मोहम्मद शमी ने टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ेंगे
शब्दवाणी सम्माचार टीवी, वीरवार 21 अक्टूबर 2026, सादिक जलाल (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), नई दिल्ली। बंगाल ने रणजी ट्रॉफी मुकाबले में सर्विसेज के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की, लेकिन मैच के बाद भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के बयान भी चर्चा का विषय बन गए। लंबे समय से भारतीय टीम में उनकी वापसी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शमी ने साफ किया कि उन्होंने राष्ट्रीय टीम में लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। हालांकि, वह भविष्य को लेकर कोई बड़ी भविष्यवाणी करने के बजाय अपने खेल, फिटनेस और मौजूदा प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहते हैं। उनका मानना है कि खिलाड़ी के जीवन में लक्ष्य होना जरूरी है और जब तक मैदान पर उतरने का अवसर मिल रहा है, तब तक मेहनत जारी रखनी चाहिए।शमी ने बातचीत के दौरान भारतीय टीम में वापसी की संभावनाओं, अपनी शारीरिक क्षमता, लंबे समय तक गेंदबाजी करने, चयनकर्ताओं से संपर्क, घरेलू क्रिकेट के महत्व और देश में तेज गेंदबाजों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसे कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चयन उनके हाथ में नहीं है, लेकिन अपनी तैयारी और प्रदर्शन को बेहतर बनाना उनके नियंत्रण में है। इसी सोच के साथ वह बंगाल की ओर से लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं। भारतीय टीम में वापसी की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर शमी का जवाब स्पष्ट था। उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद क्यों छोड़ दूं? उम्मीद हमेशा बनी रहनी चाहिए।"शमी के मुताबिक, किसी भी पेशे या खेल में लक्ष्य के बिना आगे बढ़ना मुश्किल है। हर खिलाड़ी का अपना उद्देश्य होता है और उसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समय वह रणजी ट्रॉफी में बंगाल के लिए खेल रहे हैं और उनकी प्राथमिकता अपनी टीम को जीत दिलाना है।उनकी बातों से साफ है कि घरेलू क्रिकेट में खेलना उनके लिए केवल भारतीय टीम में वापसी का रास्ता तलाशने का माध्यम नहीं है। वह बंगाल की टीम के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी पूरी गंभीरता से निभा रहे हैं। उनके लिए हर मैच अपनी क्षमता साबित करने और खेल में सुधार करने का अवसर है। शमी का मानना है कि खिलाड़ी को अपनी मंजिल तय रखनी चाहिए, लेकिन उसे हासिल करने के लिए वर्तमान में मिलने वाले अवसरों का पूरा इस्तेमाल करना भी जरूरी है। भारतीय टीम में वापसी की इच्छा उनके मन में जरूर है, लेकिन वह इस लक्ष्य के लिए किसी निश्चित समयसीमा का दबाव नहीं लेना चाहते।
शमी ने कहा कि वह इस बात की चिंता में नहीं रहना चाहते कि अगला मौका कब मिलेगा या चयनकर्ता उन्हें टीम में कब शामिल करेंगे। उनकी कोशिश है कि जहां भी खेलने का अवसर मिले, वहां अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा आपको जो भी मैच खेलने को मिल रहा है, खेलते रहिए और खुद को बेहतर बनाते रहिए। मेरा हमेशा से कहना है कि आपका ध्यान अपने कौशल और फिटनेस पर होना चाहिए।"यह दृष्टिकोण उनके मौजूदा क्रिकेट करियर की दिशा को भी स्पष्ट करता है। शमी भविष्य में होने वाली प्रतियोगिताओं या संभावित चयन को लेकर अनुमान लगाने के बजाय प्रत्येक मैच को अपनी तैयारी का हिस्सा मान रहे हैं। उनके लिए गेंदबाजी में लय बनाए रखना, अपनी तकनीक को निखारना और शारीरिक रूप से तैयार रहना सबसे महत्वपूर्ण है। तेज गेंदबाज के रूप में लगातार अच्छी लय बनाए रखना आसान नहीं होता। इसके लिए नियमित अभ्यास, मैच खेलने का अनुभव और शरीर की जरूरतों के अनुरूप तैयारी जरूरी होती है। शमी घरेलू क्रिकेट को इसी लिहाज से अहम मानते हैं। उनके अनुसार, मैदान पर बने रहने से खिलाड़ी की तैयारी और प्रतिस्पर्धी क्षमता दोनों मजबूत होती हैं।
भारतीय क्रिकेट का अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है। ऐसे में शमी से यह भी पूछा गया कि क्या वह आने वाले महीनों या अगले वर्ष होने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखकर अपनी तैयारी कर रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि वह बहुत दूर की नहीं सोचते, क्योंकि भविष्य में परिस्थितियां किस तरह बदलेंगी, इसका अनुमान लगाना संभव नहीं है।उन्होंने कहा कि आज खिलाड़ी मैदान पर उतर रहा है, लेकिन कल उसकी स्थिति क्या होगी, यह कोई नहीं जानता। इसलिए जरूरत इस बात की है कि जब तक अवसर उपलब्ध है, तब तक खेलते हुए अपनी तैयारी जारी रखी जाए।शमी के मुताबिक, उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने का मौका मिल रहा है और वह इसका पूरा लाभ उठाना चाहते हैं। भारतीय टीम में वापसी की संभावनाओं पर विचार करने के बजाय उनका ध्यान इस बात पर है कि वह मैच के लिए पूरी तरह तैयार रहें।उनकी यह सोच उनके करियर के मौजूदा दौर में खास मायने रखती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की राह आसान नहीं होती, विशेषकर तब जब टीम में जगह बनाने के लिए कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दावेदारी पेश कर रहे हों। ऐसे में शमी अपने अनुभव और कौशल के सहारे खुद को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रखना चाहते हैं।
शमी की फिटनेस को लेकर भी लंबे समय से चर्चा होती रही है। भारतीय टीम से बाहर रहने के दौरान उनकी शारीरिक क्षमता और लंबे स्पैल तक गेंदबाजी करने की योग्यता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालांकि, शमी ने अपनी फिटनेस को लेकर भरोसा जताया।उन्होंने कहा, "हम अपनी फिटनेस के चरम पर हैं। इसमें झूठ बोलने की कोई बात नहीं है।"जब उनसे पूछा गया कि क्या वह टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक गेंदबाजी करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं, तो उन्होंने सवाल उठाया कि इसका फैसला कौन करेगा। उनके अनुसार, किसी तेज गेंदबाज से कितने ओवर गेंदबाजी कराई जानी चाहिए, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। इसका फैसला मैच की परिस्थिति, टीम की जरूरत और बल्लेबाज की स्थिति को देखकर किया जाता है। शमी ने समझाया कि कभी बल्लेबाज के असहज होने पर तेज गेंदबाज से लगातार गेंदबाजी कराई जा सकती है, जबकि किसी दूसरी परिस्थिति में स्पिनर से विकेट हासिल करने की उम्मीद की जा सकती है। ऐसे फैसले कप्तान और टीम प्रबंधन को मैदान पर मौजूद परिस्थितियों के अनुसार लेने होते हैं।अपनी गेंदबाजी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वह उस दिन करीब डेढ़ घंटे तक गेंदबाजी कर चुके थे और उन्हें इसमें कोई परेशानी नहीं हुई। उनका कहना था कि किसी खिलाड़ी की क्षमता का आकलन केवल बाहर से लगाए गए अनुमानों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।शमी की इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि वह अपनी फिटनेस और गेंदबाजी की क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं। हालांकि, किसी भी खिलाड़ी की उपलब्धता और कार्यभार का अंतिम आकलन टीम की जरूरतों तथा संबंधित चिकित्सकीय और खेल संबंधी परिस्थितियों के अनुसार ही किया जाता है।
शमी से यह सवाल भी किया गया कि क्या पिछले एक वर्ष के दौरान उनकी चयनकर्ताओं से कोई बातचीत हुई है। इस पर उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, "मैं टीम में नहीं हूं, अनुबंध में भी नहीं हूं। फिर मुझसे कौन बात करेगा और क्यों करेगा?" उनके इस जवाब से जाहिर हुआ कि वह चयन प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक अटकलों में नहीं पड़ना चाहते। राष्ट्रीय टीम में चयन करना चयनकर्ताओं का काम है, जबकि खिलाड़ी की जिम्मेदारी अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाना है। शमी ने बातचीत के दौरान ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि वह चयनकर्ताओं से संवाद को अपनी प्राथमिकता बना रहे हैं। इसके बजाय उन्होंने घरेलू क्रिकेट में खेलने और अपनी तैयारी जारी रखने पर जोर दिया। उनका मानना है कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करना ही खिलाड़ी के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय टीम में वापसी को लेकर सवाल उठने के बावजूद शमी ने अपने जवाबों में किसी तरह की शिकायत या भविष्य को लेकर निश्चित दावा करने से परहेज किया। उन्होंने अपनी स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि वह वही करेंगे, जो उनके हाथ में है।
भारतीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की नई पीढ़ी लगातार अपनी प्रतिभा दिखा रही है। ऐसे में शमी से मौजूदा तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन और उनकी क्षमताओं के बारे में भी सवाल किया गया। हालांकि, उन्होंने किसी खिलाड़ी की रैंकिंग करने या उसके प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।उन्होंने कहा, "यह मेरा काम नहीं है। मैं अपना काम कर रहा हूं। किसी के प्रदर्शन को आंकना या उस पर सवाल उठाना मेरी जिम्मेदारी नहीं है।" शमी का यह रुख बताता है कि वह दूसरे गेंदबाजों से तुलना करने के बजाय अपने खेल पर ध्यान देना चाहते हैं। भारतीय टीम में तेज गेंदबाजी के लिए प्रतिस्पर्धा लगातार बनी हुई है और कई युवा गेंदबाज अपनी जगह मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे माहौल में प्रत्येक खिलाड़ी को अपने प्रदर्शन के आधार पर दावेदारी पेश करनी होती है।अनुभवी गेंदबाज होने के बावजूद शमी ने किसी युवा खिलाड़ी के बारे में टिप्पणी करने या अपनी तुलना दूसरों से करने की जरूरत नहीं समझी। उनके लिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि वह मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करें और अपनी फिटनेस बनाए रखें।
बातचीत का एक अहम हिस्सा घरेलू क्रिकेट और बंगाल की टीम के साथ शमी के संबंधों पर केंद्रित रहा। उन्होंने बंगाल की भूमिका को याद करते हुए कहा, "इस टीम ने मुझे यह पहचान दी है।" उन्होंने यह भी कहा कि जब उनका क्रिकेट करियर समाप्त होगा, तो वह इसी टीम के साथ उसे अलविदा कहना चाहेंगे। उनके लिए यह मायने नहीं रखता कि मुकाबला किस स्तर का है या प्रतियोगिता कितनी बड़ी है। खिलाड़ी की निष्ठा और मेहनत सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। शमी ने कहा कि मेहनत करना और अपनी टीम के प्रति वफादार रहना खिलाड़ी के हाथ में है। बाकी चीजों पर उसका नियंत्रण नहीं होता। इसलिए उसे लगातार खेलते रहना चाहिए।उनके इस बयान से बंगाल के साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव का पता चलता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के बावजूद वह घरेलू क्रिकेट को अपने सफर का अहम हिस्सा मानते हैं। रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में खेलना उनके लिए किसी मजबूरी का परिणाम नहीं, बल्कि अपनी टीम के लिए योगदान देने का अवसर है।शमी का मानना है कि खिलाड़ी की पहचान केवल अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों से नहीं बनती। जिस टीम ने उसे आगे बढ़ने का मौका दिया हो, उसके प्रति जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बंगाल के लिए खेलते हुए वह इसी भावना के साथ अपना योगदान देना चाहते हैं।
शमी ने बंगाल के रणजी ट्रॉफी अभियान में इससे पहले दिल्ली के खिलाफ भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। उन्होंने पहली पारी में चार विकेट हासिल किए और मैच में कुल पांच विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की। इस प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चा फिर तेज हुई। शमी ने आखिरी बार २०२५ में चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उसके बाद से वह राष्ट्रीय टीम से बाहर हैं और घरेलू क्रिकेट में खेल रहे हैं। उनकी हालिया गेंदबाजी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या उन्हें भारतीय टीम में वापसी का अवसर मिल सकता है।हालांकि, इस सवाल पर शमी ने कोई दावा नहीं किया। उन्होंने न तो वापसी की तारीख बताई और न ही किसी आगामी प्रतियोगिता में खेलने की संभावना को लेकर निश्चित बयान दिया। उनके अनुसार, अभी उनके पास क्रिकेट खेलने के अवसर हैं और उन्हें पूरी एकाग्रता के साथ उनका लाभ उठाना चाहिए। मोहम्मद शमी की पूरी बातचीत का सार यही रहा कि वह अपने भविष्य को लेकर जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहते। भारतीय टीम में वापसी की इच्छा उनके मन में है, लेकिन इसके लिए वह किसी तरह का दबाव अपने ऊपर नहीं डाल रहे हैं। उनकी प्राथमिकता फिटनेस बनाए रखना, गेंदबाजी में लय हासिल करना और बंगाल के लिए अच्छा प्रदर्शन करना है।
वह चयनकर्ताओं के फैसले, दूसरे गेंदबाजों की उपलब्धियों या आने वाले महीनों की संभावनाओं पर ध्यान देने के बजाय उन चीजों पर मेहनत करना चाहते हैं, जिन्हें वह खुद बेहतर बना सकते हैं। उनके मुताबिक, खिलाड़ी को अपने कौशल और शारीरिक तैयारी पर ध्यान देना चाहिए तथा हर अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। शमी का संदेश उन खिलाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो अपने करियर के किसी कठिन दौर से गुजर रहे हैं। किसी लक्ष्य को हासिल करने की इच्छा बनाए रखना जरूरी है, लेकिन उसके लिए लगातार मेहनत करना और वर्तमान अवसरों का सदुपयोग करना भी उतना ही अहम है।भारतीय टीम में वापसी कब होगी, यह फिलहाल तय नहीं है। लेकिन शमी ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी उम्मीद छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उनके शब्दों में, "उम्मीद हमेशा बनी रहनी चाहिए।" यही सोच उनके मौजूदा क्रिकेट सफर की दिशा तय कर रही है—खेलते रहना, खुद को बेहतर बनाना और जब भी मौका मिले, उसके लिए पूरी तरह तैयार रहना।

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