

असंगठित श्रमिकों के अधिकारों पर राष्ट्रीय मंथन

प्रदूषण कम करने में किसानो का बड़ा योगदान होगा : बंकरमैन श्रीपाल

Healthcare से Solar Energy तक Mohammad Zeeshanul Haque ने बनाई सफलता और नवाचार की नई पहचान