IAP के जॉइंट सेक्रेटरी (ईस्ट ज़ोन) डॉ.जोजी जॉन के खिलाफ यौन शोषण और धोखाधड़ी के आरोपों में दर्ज हुई FIR

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 24 सितम्बर 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) के जॉइंट सेक्रेटरी (ईस्ट ज़ोन) डॉ.जोजी जॉन के खिलाफ एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक पेशेवर मेंटरशिप संबंध धीरे-धीरे भावनात्मक और व्यक्तिगत शोषण में बदल गया। 4 जून 2026 को दर्ज FIR (संख्या 0241) के अनुसार, शिकायतकर्ता ने डॉ. जॉन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 69, 75 और 79 के तहत आरोप लगाए हैं, जो धोखे से यौन संबंध, यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित हैं। शिकायत के अनुसार, अगस्त 2025 में दोनों की पहली बातचीत फेसबुक मैसेंजर के माध्यम से हुई थी। आरोप है कि डॉ.जॉन ने स्वयं को एक वरिष्ठ पेशेवर बताते हुए शिकायतकर्ता के करियर को मार्गदर्शन देने, पेशेवर नेटवर्क बनाने और फिजियोथेरेपी क्षेत्र में अवसर दिलाने का आश्वासन दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि शुरुआती पेशेवर बातचीत धीरे-धीरे व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंधों में बदल गई। उन्हें करियर में उन्नति, पेशेवर पहचान, संगठनों में पद दिलाने, लेक्चर और प्रकाशन के अवसर तथा क्लिनिक स्थापित करने में सहायता का भरोसा दिया गया।

FIR में उल्लेख है कि इन आश्वासनों के चलते शिकायतकर्ता भावनात्मक रूप से जुड़ गईं और अपने पेशेवर भविष्य को लेकर डॉ.जॉन पर भरोसा करने लगीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉ.जॉन ने स्वयं को शादीशुदा होने के बावजूद उनसे भावनात्मक रूप से जुड़े होने का दावा किया और कहा कि वे अपनी पत्नी से अलग रह रहे हैं। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 27 मार्च 2026 को दिल्ली आने-जाने के लिए उनके टिकट की व्यवस्था की जिसके बाद दोनों की दिल्ली में मुलाकात हुई। आरोप है कि इन वादों और भरोसे का इस्तेमाल कर उनसे व्यक्तिगत और यौन संबंध बनाए गए। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले मीडिया से बातचीत में शिकायतकर्ता ने कहा कि उनकी कुछ महत्वपूर्ण बातें FIR में शामिल नहीं की गईं, जबकि उन्होंने जांच अधिकारी को इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान उन्हें बिना जानकारी के कुछ पिलाया गया, जिसे पुलिस रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा इस घटना और इसके बाद की परिस्थितियों के कारण मैं अवसाद में चली गई थी। मुझे संभलने और आगे आने की हिम्मत जुटाने में समय लगा। अब मैं मजबूत महसूस कर रही हूं और न्याय की मांग के लिए सामने आई हूं। मैं निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई चाहती हूं। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया में शिकायतकर्ता की ओर से हितेन मेहता (लीगल एडवाइजर), भावसर एंड मेहता एंड कंपनी, एडवोकेट कृति भावसर तथा एडवोकेट एशना कुमार (एसोसिएट, भावसर एंड मेहता एंड कंपनी) सहयोग प्रदान करेंगे। फिलहाल मामले की जांच जारी है। अभी तक किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया गया है।

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