इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए IMA ने शुरू किया भारतीय टीकाकरण सप्ताह


21 से 27 सितंबर तक चलेगा अभियान, बुखार के दौरान टीकाकरण को लेकर भ्रम दूर करने पर जोर

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शुक्रवार 25 सितम्बर 2026 (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने एबॉट के सहयोग से 21 से 27 सितंबर तक भारतीय टीकाकरण सप्ताह मनाने की घोषणा की है। राष्ट्रव्यापी पहल का उद्देश्य निवारक स्वास्थ्य देखभाल और विशेष रूप से वार्षिक इन्फ्लुएंजा टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। IMA के अनुसार, फ्लू को केवल सामान्य मौसमी बीमारी मानना उचित नहीं है। कुछ लोगों में इन्फ्लुएंजा गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष जोखिम वाले समूहों में माना जाता है। अभियान के तहत IMA की विशेषज्ञ समिति ने बुखार से पीड़ित या बीमारी से उबर रहे लोगों में टीकाकरण को लेकर चिकित्सकीय मार्गदर्शन जारी किया है। सिफारिशों के अनुसार, अधिकांश मामलों में हल्का बुखार टीकाकरण को टालने का कारण नहीं होना चाहिए। वहीं मध्यम से गंभीर बीमारी की स्थिति में व्यक्ति के स्वस्थ होने तक टीकाकरण स्थगित किया जा सकता है। अंतिम निर्णय मरीज की स्थिति के आधार पर स्वास्थ्य सेवा पेशेवर द्वारा किया जाना चाहिए। अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य उस भ्रम को दूर करना है जिसके कारण लोग बुखार के दौरान या उससे ठीक होने के बाद फ्लू का टीका लगवाने में अनावश्यक देरी कर देते हैं। IMA ने स्वास्थ्यकर्मियों से यह भी आग्रह किया है कि यदि किसी कारण से टीकाकरण टालना पड़े तो मरीज को अगली निर्धारित तारीख की स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि टीकाकरण का अवसर न छूटे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में वयस्क टीकाकरण की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है। राष्ट्रव्यापी NSS आंकड़ों में 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के केवल 1.98 प्रतिशत वयस्कों द्वारा वयस्क टीके लगवाने की जानकारी सामने आई है, जबकि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में यह आंकड़ा 0.40 प्रतिशत बताया गया है। IMA और एबॉट की यह पहल समय पर और सूचित टीकाकरण निर्णयों को बढ़ावा देने तथा वयस्क टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है।


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