फिल्म समीक्षा : द वन The Vvaan - Force Of The Forrest
लोककथा, रहस्य और प्रकृति की ताकत का रोमांचक सफर है फिल्म द वन
सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म में आस्था बनाम तर्क की दिलचस्प जंग
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शनिवार 26 सितम्बर 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), (फिल्म समीक्षक : रेहाना परवीन) नई दिल्ली। फिल्म द वन The Vvaan - Force Of The Forrest वीरवार 24 सितम्बर 2026 को विशेष प्रेस शो डिलाइट, दिल्ली में मुझे देखने का अवसर मिला। फिल्म द वन The Vvaan - Force Of The Forrest में सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, सुनील ग्रोवर, अनुप सोनी, श्वेता तिवारी, मनीष पॉल इत्यादि मुख्य कलाकार हैं। फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने दिया है फिल्म का निर्माण बालाजी मोशन पिक्चर्स & द विरल फीवर ने किया है। फिल्म फैंटेसी, एक्शन, एडवेंचर और पौराणिक लोककथा पर आधारित है। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने U/A 16+ प्रमाणपत्र दिया है यानी 16 वर्ष या उससे अधिक उम्र के दर्शक इसे सिनेमाघरों में देख सकते हैं। फिल्म की अवधि 2 घंटे 16 मिनट 25 सेकंड है। फिल्म सिनेमाघरों में 25 सितंबर 2026 को प्रदर्शित हुई है। फिल्म द वन The Vvaan - Force Of The Forrest भारतीय लोककथाओं, रहस्य और प्रकृति की अदृश्य शक्तियों को आधुनिक फैंटेसी-थ्रिलर के साथ जोड़ने की कोशिश करती। फिल्म एक अलग तरह की कहानी लेकर दर्शकों के सामने आई है। फिल्म का आधार बिहार की लोकमान्यताओं और जंगल से जुड़ी रहस्यमयी शक्तियों को बनाया गया है। निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा ने लोककथा को बड़े पर्दे के रोमांच के साथ पेश करने का प्रयास किया है।
फिल्म की कहानी का केंद्र ऋषि है (सिद्धार्थ मल्होत्रा) जो आधुनिक सोच और तर्क में विश्वास रखने वाला व्यक्ति है। पत्नी के साथ अपने पैतृक गांव पहुंचने के बाद उसका सामना जंगल, स्थानीय मान्यताओं और एक रहस्यमयी वन शक्ति से होता है। इसके बाद उसकी सोच और विश्वास दोनों चुनौती के घेरे में आ जाते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका वातावरण और लोककथा का इस्तेमाल है। जंगल की पृष्ठभूमि, रहस्यमयी घटनाएं और ग्रामीण परिवेश कहानी को एक अलग रंग देती है। शुरुआती हिस्से में निर्देशक धीरे-धीरे रहस्य को सामने लाते हैं, जिससे दर्शकों की उत्सुकता बनी रहती है। सिद्धार्थ मल्होत्रा ने तर्कवादी किरदार से रहस्यमयी परिस्थितियों में फंसे व्यक्ति तक के बदलाव को निभाने की कोशिश की है जबकि तमन्ना भाटिया कहानी में भावनात्मक पक्ष जोड़ती हैं। फिल्म का विषय केवल रहस्य और रोमांच तक सीमित नहीं है। आस्था और तर्क आधुनिक जीवन और परंपरा तथा मनुष्य और प्रकृति के रिश्ते जैसे सवाल भी कहानी में दिखाई देते हैं। यही पक्ष इसे सामान्य हॉरर या सुपरनैचुरल फिल्म से अलग करने की कोशिश करता है। हालांकि फिल्म का दूसरा भाग उतना प्रभावशाली नहीं रह पाता। कहानी में कई विचार और घटनाएं एक साथ आने लगती हैं जिससे पटकथा का प्रवाह कुछ जगह कमजोर पड़ता है। रोमांस, हास्य, लोककथा और अलौकिक घटनाओं के बीच संतुलन हर जगह समान नहीं बन पाता। यदि दूसरे भाग में कहानी को थोड़ा अधिक कसाव के साथ आगे बढ़ाया जाता तो फिल्म का प्रभाव और गहरा हो सकता था।
सिद्धार्थ मल्होत्रा फिल्म की कहानी को अपने कंधों पर आगे ले जाने का प्रयास करते हैं। तमन्ना भाटिया का किरदार कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती देता है। सुनील ग्रोवर और अन्य कलाकारों की मौजूदगी फिल्म में विविधता लाती है। जंगल और रहस्य का दृश्य संसार फिल्म की खासियत है और बड़े पर्दे पर इसका प्रभाव अधिक महसूस किया जा सकता है। फिल्म देखने का मजा खराब ना हो इसलिए पूरी कहानी आपको नहीं बता रही हूँ कियोंकि फिल्म को आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ सिनेमाघरों में जाकर बड़े पर्दे पर देखने का अलग मजा आएगा। मैँ इस फिल्म को पांच में से साढ़े तीन स्टार देती हूँ और जो दर्शक फैंटेसी, एक्शन, एडवेंचर और पौराणिक लोककथा पर आधारित सिनेमा पसंद करते हैं उनके लिए पांच में से चार स्टार देती हूँ।


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